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स्पीकर के तौर पर मीरा कुमार का आखिरी ‘कांड’

(फाइल तस्वीर)

राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार मीरा कुमार की कहानियां सार्वजनिक होने का सिलसिला जारी है। ये मामला 2014 लोकसभा चुनाव के वक्त का है। मीरा कुमार लोकसभा की स्पीकर होने के नाते लोकसभा टीवी की भी प्रमुख होती हैं। मीरा कुमार ने इसका भरपूर फायदा उठाया। लोकसभा टीवी पर उनके और उनके पिता जगजीवन राम को लेकर इतने प्रोग्राम आया करते थे, जितने की प्रधानमंत्री के बारे में भी नहीं। मीरा कुमार ने लोकसभा टीवी को अपने निजी चैनल की तरह इस्तेमाल किया और अपने कार्यकाल के आखिरी दिन उन्होंने जो कुछ किया, वो सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। उन्होंने अपने आखिरी दिन चैनल के सीईओ राजीव मिश्रा को नौकरी से निकाल दिया।

जब भड़क गईं मीरा कुमार!

लोकसभा में बैठ जाइए, बैठ जाइए बोलने के लिए चर्चित मीरा कुमार निजी जिंदगी में कितनी तुनकमिजाज हैं आप इसी बात से समझ सकते हैं कि उन्होने लोकसभा टीवी के सीईओ को सिर्फ इसलिए नौकरी से निकाल दिया, क्योंकि चैनल पर चुनावी खबरों में मीरा कुमार के हारने की भी खबर चली थी। ये खबर देखकर वो इतना भड़क गईं कि पहले चैनल के अधिकारियों की क्लास लगा दी और फिर सीईओ राजीव मिश्रा को बर्खास्त कर दिया। 26 मई 2014 को मोदी सरकार ने शपथ ली थी। मीरा कुमार तकनीकी रूप से 30 मई की दोपहर तक लोकसभा की कार्यवाहक अध्यक्ष थीं। 30 मई की दोपहर कमलनाथ को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया था।

हारने की खबर पर बौखलाईं

राजीव मिश्रा खुद भी यह बता चुके हैं कि लोकसभा चुनाव के वक्त जब सभी नतीजे चैनल पर दिखाए जा रहे थे, तो उनमें मीरा जी के चुनाव क्षेत्र सासाराम की खबर भी चली। चैनल ने पहले दिखाया कि वो अपने प्रतिद्वंदी से पीछे चल रही हैं और फिर हारने की खबर चलाई। वो वाकई चुनाव हार भी चुकी थीं, लेकिन अपनी हार की खबर ‘अपने चैनल’ पर देखकर बौखला गईं। इसके बाद अपने कार्यकाल के आखिरी दिन उन्होने एक नोटिफिकेशन जारी करके सीईओ राजीव मिश्रा का कार्यकाल 31 मई तक के लिए सीमित कर दिया। राजीव मिश्रा का कहना है कि वो इस बात से भी नाराज थीं कि लोकसभा टीवी ने नतीजे आने के बाद संसद के सेंट्रल हॉल में हुई बीजेपी संसदीय दल की बैठक का सीधा प्रसारण क्यों किया।

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सीईओ की सैलरी भी रोक दी

मीरा कुमार की बौखलाहट इस कदर थी कि उन्होंने राजीव मिश्रा का वेतन भी रुकवा दिया। उनका वेतन 31 मई को बैंक खाते में जमा हो गया, लेकिन मीरा कुमार ने स्टेट बैंक के अफसरों पर दबाव डाला कि वो खाते में जमा सैलरी वापस निकाल लें। जबकि रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक ऐसा करने के लिए ग्राहक से अनुमति लेना जरूरी होता है। मीरा के दबाव में बैंक ने राजीव मिश्रा के अकाउंट से सैलरी वापस निकाल भी ली। ये सारा मामला मीडिया की सुर्खियों में आया भी था, लेकिन उस वक्त मोदी सरकार की जीत के जश्न में इस पर किसी का ध्यान नहीं गया था।

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