2019 में रॉबर्ट वाड्रा होंगे कांग्रेस के पीएम उम्मीदवार?

क्या राहुल गांधी के नाकाम होने के बाद प्रियंका नहीं, बल्कि उनके पति रॉबर्ट वाड्रा कांग्रेस की बागडोर संभालने वाले हैं? ये सवाल रॉबर्ट वाड्रा के हाल के कुछ क्रिया-कलापों के कारण उठ रहे हैं। रॉबर्ट वाड्रा बीते कुछ समय से तमाम राजनीतिक मसलों पर सोशल मीडिया के जरिए रिएक्शन देते रहे हैं। कई बार वो कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से भी अधिक चुस्त निकलते हैं। इसके अलावा वो गरीबों को खाना खिलाने और उनकी मदद जैसे कार्यक्रम करके अपनी इमेज भी सुधारने में जुटे हैं। अक्सर उन्हें अपने घर पर गरीबों के लिए लंगर लगाते देखा जा सकता है। पिछले दिनों हनुमान जयंती पर वाड्रा ने कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर में जाकर दर्शन किए थे। यहां मंदिर के बाहर उन्होंने अपने हाथों से भिखारियों को खाना भी खिलाया। जबकि इससे पहले उन्हें कभी मंदिर वगैरह में नहीं देखा गया। 18 अप्रैल को अपने 48वें जन्मदिन पर वाड्रा ने अपने दफ्तर के बाहर बुजुर्ग महिलाओं के साथ केक काटा और उन्हें खाना खिलाया। वाड्रा इन मौकों पर मीडिया को तो नहीं बुलाते, लेकिन सारी तस्वीरें फेसबुक पर जरूर पोस्ट करते हैं। इन बातों से कांग्रेस पार्टी के अंदरखाने में अटकलें हैं कि कहीं प्रियंका गांधी की अनिच्छा को देखते हुए सोनिया दामाद को आगे तो नहीं करने वालीं?

दामाद वाड्रा की राजनीति

वाड्रा के राजनीति में आने की अटकलें यूं ही नहीं हैं। अगर वो सिर्फ गरीबों के साथ केक काटने और हनुमान मंदिर में दर्शन तक सीमित रहते तो भी लोगों को शक नहीं होता। दरअसल वाड्रा को जन्मदिन की बधाई देते हुए देशभर के 12 राज्यों में उनके बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में लगे इन पोस्टरों में कार्यकर्ताओं ने रॉबर्ट वाड्रा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं। एक साथ इतने राज्यों में पोस्टर लगने की बात सभी को हैरानी में डाल रही है। बिना किसी केंद्रीय इशारे के यह संभव ही नहीं है कि इतने बड़े पैमाने पर कांग्रेस कार्यकर्ता वाड्रा का जन्मदिन मनाने लग जाएं। ऐसा लग रहा है कि सोनिया गांधी दामाद को थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ाकर लोगों की प्रतिक्रिया लेना चाह रही हैं। वैसे 2009 के लोकसभा चुनाव में अमेठी में वाड्रा ने राजनीति में आने की अपने दिल में दबी इच्छा को जता भी दिया था। जिसके बाद उस बयान पर काफी हंगामा भी हुआ था।  वैसे वाड्रा के जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही जस्टिस ढींगरा की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा हुई है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक वाड्रा को उम्मीद है कि वो इसमें बरी होकर निकलेंगे और इसके बाद वो राजनीति में औपचारिक तौर पर अपनी पारी शुरू करेंगे।

इमेज सुधारने की कोशिश

जब सास सोनिया गांधी की सरकार सत्ता में थी तो रॉबर्ट वाड्रा को ज्यादातर जिम और हाईफाई पार्टियों में ही देखा जाता था। लेकिन मोदी सरकार आने के बाद से उनका नया अवतार हुआ है। जाहिर है जमीन हड़पने के कई मामलों और इससे जुड़े घोटालों में रॉबर्ट वाड्रा की काफी फजीहत हो चुकी है। ऐसे में वो खुद को दयालु और आम इंसान की तरह पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही तमाम सियासी मुद्दों पर वाड्रा अपने कमेंट्स फेसबुक पर लिखते रहते हैं। ऐसा करके वो खुद को राजनीतिक तौर पर जागरुक व्यक्ति दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कहीं समाजसेवा करते-करते गांधी परिवार का ये दामाद राजनीतिक विरासत संभालने का दावा तो नहीं ठोंकने जा रहा। पिछले दिनों बीजेपी नेता तरुण विजय के दक्षिण भारतीयों को लेकर दिए बयान पर जब हंगामा मचा तो सबसे पहले वाड्रा ने ही फेसबुक के जरिए प्रतिक्रिया दी।

बर्थडे पर गरीबों के साथ केक काटते हुए रॉबर्ट वाड्रा

 

पिछले साल वाड्रा ने मुंबई के मशहूर सिद्धिविनायक मंदिर में भी दर्शन किया था।

रॉबर्ट वाड्रा के सियासी सपनों के बीच यह सवाल जरूर है कि क्या कांग्रेस पार्टी के तमाम पुराने और सीनियर नेता उन्हें स्वीकार कर पाएंगे। वाड्रा के लिए दिक्कत यह है कि कई कांग्रेसी नेता उन्हें पार्टी की तमाम मौजूदा समस्याओं के लिए जिम्मेदार मानते हैं। ऐसे में वाड्रा के सियासी सपने क्या वाकई पूरे हो पाएंगे ये देखना दिलचस्प होगा।

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