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क्या इसलिए केजरीवाल ने लिए थे 2 करोड़ रुपये?

आम आदमी पार्टी के ही सीनियर नेता और पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर मंत्री सत्येंद्र जैन से 2 करोड़ रुपये नकद लेने का आरोप लगाया है। इसे लेकर दिल्ली की राजनीति में कोहराम मचा हुआ है। कपिल मिश्रा इशारा कर रहे हैं कि ये रिश्वत थी, जिसके बदले में केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन को हवाला मामले में क्लीन चिट दी। लेकिन न्यूज़लूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक कहानी कुछ और ही है। यह बात सामने आ रही है कि केजरीवाल ने ये 2 करोड़ रुपये वकील राम जेठमलानी को देने के लिए हो सकते हैं। ये रकम ब्लैकमनी थी, जिसका इंतजाम सत्येंद्र जैन ने कहीं से हवाला के जरिए किया था। यही कारण है कि उन्होंने सारी रकम नकद में केजरीवाल को सौंपी। अगर ऐसा भी है तो भी केजरीवाल के लिए आरोपों की जांच से बचना आसान नहीं होगा, क्योंकि मामला ब्लैकमनी और हवाला का है।

फीस के फेर में केजरीवाल

दरअसल केजरीवाल के आगे अरुण जेटली मानहानि केस में बड़ी मुसीबत सामने खड़ी है। इस केस में अगर वो हार जाते हैं तो उनको अपने समेत 5 और नेताओं के लिए 5-5 करोड़ के दावे की भरपाई करनी पड़ेगी। इस मुसीबत से बचने के लिए ही केजरीवाल ने राम जेठमलानी को वकील के तौर पर रखा था। लेकिन जेठमलानी ने उन्हें 4 करोड़ रुपये का बिल थमा दिया। पहले केजरीवाल ने ये पैसा दिल्ली सरकार के खाते से भरने की कोशिश की, लेकिन मामला खुल गया। अब दावा किया जा रहा है कि वो दूसरे रास्तों से फीस के पैसों के जुगाड़ में थे, जिसकी पहली किस्त शुक्रवार को उनके पास पहुंची थी। खुद केजरीवाल को यह एहसास नहीं था कि यह रकम भी दरअसल रिश्वत मानी जाएगी, लिहाजा उन्होंने खुद से मिलने आए कपिल मिश्रा को वहां पर मौजूद रहने दिया। न्यूज़लूज पर हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि जेठमलानी ने दरअसल केजरीवाल की वकालत की फीस माफ नहीं की है। इसके बजाय उन्होंने राज्यसभा के लिए आम आदमी पार्टी के कोटे की 3 सीटों में 2 लालू यादव की पार्टी आरजेडी की पसंद के कैंडिडेट को देने की शर्त रखी है। जेठमलानी लालू की पार्टी से ही राज्यसभा के सदस्य हैं। कहते हैं कि लालू ने उन्हें चारा घोटाले में अपनी पैरवी के एवज में राज्यसभा में भेजा था। सूत्र के मुताबिक अब जेठमलानी ने 2 राज्यसभा सीटें मांग ली, जिसके लिए केजरीवाल कतई तैयार नहीं हैं। हमारी ये रिपोर्ट आप नीचे लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

पढ़ें: लालू के आदमी को राज्यसभा पहुंचाएंगे केजरीवाल?

कपिल ने क्यों मुंह खोला?

आप के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक कपिल मिश्रा का झगड़ा सत्येंद्र जैन से है। वो सत्येंद्र जैन को ज्यादा तरजीह दिए जाने और खुद को नजरअंदाज किए जाने से अंदर ही अंदर नाराज चल रहे थे। जब उन्होंने पैसों की लेन-देन देखी तो उन्हें लगा कि यही सही मौका है जब वो अपना हिसाब चुकता कर सकते हैं। कई लोग मान रहे हैं कि कपिल मिश्रा की बगावत के पीछे बीजेपी का हाथ है, हालांकि हमारे सूत्र ने इसकी पुष्टि नहीं की। उनका दावा है कि दरअसल ये पार्टी पर कब्जे की लड़ाई है। कपिल मिश्रा पंजाब चुनाव के वक्त भी सत्येंद्र जैन के हवाला रैकेट से परिचित थे। वो चाहते थे कि किसी तरह ये मामला सतह पर आ जाए और सत्येंद्र जैन को इस्तीफा देना पड़े। लेकिन मीडिया में आ रही नई-नई जानकारियों के बावजूद जब केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन पर कोई कार्रवाई नहीं की तो कपिल मिश्रा भड़क गए। जिसके बाद उन्होंने खुद ही सामने आकर आरोप लगाने का फैसला किया। टैंकर घोटाले का नाम लेने के पीछे उनकी रणनीति केजरीवाल पर दबाव बनाने की थी।

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