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जेएनयू में शहीदों की बात करने पर देखिए क्या होता है!

सुकमा और कुपवाड़ा हमले के शहीदों की याद में कार्यक्रम आयोजित करना जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर को भारी पड़ गया। जेएनयू के प्रोफेसर बुद्ध सिंह के घर के बाहर खड़ी कार तोड़ दी गई और घर पर भी पथराव किया गया। डॉक्टर बुद्ध सिंह का घर जेएनयू कैंपस में ही है। एक दिन पहले ही उन्होंने कैंपस में सुकमा और कुपवाड़ा में हुए हमलों में मारे गए जवानों की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में भारी तादाद में छात्र, टीचर और यूनिवर्सिटी के दूसरे स्टाफ के लोग पहुंचे थे। कार्यक्रम को काफी मीडिया कवरेज भी मिली थी और बताया गया था कि कैंपस में अब हालात बदल रहे हैं। लेकिन जिहादी और नक्सली ताकतों ने एक दिन के अंदर ही इस सोच को गलत साबित करने की ठान ली। शुक्रवार शाम को शहीदों को श्रद्धांजलि का कार्यक्रम हुआ और उसी रात बुद्ध सिंह के घर और कार पर हमला हुआ। प्रोफेसर ने सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी दी। उन्होंने इस हमले के बारे में वसंत कुंज थाने में जाकर रिपोर्ट भी दर्ज करवाई है। जेएनयू में दंतेवाड़ा के नक्सली हमलों में 76 जवानों की मौत के वक्त जोरदार जश्न मनाया गया था। इसके अलावा भी कैंपस में तरह-तरह की नक्सली और देशविरोधी गतिविधियों की खबरें आती रहती हैं।

सबक सिखाने के लिए हमला

प्रोफेसर बुद्ध सिंह ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा है कि “शुक्रवार की शाम को शहीदों की याद में हुआ कार्यक्रम बेहद सफल रहा था। इस कारण कैंपस में सक्रिय कुछ तत्वों को बेचैनी होने लगी थी। शायद उन्हीं लोगों ने एक मैसेज देने के लिए मेरे घर और कार पर हमला किया है।” दिल्ली में जेएनयू का कैंपस बेहद सुरक्षित जगहों में से है। यहां ये शायद पहली बार है जब किसी प्रोफेसर को इस तरह से निशाना बनाया गया है। प्रोफेसर ने अपनी कार की तस्वीरें भी ट्वीट की हैं। उनका कहना है कि ‘मैंने पेरियार हॉस्टल के पास अपनी कार पार्क की थी, जो छात्र संघ कार्यालय के ठीक सामने है। मुझे किसी पर संदेह नहीं है, लेकिन मैंने वसंत कुंज थाने में मामला दायर किया है।’ जेएनयू में आम तौर पर नक्सली और जिहादी सोच वाले प्रोफेसरों का ही बोलबाला रहा है। लेकिन बीते कुछ सालों में कुछ टीचरों ने इस सोच के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की है। प्रोफेसर बुद्ध सिंह भी उनमें से ही एक हैं। सोशल मीडिया से लेकर दूसरे मंचों पर भी वो जेएनयू के वामपंथीकरण के खिलाफ जमकर आवाज बुलंद करते रहे हैं। कैंपस में शुक्रवार का कार्यक्रम भी उन्होंने इसी मकसद से किया था ताकि देश के लोगों की नजरों में यहां की देशविरोधी इमेज खत्म हो सके।

प्रोफेसर पर की जांच जारी

दिल्ली पुलिस ने प्रोफेसर बुद्ध सिंह की शिकायत ले ली है और घटना की जांच की जा रही है। लेकिन जेएनयू जैसे कैंपस में ऐसी घटनाओं की जांच बहुत मुश्किल मानी जाती है। पूरे कैंपस में अभी तक सीसीटीवी कैमरे ही नहीं लगे हैं। हॉस्टल समेत कुछ जगहों पर कैमरे लगाने की बात हुई थी तो जेएनयू छात्र संघ और यहां के वामपंथी छात्र संगठनों ने यह कहते हुए इसका विरोध करना शुरू कर दिया कि इससे उनकी आजादी में खलल पड़ जाएगी। नजीब नाम के एक छात्र की गुमशुदगी के बाद से ही कैंपस में सीसीटीवी का मसला गर्म है। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर यहां कुछ जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लग जरूर गए, लेकिन उनके साथ भी छेड़छाड़ की खबरें आती रहती हैं। कुछ जगहों पर सीसीटीवी कैमरों को दूसरी तरफ मोड़ने की शिकायतें आ चुकी हैं। उधर जेएनयू छात्र संघ ने एक बयान में कहा कि सिंह सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि देखा जाए तो छात्र संघ से जुड़े नेताओं पर ही हमले का सीधे तौर पर शक है। छात्र संघ या किसी भी वामपंथी छात्र संगठन ने इस हमले की निंदा करने तक की जरूरत नहीं समझी। जबकि कैंपस में छोटे-मोटे मामलों पर भी ये लोग हंगामा खड़ा करने के लिए जाने जाते हैं। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पूर्व महामंत्री सौरभ शर्मा ने एक ट्वीट करके पूछा है कि कार पर मारे गए पत्थर कहीं कश्मीर से तो नहीं लाए गए थे।

नीचे आप प्रोफेसर बुद्ध सिंह की दिल्ली पुलिस को दी शिकायत पढ़ सकते हैं।

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