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मोदी की मौत की दुआ मांगने वाली संग अरुण जेटली

इस हेडलाइन से शायद आपको यकीन न हो रहा हो, लेकिन यह पूरी तरह सच है। जो पत्रकार और चैनल बीते डेढ़ दशक से नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभियान चला रहे थे उनके साथ वित्त मंत्री अरुण जेटली का याराना देखने लायक है। अरुण जेटली ने बीती शाम एनडीटीवी की पत्रकार सुनेत्रा चौधरी की किताब लॉन्च की। बाकी बातें छोड़ भी दें तो यह नहीं भूलना चाहिए कि ये वही पत्रकार हैं जिन्होंने 2009 में ट्वीट किया था कि “सुना है कि नरेंद्र मोदी को स्वाइन हो गया है, मुझे यह सोचकर बहुत एक्साइटमेंट महसूस हो रही है।” कोई मंत्री किससे मिलता है किसकी किताब रिलीज करता है इसमें हमें कोई एतराज नहीं, लेकिन सबसे हैरानी तब हुई जब किताब लॉन्च करने के बाद इसकी ढेर सारी तस्वीरें अरुण जेटली ने वित्त मंत्रालय के सरकारी ट्विटर हैंडर से ट्वीट करवाईं। जबकि आम तौर पर मंत्रालयों के ट्विटर हैंडल से सिर्फ उस मंत्रालय के कामकाज से जुड़ी बातें ही ट्वीट की जाती हैं। अरुण जेटली ही नहीं, एनडीटीवी बीजेपी के कई मंत्रियों की कमजोरी है। भले ही चैनल पर नरेंद्र मोदी के लिए 24 घंटे प्रोपोगेंडा चलता हो, भले ही ये चैनल हिंदुत्व को बदनाम करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ता हो लेकिन बीजेपी के कई मंत्री ऐसे हैं जो चैनल के पत्रकारों और उसके कार्यक्रमों में बहुत खुशी-खुशी हिस्सा लेते हैं। नीचे देखिए सुनेत्रा चौधरी का 2009 का वो ट्वीट जिसमें उन्होंने स्वाइन फ्लू से मोदी के मरने की कामना की है:

ये उस वक्त का ट्वीट है जब देश में स्वाइन फ्लू के मामले पहली बार सामने आए थे और हर तरफ इस बीमारी की दहशत थी। 2002 के बाद से एनडीटीवी मोदी को लेकर एकतरफा प्रोपोगेंडा अभियान चला रहा था। आरोप तो यहां तक लगते हैं कि इस सबके बदले एनडीटीवी ने उस वक्त की कांग्रेस से काफी मोटी रकम भी ली थी।

NDTV पर मेहरबान वित्त मंत्रालय!

यहां हम आपको बता दें कि एनडीटीवी के खिलाफ धांधली और हवाला जैसे मामलों में जांच चल रही है। ये जांच वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले प्रवर्तन निदेशालय के तहत हो रही है। ऐसे में चैनल के लोगों के साथ वित्त मंत्री की ये करीबी शक पैदा करती है। जब मोदी सरकार आई थी तो हर किसी ने उम्मीद की थी कि एनडीटीवी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में कुछ तेजी आएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वित्त मंत्री रहते हुए अरुण जेटली ने ये पूरा मामला दबा रखा है। सुनेत्रा चौधरी की किताब का नाम है बिहाइंड बार्स। इसमें अलग-अलग मामलों में कुछ वक्त जेल में बिता चुके लोगों के अनुभव की कहानियां हैं। एक तो यह एक निजी कार्यक्रम था। उसमें क्या हुआ इसका ट्वीट वित्त मंत्रालय के हैंडल से करना सीधे तौर पर पद के दुरुपयोग और किसी को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

एनडीटीवी के कुछ पत्रकारों और कुल मिलाकर इस चैनल के मालिकों पर बीजेपी के कुछ बड़े नेताओं की मेहरबानी समझ से परे है। किसी के कार्यक्रम में हिस्सा लेना और किसी के लिए मंत्रालय की पूरी मशीनरी को झोंक देने में फर्क होता है। खास तौर से तब जब किताब की लेखिका प्रधानमंत्री के बारे में बेसिर-पैर की झूठी खबरें फैलाने और ट्विटर पर उनके मरने तक की दुआ करती रही हो। आज भी ये रवैया बदला नहीं है।

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एनडीटीवी प्रेम की वजह क्या?

सही वजह का तो किसी को नहीं पता, लेकिन शायद किसी तरह की कुंठा है जिसके कारण बार-बार गाली खाने के बावजूद बीजेपी के नेता और मंत्री एनडीटीवी की एक पुचकार पर फिर से पहुंच जाते हैं। सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन राठौड़ तो ट्विटर पर सुनेत्रा चौधरी के साथ चुहल करते भी देखे जा चुके हैं। मीनाक्षी लेखी ने बरखा दत्त के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर कुछ दिन पहले शेयर की, जब लोगों ने सवाल उठाया तो उन्होंने उलटा बीजेपी समर्थकों को ही गाली देना शुरू कर दिया। और तो और 2017 के यूपी चुनाव में बीजेपी के खिलाफ बाकायदा अभियान चलाने वाली इकोनॉमिक टाइम्स की पत्रकार रोहिणी सिंह मोदी से लेकर बीजेपी के हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता को खुलेआम कोसती दिखती हैं, लेकिन अमित शाह के खिलाफ वो कभी कुछ नहीं लिखतीं। ये चालाकी उनके काम भी आई और यूपी चुनाव के पहले ही अमित शाह ने उन्हें एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया। इसी इंटरव्यू के बाद रोहिणी सिंह ने औपचारिक तौर पर बीजेपी के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान शुरू किया था। उस वक्त की हमारी ये रिपोर्ट आप नीचे पढ़ सकते हैं।
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कुल मिलाकर यही नजर आता है कि बीजेपी के नेताओं और मंत्रियों ने इतिहास से कोई सबक नहीं लिया है। जब कांग्रेस सत्ता में थी तब भी एनडीटीवी के यही पत्रकार मलाई खा रहे थे और जब कांग्रेस की सत्ता चली गई तब भी उनकी मौज में कोई कमी नहीं है। जबकि यह तय है कि एनडीटीवी पहला मौका मिलते ही मोदी सरकार पर घात करेगा और हो सकता है कि उसके लिए सुराग किसी अरुण जेटली या उनके जैसे ही किसी एनडीटीवी-प्रेमी नेता से मिल जाए।

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