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केजरीवाल के तख्तापलट की तैयारी में है एक करीबी!

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के तख्तापलट की तैयारियों की खबरें हैं। यह जानकारी सामने आ रही है कि बहुत जल्द आम आदमी पार्टी के विधायकों का एक गुट केजरीवाल को हटाने की कोशिश कर सकता है। इसकी तैयारियां पंजाब चुनाव के नतीजों के बाद ही शुरू हो गई थीं, लेकिन इस गुट को एमसीडी चुनाव के नतीजों का इंतजार था। आम आदमी पार्टी के अंदरखाने में बीते 2-3 दिन से ये अटकलबाजी बहुत तेजी से चल रही है। इसके मुताबिक कुमार विश्वास केजरीवाल को हटाकर खुद सीएम बनना चाहते हैं। दावा किया जा रहा है कि इसके लिए उनके पास 34 विधायकों का समर्थन भी है। विधायकों के इस गुट की कुछ बैठकें भी हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि इस गुट के विधायक मौके का इंतजार कर रहे हैं जब वो औपचारिक तौर पर ये धमाका करेंगे। आज रविवार को पार्टी की राजनीतिक मामलों की कमेटी (पीएसी) की बैठक होनी थी लेकिन बगावत के ही डर से इसे आखिरी मिनट में कैंसिल कर दिया गया। इससे पहले कुमार विश्वास सीधे तौर पर मीडिया में जाकर केजरीवाल की नीतियों की खुलकर आलोचना कर चुके हैं। जो ताजा खबरें आ रही हैं उनके मुताबिक आम आदमी पार्टी में सीधे तौर पर खेमेबंदी हो चुकी है। एक खेमे में केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह जैसे नेता हैं, जबकि दूसरे खेमे के नेता कुमार विश्वास हैं। विधायकों की संख्या के आधार पर देखें तो कुमार विश्वास का खेमा भारी नजर आ रहा है।

केजरीवाल के नेतृत्व पर सवाल

सूत्रों के मुताबिक आम आदमी पार्टी में अब अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। विरोधी खेमे के एक खेमे ने विधायक ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा कि “जिस तरह से केजरीवाल ने देशहित के मामलों में राजनीति की उसके कारण आम जनता में उनको लेकर नफरत पैदा हो गई है। इसके उलट कुमार विश्वास की इमेज राष्ट्रवादी नेता के तौर पर है।” इसी विधायक ने माना कि पार्टी पर नक्सली और जिहादी विचारधारा वाले तत्वों का कब्जा हो गया है। केजरीवाल कुछ अनजान कारणों से इस जकड़ से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उनका कहना था कि “एक के बाद एक देश विरोधी बयानों, सेना पर सवाल उठाने और प्रधानमंत्री मोदी पर निजी हमलों की नीति ने आम आदमी पार्टी का बेड़ा गर्क कर दिया। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन की बेहद जरूरत है। इससे दिल्ली सरकार की छवि भी सुधरेगी और जनता का भरोसा बहाल होगा।” उधर केजरीवाल गुट के विधायक हर हाल में उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाए रखने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि केजरीवाल की इमेज और कद कुमार विश्वास के मुकाबले बहुत बड़ा है। कुमार विश्वास पिछले काफी वक्त से पार्टी के लिए जमीन पर काम करने के बजाय मीडिया में बयानबाजी करके सुर्खियां बटोरते रहे हैं। इस खेमे का आरोप है कि कुमार विश्वास काफी वक्त से मुख्यमंत्री बनने के अरमान पाले बैठे थे और एमसीडी की हार के बाद उन्हें एक बार फिर से मौका मिल गया है।

बैठक से डर रहे हैं केजरीवाल!

आम आदमी पार्टी में बड़े पद पर बैठे हमारे एक सूत्र ने दावा किया है कि ताजा बगावत ने केजरीवाल को अंदर से डरा दिया है। यही कारण है कि उन्हें बयान जारी करके ईवीएम के मसले पर माफी मांगनी पड़ गई। डर इतना ज्यादा है कि रविवार को होने वाली पार्टी के राजनीतिक मामलों की कमेटी की बैठक भी आखिरी मिनट में रद्द कर दी गई। ये बैठक डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के घर पर बुलाई गई थी और सुबह के वक्त कई नेता इसमें हिस्सा लेने पहुंच भी चुके थे। लेकिन उन्हें बताया गया कि बैठक फिलहाल टाल दी गई है। हमारे सूत्र ने बताया कि केजरीवाल का यही डर इस बैठक को रद्द करने के पीछे भी था। उन्हें लग रहा है कि अगर विधायकों ने नेतृत्व परिवर्तन की बात औपचारिक तौर पर रख दी तो हालात बेकाबू हो जाएंगे और पार्टी के टूटने की भी नौबत आ सकती है। फिलहाल इन सारे हालात पर आम आदमी पार्टी का कोई भी नेता खुलकर बोलने को राजी नहीं है। इससे पहले गुरुवार को हुई पीएसी की बैठक में भी जमकर हंगामा हुआ था। इसमें कुमार विश्वास और आशुतोष के बीच तूतू-मैंमैं की भी खबरें मीडिया में आ गई थीं। कुमार विश्वास ने बैठक में यहां तक कहा कि केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद पार्टी लगातार छह चुनाव हार चुकी है। जरूरी है कि इस बात पर चिंतन होनी चाहिए।

बगावत दबाने का नया फॉर्मूला

केजरीवाल के खिलाफ बगावत की इन कोशिशों के बीच आम आदमी पार्टी के कुछ नेता बीच-बचाव का रास्ता निकालने में भी जुटे हैं। इसी के तहत एक फॉर्मूला यह निकला है कि केजरीवाल पार्टी के संयोजक का पद छोड़ दें और एक नेता, एक पद के सिद्धांत का पालन करें। केजरीवाल की जगह ये पद कुमार विश्वास को दे दिया जाए। दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा और विधायक सोमनाथ भारती इस फॉर्मूले को लेकर दोनों खेमों को मनाने में जुटे हैं। हालांकि अभी तक दोनों तरफ से इसको लेकर कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है। खबर ये है कि केजरीवाल किसी भी हालत में कुमार विश्वास को संयोजक बनाने को तैयार नहीं हैं। वो अपनी पसंद के आदमी को ही संयोजक बनाना चाहते हैं। उधर कुमार विश्वास का खेमा संकेत दे रहा है कि वो मुख्यमंत्री पद के स्तर पर बदलाव से कम पर तैयार नहीं हैं।

21 विधायकों की मुसीबत अलग

लाभ के पद के मामले में आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के खिलाफ चुनाव आयोग में सुनवाई पूरी हो चुकी है। ये फैसला भी कभी भी आ सकता है। ऐसे में एक झटके में 21 विधायकों की सदस्यता खत्म हो सकती है। यही कारण है कि दोनों ही खेमे खुलकर तलवार नहीं भांज पा रहे हैं। लाभ के पद के मामले में फंसे विधायक दोनों ही खेमे में हैं। इस तरह से देखा जाए तो यह मामला केजरीवाल के लिए एक तरह से वरदान बन गया है। वरना एमसीडी चुनाव के फौरन बाद ही बगावत का बिगुल बज गया होता।

जहां तक कुमार विश्वास के नेतृत्व में 34 विधायकों की बगावत का सवाल है उस पर दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह ने भी ट्वीट किया है।

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