मीडिया के आगे ये ध्यान रखें, नेताओं के लिए 10 टिप्स

भुवनेश्वर में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के नेताओं को सुझाव दिया कि वो बड़बोलेपन और बेवजह की बयानबाजी से बचें। ऐसे वक्त में जब सियासी तौर पर बीजेपी की शानदार पारी चल रही है, बीच-बीच में बीजेपी के ही नेता और कार्यकर्ता कुछ न कुछ ऐसा करते रहते हैं जिससे सरकार और पार्टी को शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने पार्टी नेताओं को आगाह किया कि ‘माइक कोई ऐसी मशीन नहीं है जो लोगों को बोलने के लिए मजबूर करती हो। हमें ये कला सीखनी चाहिए कि कब क्या बोलना और क्या नहीं बोलना है। क्योंकि एक विवादित बयान कई अच्छे कामों पर पानी फेर देता है। इसलिए कैमरा देखकर चुप रहना सीखिए।’ वैसे तो मोदी ऐसी बातें पहले भी कई बार कह चुके हैं। उन्होंने कई बार ऐसे बयान देने वाले कुछ नेताओं को बुलाकर उनको चेतावनी भी दी। लेकिन हालात में बहुत सुधार नहीं है। शायद बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री की बात समझ में ही नहीं आ रही है। ऐसे नेताओं की मदद के लिए हमने कुछ टिप्स तैयार की हैं, जिनकी मदद से वो मीडिया के पैदा किए फिजूल के बयानों से बच सकते हैं।

1. हर सवाल का जवाब जरूरी नहीं

जब पत्रकार आपसे कोई सवाल पूछते हैं और सामने माइक हो तो जरूरी नहीं कि कुछ न कुछ बोला ही जाए। आप कह सकते हैं कि मुझे इस बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लेने दीजिए। इसके बाद ही कुछ बोलना सही होगा। सही समय पर कमेंट करूंगा। पत्रकार अगर आपको जानकारी दें तो आप कह सकते हैं कि यह बात आप बता रहे हैं। धन्यवाद। लेकिन मुझे भी अपने स्तर पर जानकारी ले लेने दीजिए। यहां ध्यान रखिए कि अगर आपने कह दिया कि “मुझे नहीं पता।” तो मीडिया कहना शुरू कर देगा कि इतना बड़ा मसला लेकिन नेता जी इतने गैर-जिम्मेदार हैं कि उन्हें पता तक नहीं। आप विषय का संज्ञान लीजिए, लेकिन पूरी जानकारी बटोर रहा हूं कहकर आगे बढ़ जाइए। अगर प्रश्न आपके विभाग या जिम्मेदारी से संबंधित नहीं है तो यह कहना सबसे सुरक्षित होता है कि- मैं इस बारे में बोलने के लिए अधिकृत नहीं हूं। अगर आपसे आपकी निजी राय पूछी जाए तो जवाब दीजिए, मेरी कोई निजी राय नहीं, जो पार्टी/नेता की राय वही मेरी राय।

2. सटीक जवाब देना जरूरी नहीं

याद रखिए पत्रकारों के सवाल दसवीं के बोर्ड का इम्तिहान नहीं हैं, जिनका सटीक उत्तर देना जरूरी है। आपसे पूछा जो जाए आप वही जवाब दे सकते हैं जो आपको देना है। हर सवाल को सरकार की योजनाओं और विकास के एजेंडे से घुमा-फिराकर जोड़ते हुए यह जता सकते हैं कि आप जनता की सेवा और विकास के लिए समर्पित हैं। ऐसे जवाबों में आप अपने नेता के विजन का जिक्र कर सकते हैं और कह सकते हैं कि हम काम में जुटे हैं और आपके सवालों का जवाब भी सही समय पर आपको मिल जाएगा। बस यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसा करते हुए आप कोई हास्यास्पद बातें न करने लगें। अगर बार-बार वही सवाल पूछा जा रहा है तो झल्लाने की जरूरत नहीं है आप अपने उत्तर को ही दोहराते रहें। बार-बार पूछा ही इसलिए जा रहा है कि आप झल्ला जाएं और कुछ गलत बोल दें। आप विनम्रता के साथ यह कह सकते हैं कि बार-बार एक ही सवाल पूछने से कुछ फायदा नहीं होगा। मैंने आपको अपना जवाब दे दिया है।

3. पत्रकार आपको भड़काना चाहते हैं

कुछ रिपोर्टर कोशिश करते हैं कि वो ऐसी चुभती हुई बात कहें कि आप भड़क जाएं। यह बहुत खतरनाक स्थिति होती है। अक्सर नेता आपा खो बैठते हैं और अंट-शंट बोलना शुरू कर देते हैं। मीडिया यही चाहती है और दो पल का ये गुस्सा आपके पूरे राजनीतिक करियर पर भारी पड़ जाता है। ऐसा कोई भड़काऊ सवाल आए तो फौरन पत्रकार की मंशा समझ जाएं और मौके के मुताबिक मुस्कराकर या नो कमेंट्स कहकर आगे बढ़ जाएं। ‘नो कमेंट’ भी गुस्से में न कहें। वरना उसका भी मतलब निकाल लिया जाएगा। पत्रकार अपना काम कर रहा है आप तैश न खाएं। सामान्य तौर पर भी मीडिया के आगे कभी चिड़चिड़ा नहीं दिखना चाहिए। इससे आपके समर्थकों में भी खराब मैसेज जाता है।

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