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जीत की तीसरी सालगिरह पर मोदी के ‘तीन शिकार’

लोकसभा चुनाव में जीत की तीसरी सालगिरह पर पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने तीन बड़े शिकार करके आने वाले समय के लिए इरादे जता दिए हैं। मंगलवार सुबह पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम और लालू यादव एंड फैमिली के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई है। साथ ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के हवाला रैकेट का मामला भी सीबीआई के पास पहुंच गया है। इन तीनों ही मामलों में सरकार ने जिस तेजी से कार्रवाई की है वो इशारा है कि मोदी सरकार के आखिरी दो साल में देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई पर फोकस किया जाएगा। केंद्र सरकार से जुड़े एक अधिकारी ने हमें बताया कि नोटबंदी के बाद से ही कुछ ‘बड़ी मछलियों’ के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने का काम चल रहा था। ये सभी इतनी सफाई से भ्रष्टाचार करने में माहिर हैं कि बिना तैयारी इन पर शिकंजा कसना बेकार था, क्योंकि कोर्ट से ये सभी बहुत आसानी से बच निकलते।

अगले दो साल सफाई अभियान

न्यूज़लूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी ने अगले दो साल में राजनीतिक गंदगी की सफाई पर पूरा फोकस रखने को कहा है। मकसद ये है कि जनता को पता चलना चाहिए कि बड़ी मछलियां भी छूटने वाली नहीं हैं। यूपी चुनाव के दौरान अपने भाषणों में भी पीएम मोदी ने यह बात खुलकर कही थी। लालू और चिदंबरम पर कार्रवाई को इसकी शुरुआत मान सकते हैं। 1000 करोड़ की बेनामी संपत्ति और जमीन घोटाला मामले में लालू यादव के 22 ठिकानों और पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति के घर, दफ्तर समेत 16 ठिकानों पर छापे इसी सिलसिले की पहली कड़ी हैं। हमारी जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसियां काफी वक्त से इन दोनों के पीछे लगी थीं और काफी सबूत भी हाथ लगे हैं। केजरीवाल के मामले में कपिल मिश्रा ने काम काफी आसान कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने सीबीआई और एसीबी को कुछ बेहद अहम सबूत दिए हैं। जिनसे केजरीवाल का असली चेहरा सामने आ जाएगा।

मोदी की हिटलिस्ट अभी लंबी है!

लालू और चिदंबरम के अलावा सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस में कानून की चक्की चल रही है। इस मामले में इनकम टैक्स की जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। जिसमें बचना गांधी परिवार के लिए आसान साबित नहीं होने वाला है। इसके अलावा कालेधन में फंसी मायावती, शारदा और नारदा घोटालों में ममता बनर्जी, गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में अखिलेश यादव के घोटालों की जांच पड़ताल का काम जारी है। पीएम मोदी सरकार से जुड़ी बैठकों में यह जताना नहीं भूलते कि 2014 में जनता ने उन्हें भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वोट दिया था। जब उन्होंने नोटबंदी का एलान किया तो जनता से उन्हें भारी समर्थन भी मिला। ऐसे में इससे पीछे हटने का सवाल नहीं पैदा होता।

नोटबंदी में पकड़ में आए बड़े नाम

ये खबर पहले भी आ चुकी है कि नोटबंदी के दौरान कई बड़े लोग जांच के शिकंजे में फंस चुके हैं। अक्सर कहा जाता है कि नोटबंदी में कोई बड़ी मछली नहीं पकड़ी गई, जबकि यह बात सही नहीं है। जो बड़ी मछलियां जाल में फंसीं उन पर आगे की कार्रवाई के लिए केस को पुख्ता बनाना जरूरी था। क्योंकि राजनीतिक ताकत के अलावा इन लोगों के पास बड़े वकील करने से लेकर अफसरोंं को रिश्वत खिलाकर फाइलें दबवाने तक की ताकत होती है। अब जब इन सभी के खिलाफ जांच का पहला चरण पूरा हो चुका है तो पूरे होमवर्क के साथ कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

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