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चीनी सेना से झगड़े का सच जो मीडिया ने नहीं बताया

पिछले दिनों सिक्किम में चीन से लगे बॉर्डर पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झगड़े की तस्वीरें सामने आई थीं। लेकिन हैरानी की बात है कि भारतीय मीडिया ने इस वीडियो के बारे में सही जानकारी न देकर झूठा प्रचार किया। भारतीय सेना के हवाले से अब असली तस्वीर सामने आ रही है। न्यूज़लूज़ ने इस बारे में चीन बॉर्डर पर तैनात सेना के एक उच्च अधिकारी से संपर्क करके पूरी घटना की जानकारी ली। जो बात सामने आई है वो मीडिया में बताई जा रही खबर से बिल्कुल अलग है। इसके मुताबिक बॉर्डर पर हुआ सैनिकों का झगड़ा दरअसल चीन की हार की निशानी है। क्योंकि भारतीय जवानों ने पहली बार उन्हें न सिर्फ मुंहतोड़ जवाब दिया, बल्कि पीछे भी धकेल दिया। मीडिया ने एक झूठ फैलाया था कि चीन ने भारत के 2 बंकर तबाह कर दिए। जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ।

चीन बॉर्डर पर क्या हुआ?

हमारे सूत्र ने बताया कि पिछले एक महीने से सिक्किम में नाथूला पास के करीब चुंबी घाटी में तनाव बना हुआ था। ये जगह एक तरह का तिराहा है। क्योंकि यहां पर चीन के तिब्बत, भूटान और भारत के सिक्किम की सीमा लगती है। चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) भारत के इलाके से होते हुए भूटान तक सड़क बनाने की कोशिश में है। वो अपने इलाके में तिब्बत तक पहले ही सड़क बना चुके हैं। भारतीय सेना इस पर नजर बनाए हुए थी और जैसे ही भारतीय इलाके में सड़क का काम शुरू करने की कोशिश हुई भारतीय सेना ने पहुंचकर चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया। जो तस्वीरें दिखाई जा रही हैं वो उसी दौरान की हैं। इस वीडियो को गौर से देखें तो भारतीय जवान ही हावी दिखाई दे रहे हैं। (नीचे देखें वीडियो)

सेना ने नहीं बनने दी सड़क

चीन सेना ने कुछ दिन पहले अपने साथ कंस्ट्रक्शन का सामान और मजदूरों को भी लाना शुरू कर दिया। चेतावनी के बावजूद उन्होंने भारतीय इलाके में मजदूरों के टेंट लगाने शुरू कर दिए। जिसके बाद सेना के और जवानों को हालात पर काबू करने के लिए भेजा गया। भारतीय सैनिकों ने चीन के टेंट उखाड़कर फेंक दिए। भारत के बंकर तबाह करने वाली बात भारतीय मीडिया के मन की उपज थी, ताकि मोदी सरकार और भारतीय सेना को नीचा दिखाया जा सके। इस पूरी घटना के बारे में चीनी सेना ने जो औपचारिक बयान जारी किया है उसमें भी बंकर तबाह करने की कोई बात नहीं है। अगर ऐसा हुआ होता तो चीन की सेना जरूर इसका ढोल पीटती। पहली बार चीन की सेना ने खुद को पीड़ित की तरह दिखाया है।

भारत की आक्रामक रणनीति

हमारे सूत्र ने बताया कि 2014 में कुछ ऐसी ही घटना चुमार सेक्टर में हुई थी। अब डोका ला में चीन की सेना ने उसी हरकत को दोहराया है। इन दोनों जगहों पर भारतीय सेना की रणनीति बेहद आक्रामक रही है। चीन के लिए भी यह हैरानी में डालने वाली स्थिति है। क्योंकि अब तक भारत समझौते और सुलह की कोशिश में रहा करता था। लेकिन अब वो चीनी सैनिकों से दो-दो हाथ करने से बाज नहीं आते। हालांकि यह ध्यान रखा जाता है कि हालात बिगड़े नहीं। क्योंकि 1962 की लड़ाई के बाद से भारत और चीन की सेना के बीच एक भी गोली नहीं चली है। फिलहाल ये अनुशासन बना हुआ है। लेकिन अब चीन को यह एहसास होने लगा है कि भारत उसे यहां मनमानी नहीं करने देगा। पिछले साल सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त भी भारत ने चीन बॉर्डर पर अपने जगुआर लड़ाकू विमान उड़ा दिए थे। भारतीय वायुसेना चीन की एयरफोर्स के मुकाबले काफी मजबूत मानी जाती है।

बौखलाहट में रोकी मानसरोवर यात्रा

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक इसी बौखलाहट में चीन ने मानसरोवर यात्रा रोकी है। इसके अलावा नाथूला दर्रे के रास्ते होने वाले कारोबार को भी चीन ने रोक दिया है। चीन को लगा था कि भारत सरकार उसके इस पैंतरे से दबाव में आ जाएगी, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा। इसके बजाय पिछले ही हफ्ते आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत इस इलाके का दौरा करके आए हैं, ताकि वहां पर तैनात जवानों का मनोबल मजबूत रहे और चीन को भारत के इरादों का अंदाजा लग जाए।

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