क्या ममता ने बंगाल में फतवों की फैक्ट्री खुलवाई है!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गायक सोनू निगम तक के खिलाफ फतवे जारी हो रहे हैं और इन सभी में एक कॉमन बात है वो ये कि लगभग सभी फतवे बंगाल से जारी किए जा रहे हैं। हाल ही में सोनू निगम का सिर मुंडवाने वाले को 10 लाख रुपये देने का फतवा जारी किया गया था। इस फतवे को जारी करने वाला मौलवी सैयद शाह अली कादरी पश्चिम बंगाल की माइनॉरिटी यूनाइटेड काउंसिल का वाइस प्रेसिडेंट भी है। बंगाल में ये और ऐसी तमाम मुस्लिम संस्थाएं सरकारी पैसे पर चल रही हैं। इनमें कट्टरपंथियों की पौध तैयार की जा रही है जो जिहाद और हिंदुस्तान में इस्लामी हुकूमत के सपने देखती है। सरकारी शह के कारण आतंक ऐसा है कि ये लगभग हर मुद्दे पर आए दिन फतवे जारी कर रहे हैं। सोनू निगम की ही तर्ज पर कुछ दिन पहले कोलकाता की टीपू सुल्तान मस्जिद के इमाम सैयद मोहम्मद नुरुल रहमान बरकती ने प्रधानमंत्री मोदी के सिर और दाढ़ी के बाल मुड़वाने वाले को 25 लाख रुपये इनाम का एलान किया था। फतवा जारी करने वाले ज्यादातर मौलवी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी के करीबी माने जाते हैं। बीते कुछ दिनों में ऐसे फतवों की बाढ़ आई हुई है।

ये है फतवों का असली कहानी

हमने इस बारे में बंगाल में मालदा के एक मदरसे से जुड़े मुस्लिम विद्वान से बात की। उन्होंने जो बातें हमें बताईं वो वाकई चौंकाने वाली हैं। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री या किसी फिल्म स्टार के खिलाफ जारी होने वाले फतवे पब्लिसिटी की नीयत से जारी किए जाते हैं। ऐसे फतवों से मौलाना रातों-रात सेलिब्रिटी बन जाता है और उसका मुस्लिम समाज में कद बढ़ जाता है। मसलन सोनू निगम पर फतवा जारी करने वाले मौलवी के पक्ष में बंगाल में कई मुस्लिम इलाकों में पोस्टर लग गए हैं। इनमें उसे इस्लाम की हिफाजत करने वाला बताया गया है। इसी तरह प्रधानमंत्री के खिलाफ फतवा जारी करने वाले इमाम पर भी ममता बनर्जी सरकार की मेहरबानियां जारी हैं। कुछ वक्त पहले तक एक मामूली मौलवी के तौर पर जाना जाने वाला मस्जिद का इमाम अब बंगाल की सबसे ताकतवर और मशहूर हस्तियों में से एक है। उसे बाकायदा पुलिस की सिक्योरिटी भी मिली हुई है। इसी मौलवी ने पिछले दिनों बीजेपी युवा मोर्चा के सदस्य योगेश वार्ष्णेय का सिर काटकर लाने वाले को 22 लाख रुपये देने का एलान किया हुआ है। योगेश वार्ष्णेय ने ममता बनर्जी के खिलाफ 11 लाख के इनाम का एलान किया था, जिसके जवाब में इमाम ने 22 लाख का फतवा जारी किया है। बीजेपी युवा मोर्चा के नेता के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज हो चुका है और उसने अपनी हरकत के लिए माफी भी मांग ली है, लेकिन बंगाल में मौलाना बरकती के खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं की गई। बरकती ने पिछले साल बंगाल बीजेपी के प्रमुख दिलीप घोष को पत्थर मारते हुए राज्य से बाहर निकालने का फतवा भी जारी किया था।

फतवों के नाम पर अवैध वसूली

हमें बताया गया कि जो फतवे मीडिया की सुर्खियों में आ जाते हैं वो सिर्फ हाथी के दांत की तरह दिखावे के हैं। इसके अलावा आम कारोबारियों और नौकरीपेशा लोगों को भी फतवे के जरिए डराने की कोशिश होती रहती है। इन फतवों की ज्यादा चर्चा नहीं होती। उन्होंने एक मिसाल के तौर पर बताया कि कैसे पश्चिमी मिदनापुर में एक व्यक्ति ने पड़ोसी की बेटी को प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने से रोकने के लिए फतवा जारी करवा लिया। इस फतवे के आधार पर लड़की के परिवार को धमकी दी गई कि अगर उसकी बेटी ने नौकरी की तो पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। इसके बाद लड़की के पिता से 5 लाख रुपये मांगे गए। ये पैसा फतवा जारी करने वाला मौलवी और पड़ोसी दोनों आपस में बांट लेते हैं। शहरी इलाकों में तो फिर भी स्थिति बेहतर है, लेकिन गांवों में फतवों की फसल खूब लहलहा रही है। किसी भी मौके पर, किसी भी मुद्दे पर मनचाहा रेडीमेड फतवा मिल जाता है। इनकी कीमत 10 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक हो सकती है। खास तौर पर लड़कियों को घर से निकलने से रोकने के लिए ये फतवे सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं। सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, बल्कि कई मामलों में हिंदू परिवारों को भी फतवों के जरिए डराने-धमकाने और वसूली की कोशिश के मामले सामने आ चुके हैं। बंगाल पुलिस और ममता सरकार को इस फतवा इंडस्ट्री के बारे में अच्छी तरह पता है, लेकिन जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। फिलहाल बंगाल की इस फतवा फैक्ट्री पर लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए नाराजगी जताना शुरू कर दिया है।

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