सिर्फ 10 साल के अंदर गुलाम हो जाएगा पाकिस्तान!

पाकिस्तान के अंदर इन दिनों ये बहस तेज है कि क्या उनका मुल्क गुलामी की तरफ बढ़ रहा है। कोलंबिया और कराची यूनिवर्सिटी में राजनीतिक अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले मशहूर विद्वान एस अकबर ज़ैदी ने कहा है कि वो दिन दूर नहीं जब तिब्बत की तरह पाकिस्तान भी चीन का हिस्सा बन जाएगा। उनकी राय में चीन एक बेहद सोची-समझी रणनीति पर चल रहा है जिसका मकसद पाकिस्तान को अपनी कॉलोनी या उपनिवेश बनाना है। डॉ. ज़ैदी ने कहा है कि चीन और पाक के बीच इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) इसी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने अपनी बात के पक्ष में कई दलीलें भी दी हैं। इनमें सबसे अहम यह है कि इकोनॉमिक कॉरीडोर को लेकर चीन ने पाकिस्तानी सरकार और अधिकारियों को भी ज्यादा कुछ जानकारी नहीं दी है। यहां तक कि पूरे प्रोजेक्ट में स्थानीय सरकार और प्रशासन की दखल ना के बराबर है। जैदी का अनुमान है कि ज्यादा से ज्यादा 10 साल के अंदर पाक पर चीन का लगभग पूरा नियंत्रण स्थापित हो जाएगा।

चीन की गुलामी कैसे?

ज़ैदी ने एक सेमीनार में कहा कि सीपीईसी चीन के ‘वन बेल्ट, वन रोड’ प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसका एक ही मकसद है दुनिया में अपनी ताकत बढ़ाना और खुद को महाशक्ति के तौर पर स्थापित करना। चीन के कारोबार के लिए फारस की खाड़ी तक पहुंच बहुत मायने रखती है। पाकिस्तान इस रोड के जरिए उसे वो पहुंच दे देगा। ये कोई एक कॉरीडोर नहीं बल्कि पाकिस्तान का एक बड़ा हिस्सा है। यह तय है कि कॉरीडोर शुरू होने के बाद चीन पाकिस्तान के इस पूरे हिस्से का नियंत्रण अपने हाथ में चाहेगा। जाहिर है यह तभी संभव होगा जब चीन पूरी तरह पाकिस्तान को ही अपने नियंत्रण में ले ले। ज़ैदी ने पाकिस्तान में योजना और विकास से जुड़ी स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन और सांसद ताहिर मशादी की उस बात की वो बात याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन, पाकिस्तान के लिए दूसरी ईस्ट इंडिया कंपनी बन चुका है। साथ ही भारत की तारीफ भी की कि वो वन बेल्ट, वन रोड प्रोजेक्ट के पीछे छिपी नीयत को समझ गया और उसने इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया।

कठपुतली होगा पाकिस्तान

पाकिस्तान के कई जानकार यह बात कह रहे हैं कि चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरीडोर के बाद पाकिस्तान पूरी तरह कठपुतली बनकर रह जाएगा। क्योंकि विदेश से लेकर आर्थिक मसलों पर अपने सारे फैसले उसे चीन से पूछकर लेने पड़ेंगे। हो सकता है कि चीन कुछ ही दिनों में इतने की मोहलत भी न दे। ज़ैदी ने कहा कि “चीन CPEC में भारी निवेश कर रहा है। कितने अरब डॉलर अब तक खर्च हो चुके हैं इसका कोई हिसाब नहीं है। बलूचिस्तान के एरिया में बागियों के हमलों में चीन के कई इंजीनियर और दूसरे लोग अब तक मारे भी जा चुके हैं। ज़ाहिर सी बात है कि चीन ये सब मुफ्त में नहीं कर रहा है।” ज़ैदी का दावा है कि पाकिस्तान का राजनीतिक नेतृत्व और सेना इस बात को अच्छी तरह समझ भी रहे हैं। चीन की इस दखल से पाकिस्तान को फौरी तौर पर फायदा होगा। नई नौकरियां पैदा होंगी, बिजली का संकट कम होगा। लेकिन इस सब पर पूरा नियंत्रण चीन का होगा।

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चीन की है ये पुरानी स्टाइल

यहां हम आपको बता दें कि चीन की ये पुरानी रणनीति रही है। वो जिस भी देश में कारोबारी तौर पर काम करता है वहां के सारे सरकारी और प्रशासनिक तंत्र को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करता है। चीन के पड़ोसी देश जैसे कि मंगोलिया, हॉन्गकॉन्ग, ताइवान उसे अपने यहां घुसने देने को भी राजी नहीं। कुछ साल पहले चीन ने श्रीलंका, ताजिकिस्तान और कुछ अफ्रीकी देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर में इन्वेस्टमेंट किया था। लेकिन इनमें से सभी ने उन्हें बोरिया-बिस्तर समेट कर जाने को कह दिया। इसी तरह बांग्लादेश चीन की कंपनियों को पूरी तरह अपनी शर्तों पर इजाज़त देता है। पाक के आगे दिक्कत यह है कि उसके पास चीन को जाने के लिए कहने का विकल्प भी नहीं होगा।

कौन हैं अकबर ज़ैदी?

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी और कराची यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. ज़ैदी को पाकिस्तान के सबसे विश्वसनीय अर्थशास्त्रियों में से एक माना जाता है। उन्होंने पाकिस्तान में लोकतंत्र और सेना की भूमिका पर कई किताबें भी लिखी हैं। उनकी लिखी कई किताबों को दुनिया भर में पढ़ा जाता है। वो पाकिस्तान के कई अखबारों में भी नियमित तौर पर लिखते रहते हैं। पिछले कुछ समय में पाकिस्तान में चीन की बढ़ती दखल के खिलाफ वो खुलकर बोलते रहे हैं। उन्हें पाकिस्तानी सेना और कुछ राजनीतिक दलों के हमलों का भी शिकार होना पड़ता है। जैदी पाकिस्तान में अमेरिकी और सऊदी अरब की दखलंदाजी के भी कट्टर विरोधी के तौर पर देखे जाते रहे हैं।

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