केजरीवाल के नाम आईआईटी इंजीनियर का खुला पत्र

दायीं तस्वीर इस पोस्ट के लेखक गौरव राजपुरोहित की है।

श्रीमान अरविंद केजरीवाल जी,
वैसे सामान्यतया मैं आपको गंभीरता से नहीं लेता| परंतु आज मुझे आपका कुछ कहा व्यक्तिगत रूप से बुरा लगा है। आपने कहा कि आप “IIT के इंजीनियर” हैं, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को हैक करने के 10 तरीके बता सकते हैं। मैं भी IIT का इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) हूँ और मैं आपको अपने संस्थान की इज्जत मिट्टी में नहीं मिलाने दूंगा। आज आपको कुछ तथ्यों से सामना करवाता हूँ। आपने आज से करीब 25 साल पहले IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग किया। आप जनता को बेवकूफ बना सकते है पर एक इंजीनियर को नहीं। मैकेनिकल इंजीनियर होने के नाते आप ईवीएम के बारे में कुछ नहीं जानते। ईवीएम के बारे में ज्ञान होने के लिए आपको आईसी डिजाइन, मटीरियल साइंस, कम्युनिकेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, एंबेडेड सिस्टम, माइक्रो प्रॉसेसर्स और प्रोग्रामिंग का नॉलेज होना जरूरी है। इंजीनियर तो आम तौर पर 2 साल में ही सब भूल जाते हैं और अगर उनका नाता इंजीनियरिंग से टूट गया हो। आपको तो 25 साल बीत चुके हैं, इसलिए “IIT का इंजीनियर” होने के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाना बंद कीजिए।

केजरीवाल जी आप जानते भी होंगे कि ईवीएम कैसे काम करता है? मैं ही आपको बता देता हूं कि ईवीएम एक Stand-alone मशीन है। यानी ऐसी मशीन जिसका बाहर की दुनिया से कोई नाता नहीं होता। न तो तार के जरिए, न ही किसी वायरलेस सिस्टम से। इसे सॉफ्टवेयर के माध्यम से हैक करना तो लगभग नामुमकिन है। हाँ अगर कोई जाके चिप बदल आए तो संभव है। इसको रोकने के लिए भी चुनाव आयोग आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाता है, जिनके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए। आप एक हारे हुए राजनेता के रूप में ईवीएम पर प्रश्न उठाएं, पर एक “IIT का इंजीनियर” होने के नाते नहीं। वैसे एक सत्य ये भी है की कोई IIT का हो जाने मात्र से अच्छा इंजीनियर नहीं हो जाता। अच्छे इंजीनियर तो वो है जिन्होंने ईवीएम जैसी मशीन बनाई। वो इतने समझदार लोग थे कि उन्होंने ईवीएम का एक एक हिस्सा पूरी तरह से भारतीय बनाया ताकि किसी विदेशी को भी न पता चल पाए की भारत में ईवीएम मशीनें कैसे काम करती हैं। आप क्यों उन सबकी मेहनत और अक्ल पर सवाल खड़ा करना चाहते हैं?

एक हिंदी न्यूज़ चैनल के जाने-माने पत्रकार रजत शर्मा ने आपको आईआईटी का Manufacturing Defect कहा था। अब तो उनकी यह बात सही भी लगती है। कुछ तो शर्म करो। IITs की कितनी बेज्जती करवाओगे। खैर फिर भी आपको लगता है कि ईवीएम हैक हो सकती है तो ये गधे की तरह ढेंचू-ढेंचू करना बंद करो। चुनाव आयोग ने सभी को निमंत्रण दिया है, आप भी जाएँ। आपके 10 में से कोई 1 तरीका लगाएं , ईवीएम को हैक करें और जनता को सिद्ध करें कि आप सही कह रहे हो। एक बार हैक करके दिखाओ, फिर कहो कि मैं IIT का इन्जीनियर हूँ तो हमें भी अच्छा लगेगा की IIT के मैकेनिकल इन्जीनियर ने इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैटीरियल साइंस, आईटी इंजीनियर सबको गलत साबित कर दिया। देश का भी भला होगा, पता तो चलेगा की सिस्टम में क्या बदलाव जरूरी हैं औ ईवीएम मशीनों को और फुलप्रूफ बनाने के लिए क्या करना होगा। पर इंजीनियर होने के बावजूद भी आप पुरानी और भी घटिया बैलेट पेपर पद्धति से चुनाव की मांग कर रहे हैं। ये तो पूरी इंजीनियर कम्युनिटी के लिए शर्मनाक है। इंजीनियर टेक्नोलॉजी के मामले में कभी पीछे मुड़ के नहीं देखते।
God bless you
आपका शुभचिंतक
गौरव राजपुरोहित, IIT दिल्ली

(गौरव राजपुरोहित के फेसबुक पेज से साभार, गौरव इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस के टॉपर भी रहे हैं।)

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

comments

Tags: , , ,