क्या अलवर हत्याकांड में सच छिपा रही है मीडिया?

राजस्थान के अलवर में कथित गोरक्षकों के हाथों एक व्यक्ति की हत्या के मामले में नई जानकारियां सामने आ रही हैं। दिल्ली की मीडिया इस मामले को गोरक्षकों की गुंडागर्दी के तौर पर पेश कर रही है, लेकिन इस पूरे मामले में पुलिस की रिपोर्ट कुछ और ही कहानी कह रही है। हैरानी की बात यह है कि मीडिया ने मारे गए शख्स को गायों के तस्कर के बजाय दूध की डेयरी चलाने वाला बता दिया। साथ ही ये दावा किया जा रहा है कि गायों को ले जाने के कागजात पूरे होने के बावजूद गोरक्षकों ने उन पर हमला किया। जबकि पुलिस की जांच के मुताबिक यह दावा गलत है कि मृतक पहलू खान और उसके साथियों के पास गायें ले जाने के कागजात थे। यह बात सही है कि गोरक्षकों ने कानून हाथ में लेकर गलत किया। लेकिन यह बात बात भी उतनी ही सही है कि ये मामला गायों की तस्करी का है। मीडिया ने पहलू खान को डेयरी कारोबारी तो बता दिया, लेकिन उसकी डेयरी कहां पर है यह नहीं दिखाया। सच्चाई यही है कि पहलू खान और उसके परिवार का डेयरी का कोई कारोबार नहीं है।

सामने आ रही है सच्चाई

पुलिस के मुताबिक शनिवार रात बहरोड़ के जागुवास चेक औद्योगिक क्रॉसिंग पर 15 लोग 6 गाड़ियों में गायों को भरकर हरियाणा के मेवात ले जा रहे थे। सूचना मिली तो बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और उन्होंने वहां से गुजरने वाली सभी गाड़ियों को रोककर पूछताछ शुरू कर दी। पहलू खान और उसके साथियों ने कहा कि वो ये गायें जयपुर नगर निगम से लेकर आए हैं। लेकिन उनके पास इसकी पर्ची नहीं थी। इससे लोगों को शक हो गया और उन्होंने पिटाई शुरू कर दी। जिन वाहनों में गायें भरकर ले जाई जा रही थीं उनमें तीन कैंटर, दो पिक-अप वैन और एक बोलेरो गाड़ी थी। इन वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। इस पूरी मारपीट में 50 साल के पहलू खान को ज्यादा चोट लगी और सोमवार रात उसकी मौत हो गई। जबकि बाकी चार लोगों को थोड़ी-बहुत ही चोट लगी थी। एक चश्मदीद के मुताबिक गाड़ियों में जिस तरह से गायों और बछड़ों को ठूंसा गया था उसी से ये लग रहा था कि गायें पालने के लिए नहीं, बल्कि काटने के लिए ले जाई जा रही थीं।

दोनों तरफ से हुई थी गलती

बताया जा रहा है कि लोग इस कारण ज्यादा भड़क गए, क्योंकि पहलू खान ने नगर निगम की पर्ची दिखाकर धोखा देने की कोशिश की। ये पर्ची एक पशु मेले की थी जहां से गायों को खरीदा गया था। लेकिन राजस्थान में हर कोई जानता है कि ऐसी पर्ची पर खरीदी गई गाय को राज्य से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। इसके लिए अलग से मंजूरी लेनी होती है, जो कि आरोपियों के पास नहीं थी। बाद में जांच के दौरान पुलिस ने जब उनसे इस बारे में कागजात मांगे तो भी वो ऐसा कोई कागज पेश नहीं कर सके। राजस्थान पुलिस खुलकर कह रही है कि गाय ले जा रहे लोग कोई कागजात पेश नहीं कर सके थे और न ही उनके पास ऐसी कोई इजाज़त थी। फिलहाल पुलिस नियमों के मुताबिक दोनों पक्षों पर कार्रवाई कर रही है। पहलू खान के दोनों बेटों से भी कहा गया है कि अंतिम क्रिया से जब भी फारिग हो जाएं थाने आकर घटना के बारे में अपना पक्ष साफ करें। दोनों बेटे दावा कर रहे हैं कि उनके कागजात सही थे, लेकिन इस बात का जवाब नहीं दे पा रहे कि ऐसी क्या मजबूरी थी जिसके कारण वो हरियाणा से गाय खरीदने राजस्थान आए थे और जो गायें उनकी गाड़ियों में थी, वो दुधारू भी नहीं थीं।

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