क्या वीर सावरकर ने वाकई अंग्रेजों से माफी मांगी थी?

आजादी की लड़ाई के सबसे बदकिस्मत सेनानी वीर विनायक दामोदर सावरकर को लेकर अक्सर भद्दी टीका-टिप्पणियां की जाती हैं। बरसों तक उनके योगदान को इतिहास की किताबों और नई पीढ़ी की नजरों से छिपाकर रखा गया। लेकिन समय का फेर कुछ ऐसा रहा कि जवाहरलाल नेहरू और उनके इतिहासकार तमाम कोशिश के बावजूद वीर सावरकर की जीवनगाथा को जनता की नजरों से छिपा नहीं पाए। वीर सावरकर की जीवनी और आजादी की लड़ाई में उनके योगदान के किस्से तो आप कहीं भी पढ़ लेंगे, लेकिन सबसे जरूरी है उस प्रोपोगेंडा का जवाब देना, जो कांग्रेस के इतिहासकारों ने एक साजिश के तहत फैलाया है। कांग्रेसी और वामपंथी जमकर ये प्रचार करते हैं कि सावरकर ने अंग्रेजों के आगे घुटने टेक दिए थे और माफी मांग ली थी। जबकि सच्चाई कुछ और ही है। आगे हम आपको इस बारे में पूरे तथ्य बताएंगे, लेकिन उससे पहले कुछ और जरूरी बातों पर नज़र डालते हैं।

अंग्रेजों के आगे कभी नहीं झुके

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि उस दौर के तमाम बड़े लोगों की तरह वीर सावरकर ने भी इंग्लैंड में बैरिस्टर का इम्तिहान पास किया था। लेकिन वहां के नियमों के मुताबिक बैरिस्टर बनने के लिए एक शपथ लेनी होती थी, जिसके तहत लिखना होता था कि मैं हमेशा ब्रिटिश साम्राज्य के लिए वफादार रहूंगा। वीर सावरकर ने जब इस शपथ की लाइनें पढ़ीं तो उन्होंने इस पर दस्तखत से मना कर दिया। इसी कारण उन्हें कभी बैरिस्टर की डिग्री नहीं मिली। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी इंग्लैंड से ही डिग्रीधारी बैरिस्टर थे। मतलब ये हुआ कि उन्होंने डिग्री के लिए ये शपथ ली थी कि वो ब्रिटिश साम्राज्य के लिए हमेशा वफादार रहेंगे।

गांधी, नेहरू पर नरम अंग्रेज

यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर क्या बात थी कि गांधी और नेहरू को लेकर अंग्रेजों का रवैया हमेशा बेहद नरम रहा। इस लड़ाई में लाखों लोग शामिल थे। लेकिन गांधी और नेहरू जब भी जेल गए उनको बाकायदा अच्छा नाश्ता और खाना, अखबार और यहां तक कि लोगों से मिलने-जुलने की इजाज़त दी जाती थी। जेलों में उनकी दिनचर्या के दस्तावेज आज भी मौजूद हैं। इसके उलट वीर सावरकर को अंडमान की जेल जिसे काला पानी कहा जाता था वहां भेज दिया गया था। उन्हें 2-2 आजीवन कारावास की सजा मिली। जेल में दिन भर उन्हें कोल्हू में बैल की जगह जुतकर तेल पेरना, पत्थर की चक्की चलाना, बांस कूटना, नारियल के छिलके उतारना, रस्सी बुनना और कोड़ों की मार सहने की सजा मिलती थी। इसके अलावा अपने बैरक में उन्हें हाथ-पैर में बेड़ी बांधकर रखा जाता था।

क्या वाकई वीर सावरकर ने अंग्रेजों से माफी मांगी थी? सच्चाई जानने के लिए अगले पेज (2) पर क्लिक करें

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

comments

Tags: ,