गोरक्षक तो ठीक, गोतस्करों से कौन जान बचाएगा?

कांग्रेस प्रायोजित मीडिया ने पूरे देश में गोरक्षक हिंसा को बड़ा मुद्दा बना रखा है, लेकिन क्या आपको पता है कि जितने लोग गोरक्षकों के हाथों मारे जा रहे हैं उससे कहीं ज्यादा लोग गाय की तस्करी करने वालों के शिकार बन रहे हैं। लेकिन इन घटनाओं पर मीडिया कभी ध्यान नहीं देता। इसे लेकर कभी कोई विरोध प्रदर्शन भी नहीं होता। गोरक्षक के हाथों बीते 2-3 साल में कुछ तस्करों की मौत के बाद जिस तरह की मीडिया कवरेज और सहानुभूति की लहर पैदा करने की कोशिश हुई है उससे तस्करी करने वालों के हौसले बुलंद हुए हैं। जिस तरह से किसी को पीट-पीटकर मार देना अपराध है, उसी तरह से गायों और दूसरे जानवरों के तस्करों के हमले भी अपराध हैं। लेकिन उन्हें मीडिया और राजनीतिक दलों की शह मिल रही है। यहां यह बात जानना जरूरी है कि पशु तस्करी के ये जितने मामले सामने आए हैं उनमें से ज्यादातर में आरोपी मुसलमान हैं। हम बीते 2 साल की ऐसी कुछ घटनाओं के बारे में आपको याद दिलाना चाहते हैं।

2 जुलाई 2017, मेरठ

जब पूरे देश में गाय के नाम पर हिंसा को लेकर हंगामा मचा हुआ है, दिल्ली के करीब आगरा के करीब कोटरेकापुरा में पशु तस्करों ने चरण सिंह नाम के एक किसान की गोली मारकर हत्या कर दी। चरण सिंह ने तस्करों में से एक को पकड़ लिया था। उसे छुड़ाने के लिए उसके साथियों ने चरण सिंह को करीब से गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। ये खबर कुछ लोकल हिंदी अखबारों में अंदर के पेज पर छपी है। इसके अलावा टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी अंदर के पन्नों पर एक छोटी सी खबर छापी है। जबकि ये मामला इस बात का सबूत है कि गायों की तस्करी करने वाले कितने खतरनाक हैं। जानवर काटने के लिए ले जाते वक्त उन्हें कोई रोकता है तो वो फौरन उसे गोली भी मार देते हैं।

30 मई 2017, जौनपुर, यूपी

यहां मुगराबादशाहपुर इलाके के एक गांव में पशु तस्करों ने गांववालों पर फायरिंग कर दी थी, जिसमें 5 लोगों को गोली लगी थी। पूर्वी यूपी के इस इलाके में गांवों में घर के बाहर घास चर रहे दुधारू पशुओं की चोरी की घटना बेहद आम है। इस काम के लिए तस्करों के कई गिरोह यहां सक्रिय हैं जो हथियारबंद होकर आते हैं और गाड़ी में भरकर गायों और भैंसों को उठा ले जाते हैं। जौनपुर की इस घटना के बाद लोगों का सब्र जवाब दे गया और उन्होंने सड़क पर जाम भी लगा दिया था। लेकिन पुलिस ने भरोसा दिलाया कि उनके पशु जल्द बरामद कर लिए जाएंगे। लोगों को आज भी इंतजार है कि उनके कीमती दुधारू पशु कभी वापस लौटेंगे। माना जाता है कि इन सभी को बिहार के रास्ते अवैध कत्लखानों तक पहुंचा दिया गया होगा।

6 फरवरी 2017, मुरादाबाद

यहां के पाकबड़ा में पशु तस्करों ने एक किसान को गोली मार दी थी। पशु तस्करों ने रात के वक्त घर के बाहर बंधे दुधारू जानवरों की चोरी के मकसद से किसान के घर पर धावा बोला था, लेकिन इससे पहले कि वो अपने मकसद में कामयाब हो पाते, घर के सदस्यों की नींद खुल गई। भागते वक्त बदमाशों ने गोली चलानी शुरू कर दी, जो घर के मुखिया को लगी।

इसके अलावा भी यूपी और देश के तमाम दूसरे राज्यों में पशु तस्करों के हाथों आए दिन हत्या के मामले सामने आते रहते हैं:

  • 30 मई को यूपी के एटा जिले के बागवाला इलाके के अहमदाबाद गांव में गाय चोरी करके भाग रहे पशु तस्करों ने 16 साल की एक लड़की को गोली मार दी।
  • पिछले महीने एटा जिले के ही घिरौरा गांव में 7 पशु तस्करों ने गाय ले जाते वक्त पकड़े जाने के डर से गांववालों पर फायरिंग की थी, जिसमें कुछ लोग घायल हुए थे।
  • 19 जून को फिरोजाबाद के गांव पिलखतर जैत में छह गायें चोरी करके भाग रहे तस्करों ने किसान के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी थी।
  • पिछले साल 1 अगस्त के दिन कासगंज जिले में गायों की तस्करी करने वालों ने दो किसानों को गोली मार दी थी, क्योंकि वो उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रहे थे।
  • पिछले साल अगस्त में ही जौनपुर जिले में गाय तस्करों ने हेड कॉन्स्टेबल त्रिलोकी तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

दरअसल ये कुछ गिनी-चुनी घटनाएं हैं जो पिछले दिनों लोकल अखबारों में छप गईं। वरना पशु तस्करों के हाथों आए दिन मारे जा रहे लोगों की खबर आम तौर पर अखबारों में छपती ही नहीं। मारे जाने वालों की वास्तविक संख्या सैकड़ों में भी हो सकती है। लेकिन हैरानी है कि गोरक्षक हिंसा के 3-4 मामलों को इतनी तूल दे दी गई, मानो पूरे देश में गोरक्षक सड़कों पर लाठी लेकर घूम रहे हों। और यहां तक कि देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी बयान देने की जरूरत पड़ गई।

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