‘नक्सलियों के काल’ कल्लूरी की बस्तर वापसी होगी?

बायीं तस्वीर आईजी कल्लूरी की है। दायीं तस्वीर मुंबई के मरीन ड्राइव पर हुए प्रदर्शन की है। जहां बस्तर के लोगों ने कल्लूरी की वापसी के लिए कैंडल मार्च आयोजित किया।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में 26 जवानों की मौत के बाद लोगों को एक बार फिर से पूर्व आईजी शिव राम प्रसाद कल्लूरी की याद आ रही है। कल्लूरी ही वो पुलिस अफसर थे जिन्होंने अपने दम पर पूरे इलाके में नक्सली संगठनों की कमर तोड़ दी थी। उनके बारे में मशहूर है कि वो अकेले ऑपरेशन पर निकलते थे और नक्सलियों को खुद उनके अंजाम तक पहुंचाते थे। कई बार वो रात-रात भर पैदल या साइकिल से अकेले ही ऑपरेशन पर जाया करते थे। उनके नाम की दहशत ऐसी थी कि कई नक्सलियों को बस्तर छोड़कर भागना पड़ा था। लेकिन दिल्ली में बैठे नक्सलियों ने बाकायदा अभियान चलाकर कल्लूरी को इसी साल फरवरी में उनके पद से हटवा दिया। कल्लूरी को हटाने के बाद से नक्सली इलाकों में ऑपरेशन चला रही पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल काफी कमजोर हुआ था। माना जाता है कि अगर कल्लूरी छह महीने और बस्तर में रह जाते तो यहां नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया हो जाता। कहा जाता है कि कल्लूरी ने अग्नि संस्था नाम से एक संगठन भी बना रखा था जो जमीन पर रहकर नक्सलियों के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का काम किया करती थी। काम करने की इस बेखौफ स्टाइल के कारण ही उनको छत्तीसगढ़ का केपीएस गिल भी कहा जाता रहा है।

नक्सलियों ने रची साजिश

आईजी कल्लूरी के हाथों बुरी तरह से पिटने के बाद दिल्ली में बैठे सफेदपोश नक्सलियों ने उनके खिलाफ साजिशें शुरू कर दीं। सुप्रीम कोर्ट से लेकर मानवाधिकार आयोग तक में कल्लूरी के खिलाफ शिकायतें डाली गईं। दिल्ली की सफेदपोश नक्सली कॉमरेड बेला भाटिया बस्तर में रहकर नक्सलियों को मदद पहुंचा रही थी। कल्लूरी को जब ये बात पता चली तो उन्होंने उसे खदेड़ने की तैयारी शुरू कर दी। लेकिन इससे पहले कि वो ऑपरेशन शुरू कर पाते बेला भाटिया को भनक लग गई और उसने दिल्ली की मीडिया में अपने नक्सली दोस्तों की मदद से इसे राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। एनडीटीवी और कुछ दूसरे चैनलों के नक्सल समर्थक संवाददाताओं ने कल्लूरी के खिलाफ जमकर अभियान चलाया। नतीजा यह हुआ कि भारी दबाव में छत्तीसगढ़ सरकार को उन्हें लंबी छुट्टी पर भेजना पड़ा। साजिश दिल्ली से ही नहीं, बस्तर में भी चल रही थी। गिरफ्तार नक्सलियों के पास से एक चिट्ठी मिली थी, जिससे उनकी हत्या की साजिश का खुलासा हुआ था। ये चिट्ठी सीपीआई-एमएल के एरिया कमेटी मेंबर वर्गीज़ ने जगदीश नाम के किसी बड़े नक्सली नेता को लिखी थी। इस चिट्ठी में यह भी लिखा था कि कल्लूरी नक्सलियों का सबसे बड़ा दुश्मन है। अगर हम किसी तरह उसे मार दें तो सरेंडर की सरकारी नीति बंद हो जाएगी और तभी ऑपरेशन ग्रीन हंट भी रुकेगा। दो साल तक बस्तर रेंज में रहे आईजी कल्लूरी ने सैकड़ों नक्सलियों को सरेंडर करवाया था।

ठंडे दिमाग का गरम अफसर

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ललाट पर बड़ा सा टीका लगाने वाले कल्लूरी कई बार भरी गर्मी में ऊनी टोपी पहनते हैं। इसे देखकर लोग कहा करते थे कि वो बहुत ठंडे दिमाग से काम लेते हैं। नक्सलियों का एनकाउंटर करने के लिए बहुत सोचे-समझे तरीके से जाल बुनते थे। ज्यादातर ऑपरेशन में वो रिस्क लेकर अकेले ही जाते थे और काम करके ऐसे लौटते थे मानो कुछ हुआ ही नहीं। कल्लूरी के साथ काम कर चुके अफसर बताते हैं कि वो बेहद जुनूनी किस्म के इंसान हैं। किसी भी काम को करने के लिए वो खुद को पूरी तरह झोंक देते हैं और नतीजों की परवाह नहीं करते। किसी के बारे में वो अपनी पसंद-नापसंद खुलकर जताते हैं। बताते हैं कि वो अपने से ऊपर के पुलिस अधिकारियों की भी नहीं सुनते थे। वो सीधे मंत्री से बात करते थे और रोजमर्रा के अपडेट सीधे मंत्री को ही देते थे। कल्लूरी उस समय चर्चा में आए थे जब उनके खिलाफ रेप का आरोप लगा था। लेदा नाम की एक आदिवासी महिला ने यह आरोप लगाया था कि कल्लूरी ने उसके नक्सली पति रमेश नगेसिया को आत्मसमर्पण करने के लिए बुलाया लेकिन उसे गोली मार दी। उसके बाद महिला के साथ रेप किया। बाद में उस महिला ने केस वापस ले लिया क्योंकि वो इसका कोई सबूत नहीं दे सकी।

नक्सली जीते, कल्लूरी हारे!

बेला भाटिया के मामले में जब सरकार ने दबाव में आकर उनको छुट्टी पर भेज दिया तो उन्होंने पुलिस डिपार्टमेंट के एक व्हाट्सएप ग्रुप पर सिर्फ इतना लिखा था कि “बेला भाटिया जीत गई”। वो खुद को हटाए जाने से बहुत नाराज थे और चाहते थे कि सरकार उन्हें नक्सली इलाकों में पूरी सफाई होने तक बनाए रखे। आईजी शिवराम प्रसादकल्लूरी आज भी पूरे इलाके में बेहद लोकप्रिय हैं। लोग आज भी चाहते हैं कि सरकार कोर्ट और मानवाधिकार संगठनों के दबाव में न आए और उन्हें वापस बस्तर की कमान सौंपी जाए। देखना है कि सुकमा हमले के बाद क्या छत्तीसगढ़ सरकार और गृह मंत्रालय कल्लूरी की वापसी बस्तर में करवाएगा। फिलहाल सोशल मीडिया पर लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग कर रहे हैं कि आईजी कल्लूरी को बस्तर में बाइज्जत वापस लाया जाए:

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

comments

Tags: , , , ,