लेफ्टि. उमर फैयाज अकेले नहीं, वैसे कई कश्मीरी हैं!

क्या आपको इससे पहले यह मालूम था कि कश्मीर के नौजवान सेना में भर्ती होते हैं और बाकायदा अपनी शहादत देते हैं? क्या आपको यह पता था कि जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादियों के खिलाफ पहला मोर्चा पुलिस लेती है, जिसमें ज्यादातर स्थानीय नौजवान हैं। दरअसल ये वो बातें हैं जो बाकी देश से छिपाई जाती हैं। मीडिया भी जानबूझकर कश्मीर के 2-3 जिलों की खबरों को इतना बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है कि ऐसा लगता है कि मानो पूरे कश्मीर में यही हो रहा हो। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। कश्मीर के तमाम दूसरे हिस्सों के नौजवान आज भी भारत के साथ हैं और मानते हैं कि इस देश के साथ रहने में ही उनकी भलाई है। उनके सपने और संघर्ष बिल्कुल वैसे ही हैं जैसे भारत के किसी दूसरे राज्य के नौजवानों के। कश्मीर के कुलगाम जिले के रहने वाले 22 साल के लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की शहादत ने कश्मीर की इस सच्चाई को पूरी मजबूती से देश के सामने ला दिया है। दरअसल फैयाज ही नहीं, कश्मीर घाटी के कई नौजवान सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आ रहे हैं और आतंकवाद के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। ये वो नौजवान हैं जो अपनी जान को जोखिम में डालकर आतंकवादियों का विरोध कर रहे हैं।

कश्मीर का छिपा हुआ चेहरा!

मीडिया में आम तौर पर अलगाववादियों, पत्थरबाजों और आतंकवादियों को इतनी कवरेज मिलती है कि लगता है कि मानो वही पूरा कश्मीर हों। लेकिन उनसे अलग एक पीढ़ी ऐसी भी है जो आतंकवादियों को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती है और भारत के साथ रहना चाहती है। ऐसे कई नौजवान सोशल मीडिया पर भी मुखर हैं और घाटी के हालात पर जमकर लिखते हैं। वो कश्मीर में रहकर उन लोगों को भी जवाब देते हैं जो दिल्ली में बैठकर कश्मीर की आजादी के सपने देख रहे हैं। ऐसे ही एक नौजवान हैं मुजाहिद आलम। उन्होंने अपने ट्विटर पेज पर बताया है कि उनके गांव में हथियारबंद आतंकवादी आते हैं और नौजवान लड़कों को जबरन अपने साथ ले जाते हैं। उन्होंने सवाल पूछा है कि इसे कभी मीडिया क्यों नहीं दिखाता। (नीचे देखें)

आतंक के खिलाफ पहली दीवार

कश्मीरी नौजवानों की ये पूरी पीढ़ी घाटी में अमन चाहती है और आतंकवाद के खिलाफ पहली दीवार के तौर पर खड़ी है। पुलिस और सेना बाद में आती है। उससे पहले ये लोग दहशतगर्दों से मोर्चा ले रहे हैं। लेफ्टिनेंट उमर फयाज का जब अंतिम संस्कार चल रहा था तो उस पर भी पत्थरबाजी की कोशिश हुई इस दौरान ऐसे कई नौजवान थे जो दीवार बनकर खड़े रहे। ये लोग आतंकवादियों से तो मोर्चा ले ही रहे हैं, साथ ही दिल्ली में बैठे पाकिस्तान परस्त बुद्धिजीवियों को भी आइना दिखाते रहते हैं। मीडिया की पूरी कोशिश यही रहती है कि कश्मीर के इन नौजवानों के बारे में बाकी देश को पता न चलने पाए, ताकि पत्थरबाजों को देखकर जो राय लोगों के मन में है वो बनी रहे। सोशल मीडिया पर सक्रिय ऐसे ही कुछ कश्मीरी नौजवानों की पोस्ट नीचे हम शेयर कर रहे हैं। जेएनयू में बैठकर कश्मीर की आजादी की बात करने वाली वामपंथी शेहला राशिद को ट्विटर पर मुजाहिद आलम ने लिखा है कि “बहन, उमर फैयाज भी जेएनयू से ही पढ़ा था। लेकिन हमें उस पर नाज़ है।”

नीचे के ट्वीट में आप देख सकते हैं कि कैसे मुजाहिद आलम ने अपने गांव में आतंकवादियों की करतूत उजागर की है।

अब्दुल राशिद ने लेफ्टनेंट फयाज की तस्वीर पोस्ट की है और पथराव करने वालों पर लानत भेजी है।

जावेद त्राली ने लेफ्टिनेंट फैयाज को याद करते हुए लिखा है कि उसके लेवल तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की जरूरत होती है। कश्मीर ने अपना रोल मॉडल खो दिया।

एक्ट्रेस रवीना टंडन ने फैयाज को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि उन्होंने अपना काम कर दिया। तो जवाब में मौसीन खान ने लिखा कि नहीं अभी उसका काम पूरा नहीं हुआ है। हम अपनी आखिरी सांस तक उन आतंकवादियों से लड़ेंगे और उन्हें जहन्नुम में भेजेंगे।

कुछ लोगों ने उमर फैयाज की बचपन की बातों को भी याद किया है।

लोगों में एक उम्मीद भी है कि कश्मीर में बहुत जल्द दहशतगर्दी का ये दौर खत्म होगा और अमनचैन वापस लौटेगा।

पिछले दिनों कश्मीर में पुलिस की मदद के आरोप में जब एसपीओ के जवानों को टॉर्चर किया गया तो भी यही लोग थे जिन्होंने अपनी आवाज पूरी मजबूती के साथ बुलंद की थी।

कश्मीर की ये नौजवान पीढ़ी सोशल मीडिया पर बाकी देश के लोगों के सवालों के जवाब भी देती है। एक शख्स ने पूछा कि वहां पर लोग भारत के खिलाफ नारे क्यों लगाते हैं तो मुजाहिद आलम ने जवाब दिया कि हालात बेशक खराब हैं, लेकिन हर कोई ऐसा नहीं है।

बहन की शादी में गई भाई की जान, लेफ्टिनेंट फैयाज की कहानी के लिए अगले पेज (2) पर क्लिक करें

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