अरबों डकार कर कांग्रेस की रूखी-सूखी डिनर पार्टी!

अरबों रुपये के घोटालों और कमीशनखोरी में बदनाम हुई कांग्रेस पार्टी अब सादगी का दिखावा कर रही है। लेकिन लगता है पार्टी का ये अंदाज खुद उसके नेताओं को ही पसंद नहीं आ रहा। बीती रात सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी के सभी सांसदों को खाने पर बुलाया। पहली बार ऐसी पार्टी किसी फाइव स्टार होटल में न होकर पार्लियामेंट के अंदर की गई। इस पार्टी में संसद की कैंटीन का ही खाना परोसा गया। लेकिन पार्टी में तय वक्त तक आधे सांसद ही पहुंचे। लोकसभा में 44 और राज्यसभा में 59 सांसद हैं। ज्यादातर 8 बजे तक नदारद दिखे। हालांकि खुद सोनिया गांधी, राहुल और मनमोहन सिंह ठीक 8 बजे पहुंच चुके थे। एक जमाना वो भी था जब ऐसी पार्टियां फाइवस्टार होटलों या फार्महाउस में हुआ करती थीं। इनमें सांसद और दूसरे नेता तय समय से आधा घंटे पहले पहुंच जाया करते थे। पार्टी में पूरे समय सभी के चेहरे उतरे हुए थे। कैंटीन का खाना भी रूखा-सूखा ही था। वैसे बताया जा रहा है कि इस पार्टी के बहाने सोनिया ने इन अटकलों को एक बार फिर से हवा दी है कि वो अध्यक्ष पद राहुल गांधी को सौंप सकती हैं।

खोटा सिक्का चलाने की कोशिश

डिनर पार्टी में मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, एके एंटनी, पी चिदंबरम और राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने भी शिरकत की। इसके अलावा अहमद पटेल, पार्टी महासचिवों, प्रभारियों और पार्टी के मीडिया मामलों के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला भी मौजूद थे। सोनिया हाल ही में विदेश से इलाज कराके लौटी हैं और माना जा रहा है कि अब उनका सारा फोकस राहुल को किसी भी तरह पार्टी का सर्वमान्य नेता बनाने पर है। दरअसल अभी तक राहुल गांधी की ताजपोशी टलती रही है, क्योंकि उनके नाम पर पार्टी के कई वरिष्ठ सदस्य सहमत नहीं हैं। इस गुट के नेता कहते हैं कि राहुल गांधी अभी नेतृत्व जैसी बड़ी जिम्मेदारी संभालने के लायक नहीं हैं और उन्हें सहायक की ही भूमिका में रहना चाहिए और सोनिया को खुद अध्यक्ष पद पर बने हना चाहिए। वैसे कांग्रेस में एक बड़ा तबका प्रियंका वाड्रा को अभी से सक्रिय राजनीति में लाने की वकालत कर रहा है, लेकिन सोनिया गांधी इस मुद्दे को बार-बार ये कहकर टाल जाती हैं कि ये प्रियंका का अपना फैसला होगा। सोनिया से जब राहुल के सवाल पर पूछा गया तो उनका जवाब था कि जब होगा, पता चल जाएगा।

कांग्रेस

सोनिया, राहुल और मनमोहन पार्टी में काफी देर तक यूं ही बैठे सांसदों का इंतजार करते रहे। ज्यादातर सांसद आधे घंटे की देरी से पहुंचे।

नई रणनीति बना रही हैं सोनिया

इस बीच ये भी खबर है कि सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी में जान फूंकने के लिए नई रणनीति बना रही हैं। डिनर में मौजूद पार्टी के एक नेता ने हमें बताया कि सोनिया नहीं चाहती हैं कि मौजूदा खस्ता हालत में वो कांग्रेस का नेतृत्व राहुल के हाथों में सौंपें। मतलब ये कि खुद सोनिया को भी राहुल की क्षमताओं पर भरोसा नहीं है। साथ ही पार्टी के तमाम सीनियर नेताओं को सहयोग करने के लिए मनाना भी बड़ी चुनौती है। एसएम कृष्णा जैसे नेताओं के बीजेपी में जाने से कांग्रेस को बड़ा धक्का लगा है और उन्हें लग रहा है कि अगर राहुल गांधी को नेता बनाया गया तो पार्टी बिखर भी सकती है। फिलहाल सोनिया ने सभी नेताओं से कहा है कि मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक रणनीति जारी रखें। खबर है कि सोनिया की इस सलाह पर पार्टी के ही एक सीनियर नेता ने उन्हें याद दिलाया कि आक्रामक रणनीति से अब तक कुछ खास फायदा नहीं हुआ है। कुल मिलाकर पार्लियामेंट में हुई इस रूखी-सूखी डिनर पार्टी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कांग्रेस में अब न तो कोई करिश्मा बचा और न ही मौजूदा संकट से निकलने का कोई उत्साह। पार्टी अब के नेता अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद में दिन काट रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि शायद 2004 की तरह एक बार फिर से प्लेट में सजाकर सत्ता मिल जाएगी।

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