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स्कूलों में टीचर नहीं, केजरीवाल स्विमिंग पूल बना रहे हैं!

दिल्ली के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल देने के अरविंद केजरीवाल सरकार के दावों की पोल एक बार फिर सामने आ गई है। खुद दिल्ली सरकार ने माना है कि उसके स्कूलों में 9000 से ज्यादा टीचरों के पद खाली हैं। सरकार की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे के मुताबिक दिल्ली में टीचरों के कुल पदों की संख्या 59,796 हैं। इनमें 27,142 स्थायी शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। स्थायी शिक्षकों की भरपाई के लिए दिल्ली सरकार 17 हजार के करीब अस्थायी शिक्षकों की सेवाएं ले रही है, लेकिन इनकी काबिलियत हमेशा सवालों के दायरे में रही है। अगर कुल को जोड़ लें तो भी दिल्ली सरकार के स्कूलों में सीधे-सीधे 9000 टीचर नहीं हैं। हैरानी की बात ये है कि खाली पड़े पदों पर नियुक्ति करने के बजाय केजरीवाल सरकार ने ज्यादा मेहनत ये प्रचार करने में की, कि दिल्ली के सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों जैसे हैं और उनमें स्विमिंग पूल बनाए जाएंगे। ये उस शिक्षा क्षेत्र की हालत है, जिसमें आप सरकार सबसे बेहतरीन काम करने का दावा करती है।

बच्चों की पढ़ाई ठप है!

केजरीवाल सरकार ने आदर्श स्कूल के नाम पर कुछ सरकारी स्कूलों को तो खूब चमका दिया, लेकिन बाकी की हालत बद से बदतर होती जा रही है। कई जगहों पर बच्चे रोज स्कूल तो जाते हैं, लेकिन वहां उनकी क्लास लेने के लिए कोई टीचर नहीं। वकील अशोक अग्रवाल ने इस मामले में हाई कोर्ट में अर्जी दी है और अदालत से इस मामले में दखल देने की अपील की है। अपनी याचिका में अशोक अग्रवाल ने पूछा है कि आधे से ज्यादा स्थायी पद अगर खाली हैं तो आखिर सरकारी स्कूल चल कैसे रहे हैं? दरअसल कई स्कूलों में रोज सिर्फ 2 से ढाई घंटे ही क्लास चलती हैं। इसमें लंच की छुट्टी भी शामिल हैं। कई बार टीचर 2-3 क्लास के छात्रों को एक साथ बिठाकर पढ़ाते हैं। इसके अलावा कुछ स्कूलों में सिर्फ 15-15 मिनट की क्लास रखी जाती हैं, ताकि कम टीचर ज्यादा क्लास में पढ़ा सकें। न्यूज18 से बातचीत में करावलनगर इलाके के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों ने बताया कि कई टीचर तो आते ही नहीं हैं और जो आते हैं वो भी क्लास में बच्चों पर ध्यान देने के बजाय ज्यादा वक्त अपने मोबाइल फोन में चैटिंग पर लगे रहते हैं। करावलनगर का ये स्कूल इस इलाके का इकलौता हाई स्कूल है और इसमें 5000 के करीब बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल को शिफ्टों में चलाया जा रहा है। 2 शिफ्ट लड़कों की और 2 लड़कियों की। इनमें से भी ज्यादातर बच्चे सिर्फ मिडडे मील के लिए स्कूल आते हैं और उनकी कोई पढ़ाई-लिखाई नहीं होती।

क्या कहती है सरकार?

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की शिक्षा के मामलों की सलाहकार आतिशी मारलेना ने इस बारे में मीडिया के सवालों पर सफाई दी कि ऐसा नहीं है कि स्कूलों में टीचर या प्रिंसिपल नहीं हैं। जहां प्रिंसिपल नहीं हैं, वहां भी किसी सीनियर टीचर को इसका कार्यभार सौंपा गया है। लेकिन वो इस बारे में कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाईं कि स्कूलों में परमानेंट टीचरों की भर्ती के लिए सरकार ने अब तक क्यों कुछ नहीं किया। जहां तक अस्थायी टीचरों का सवाल है केजरीवाल सरकार उनको भी पक्का करने का कोई तरीका नहीं निकाल सकी।

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