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चुनाव आयोग पर हमले क्या पाकिस्तान के इशारे पर!

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को लेकर कुछ राजनीतिक दलों के बयानों के पीछे आखिर कारण क्या है? चुनाव आयोग ने अपनी मर्यादा में रहते हुए ईवीएम की सुरक्षा को लेकर सभी पार्टियों को भरोसा दिलाया है। यहां तक तैयारी हो रही है कि सभी पार्टियों के तकनीकी प्रतिनिधियों को बुलाकर दिखाया जाएगा कि कैसे ईवीएम में जिस धांधली की बातें कही जा रही हैं वो संभव नहीं है। इसके बावजूद ईवीएम और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर केजरीवाल के हमले जारी हैं। आम आदमी पार्टी के अलावा कांग्रेस, बीएसपी और कुछ दूसरी पार्टियां भी ईवीएम पर सवाल उठा चुकी हैं। लेकिन चुनाव आयोग की सफाई के बाद उनके बड़े नेता इस मुद्दे पर चुप हो गए। जबकि अरविंद केजरीवाल ने हमले और भी तेज़ कर दिए। हमारे एक भरोसेमंद सूत्र ने बताया कि आम आदमी पार्टी की पुरानी फंडिंग और मुद्दों के चुनाव को देखते हुए शक है कि इसके पीछे कहीं न कहीं कोई सोची-समझी साजिश है। खुफिया एजेंसियां इस एंगल से जांच कर रही हैं कि कहीं कोई विदेशी ताकत भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने की नीयत से तो ऐसा नहीं कर रही है।

केजरीवाल के रवैये से शक

सूचना के अधिकार से लेकर दिल्ली में सरकार बनाने तक केजरीवाल के सफर में अक्सर यह शक जताया गया है कि वो विदेशी एजेंसियों के इशारे पर काम कर रहे हैं। आंदोलन के दिनों में उन्हें और मनीष सिसोदिया के एनजीओ को फोर्ड फाउंडेशन से करोड़ों रुपये मिले थे। जिसका इस्तेमाल भारत में सरकार विरोधी अराजकता पैदा करने की कोशिश में हुआ। ये आरोप लगते रहे हैं कि केजरीवाल अमेरिकी एजेंसियों के इशारे पर भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने में जुटे हैं। इसी के तहत लोकपाल जैसी निरंकुश संस्था बनाने का आंदोलन भी छेड़ा गया था। केजरीवाल को मिलने वाली फंडिंग हमेशा जांच के दायरे में रही है। बीते कुछ समय से आम आदमी पार्टी को खाड़ी देशों और पाकिस्तान से मिलने वाले चंदे में भारी उछाल देखा गया है। इसके कारण भी खुफिया एजेंसियां खास सावधानी बरत रही हैं। इससे पहले पंजाब चुनाव में भी केजरीवाल को खालिस्तानी आतंकवादियों से भी मदद मिलने के आरोप लग चुके हैं। तब यह बात सामने आई थी कि कनाडा और यूरोप के देशों से हवाला के जरिए काफी रकम पंजाब चुनाव में खर्च के लिए आई थी। खुद आम आदमी पार्टी के नेता भी विदेशों में कई खालिस्तान समर्थक नेताओं से मिले थे। उनकी इन तमाम गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियों की शुरू से नजर रही है। चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के कारण भारतीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता हमेशा दुनिया भर में बहुत अधिक रही है। पाकिस्तान और ऐसे कई देशों के लिए भारत का लोकतंत्र जलन का कारण भी है। ऐसे में अक्सर ऐसी कोशिश होती रहती हैं जिससे लोकतंत्र पर सवाल खड़े होते हों।

शक के पीछे है पुख्ता कारण

वोटिंग मशीन को लेकर विवाद अचानक शुरू नहीं हुआ। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से इंटरनेशनल मीडिया में ईवीएम मशीनों सवाल उठाते हुए कई लेख पब्लिश हो चुके हैं। माना जाता है कि इस तरह की रिपोर्ट्स को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई स्पॉन्सर कर रही है। ये अलग बात कि खुद पाकिस्तान सरकार बीते कई साल से अपने यहां वोटिंग मशीनों से चुनाव कराने के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई नहीं चाहते कि वोटिंग मशीन से चुनाव हो, क्योंकि ऐसा हुआ तो उनके लिए धांधली करके अपनी मर्जी की सरकारें बनवाना आसान नहीं रह जाएगा। पाकिस्तान में पिछले साल सितंबर में इसे लेकर विवाद भी हुआ था। तब ये खबर आई थी कि रिलायंस समेत 3 भारतीय कंपनियों से ईवीएम खरीदने की बात हो रही है। इसके बाद पाकिस्तानी अदालतों में 500 से ज्यादा अर्जियां डालकर भारत से वोटिंग मशीन खरीदने पर रोक की मांग की गई थी। जवाब में पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने सफाई दी थी कि किसी भारतीय कंपनी से वोटिंग मशीन नहीं खरीदी जाएंगी। लेकिन यह शक बना रहा कि कोई भारतीय कंपनी विदेशी वेंडर के जरिए सप्लाई की डील हासिल कर सकती है। ऐसे में पाकिस्तान की कई ताकतें इस प्लान को खत्म कराने में जुट गई थीं। इसी के तहत दुनिया भर के अखबारों में ईवीएम पर सवाल उठाने वाले लेख छपवाए गए। अब केजरीवाल की मदद से उन्होंने वो लक्ष्य हासिल कर लिया जिसकी कोशिश वो बीते दो-ढाई साल से कर रहे थे।

एक तीर से दो निशाने की तैयारी

इधर, दिल्ली में आम आदमी पार्टी इस समय एमसीडी चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगा रही है। खुद केजरीवाल को एहसास है कि वो ये चुनाव बुरी तरह हार सकते हैं। क्योंकि बीते 2 साल में सरकार के कामकाज को लेकर दिल्ली में भारी गुस्सा है। ऐसे में केजरीवाल ने ईवीएम मशीनों पर ही सवाल उठाने का दांव खेला है। ऐसे में अगर उनकी हार हो गई तो वो आराम से ये कहकर बच जाएंगे कि वो हारे नहीं, बल्कि ईवीएम में धांधली से हराया गया। चूंकि केजरीवाल की बयानबाजी का ये सियासी पहलू भी है, लिहाजा इसकी आड़ में केजरीवाल लगातार चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को बदनाम करने में जुटे हैं। जाहिर है चुनाव आयोग को लेकर केजरीवाल के बयानों को पाकिस्तानी मीडिया हाथों हाथ ले रही है।

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