दार्जिलिंग में हिंदू हैं इसलिए ममता ने गोली चलवाई!

बंगाल के दार्जिलिंग में भड़की हिंसा ने ममता बनर्जी सरकार के रवैये पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दार्जिलिंग में गोरखालैंड के आंदोलनकारियों पर जिस तरह से गोलियां बरसाई गईं उससे यह सवाल उठता है कि हाल के दिनों में बंगाल में हुई मुस्लिम हिंसा की घटनाओं में ऐसी सख्ती क्यों नहीं हुई? ये स्थिति तब है जब दार्जिलिंग की आग के लिए कोई दूसरा नहीं, बल्कि खुद ममता बनर्जी सरकार का एक फैसला दोषी है। ममता सरकार कह रही है कि उसकी पुलिस ने गोरखा प्रदर्शनकारियों पर सिर्फ रबर की गोलियां चलाई हैं। जबकि सच्चाई कुछ और ही है। बंगाल पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अपनी ताकत दिखाकर पहले उन्हें उकसाया और जब हिंसा बेकाबू हो गई तो गोलियां चलाकर उन्हें दबाने की कोशिश की गई।

ममता ने सुलगाई आग

दार्जिलिंग और बंगाल के तमाम पहाड़ी इलाकों में अलग गोरखालैंड राज्य बनाने की मांग काफी पुरानी है। पिछले काफी समय से ये मामला शांत पड़ा हुआ था। लेकिन बंगाल सरकार ने अचानक तय किया कि गोरखालैंड के इलाकों में स्कूलों में बंगाली की पढ़ाई जरूरी होगी। इस फैसले से इलाके के लोग भड़क उठे। सांस्कृतिक और पारंपरिक रूप से यहां पर नेपाली बोली जाती रही है। इलाके के लोगों ने बंगाली भाषा थोपने को सांस्कृतिक अतिक्रमण माना और फैसला वापस लेने की चेतावनी दी। लेकिन ममता बनर्जी सरकार के अड़ियल रवैये का नतीजा यह हुआ कि आंदोलन भड़क उठा और इसका नतीजा यह निकला कि बरसों से बक्से में बंद अलग राज्य की मांग एक बार फिर से बाहर निकल आई।

मालदा में नरमी क्यों थी?

यह सवाल लगातार उठ रहे हैं कि पिछले कुछ साल में बंगाल में बढ़ती जिहादी हिंसा में सरकार कभी इतनी सख्त नजर नहीं आई। मालदा और धुलागढ़ जैसी जगहों पर इस्लामी तांडव के बावजूद कभी पुलिस ने फायरिंग नहीं की। लेकिन दार्जिलिंग में फायरिंग करके 3 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। हैरानी की बात है कि अभी कुछ दिन पहले तक मंदसौर में किसानों पर हुई फायरिंग पर कोहराम मचाने वाले इस गोलीबारी पर चुप हैं। कई ने तो इसे सही ठहराने तक की कोशिश की। सवाल यह भी है कि क्या बंगाली की तरह किसी राज्य में अगर इस तरह से हिंदी थोपने की कोशिश की गई होती तो क्या इतनी ही चुप्पी देखने को मिलती।

हिंसा प्रभावित दार्जिलिंग में जब सेना पहुंची तो लोकल लोगों ने उनका स्वागत कुछ इस अंदाज में किया था। लोगों को बंगाल पुलिस पर नहीं, बल्कि देश की सेना पर भरोसा है। Photo Courtesy: Upendra M Pradhan

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