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वकील की फीस ही नहीं, ये भी ले रहे हैं केजरीवाल!

अरविंद केजरीवाल चाहते हैं कि उन पर मानहानि का जो मुकदमा चल रहा है उसके वकील का खर्च जनता उठाए। दरअसल पिछले साल केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के तमाम नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अरुण जेटली पर कई ऐसे आरोप लगाए थे जिनका कोई सिर-पैर नहीं है। सियासी फायदा पाने की नीयत से केजरीवाल ने आरोप तो लगा दिए, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि जेटली बदले में उन पर मानहानि का दावा भी ठोंक देंगे। यह मामला कोर्ट में चल रहा है और इसमें अपनी पैरवी के लिए केजरीवाल ने देश के सबसे महंगे वकील राम जेठमलानी को चुना। जेठमलानी अब तक की सुनवाई में केजरीवाल के लिए दलीलें देते रहे हैं। इस दौरान एक आदेश के जरिए वकील के 3.86 करोड़ रुपये के बिल का भुगतान सरकारी खजाने से कराने की कोशिश की गई। फिलहाल उपराज्यपाल ने इस मामले पर कानूनी राय मांगी है। दरअसल ये इकलौता मामला नहीं है। बीते सवा दो साल में अरविंद केजरीवाल और उनके नेताओं ने जिस तरह से सरकारी सुविधाओं पर ऐश की वो भी हैरानी में डालने वाला है। एक नज़र ऐसे ही कुछ मामलों पर:

1. पब्लिक के पैसे पर मसाज

अरविंद केजरीवाल सीएम बनने के बाद से हर साल 10-15 दिन बैंगलोर के जिंदल नेचर केयर इंस्टीट्यूट में रहते हैं। बहाना होता है कि वहां पर वो खांसी और ब्लडप्रेशर का इलाज कराने गए हैं। जबकि इन दोनों बीमारियों के लिए बेहतरीन नेचुरोपैथी अस्पताल दिल्ली में भी हैं। बताया जाता है कि केजरीवाल सिर्फ मसाज कराने और आराम के मकसद से वहां जाते हैं। पिछले महीने भी केजरीवाल 10 दिन के लिए वहां गए थे। जब लौटकर आए तो बीजेपी ने आरोप लगाया था कि वहां उनका 33 लाख रुपये का बिल आया, जिसका भुगतान सरकार के पैसे से कराया गया। अभी ये कहानी सिर्फ केजरीवाल की है। दिल्ली सरकार के कुछ और मंत्री भी इसी तरह से अलग-अलग सुविधाओं के भरपूर इस्तेमाल में जुटे हुए हैं।

2. सरकारी पैसे पर विदेश यात्रा

पिछले साल अगस्त, सितंबर में जब पूरी दिल्ली में डेंगू और चिकुनगुनिया जैसी महामारियां फैली हुई थीं, तब पता चला कि एक मंत्री को छोड़ बाकी सारे विदेश में हैं। सिर्फ मंत्री ही नहीं आम आदमी पार्टी के कुछ विधायक भी सरकारी पैसे पर सैर-सपाटे में जुटे थे। तब यह सवाल उठा कि दिल्ली जैसे राज्य के मंत्री को विदेश जाने की जरूरत ही क्या है? पाया गया कि ज्यादातर मंत्री विदेशों में टूरिस्ट स्पॉट्स पर ही गए। आम तौर पर ऐसी यात्राएं सरकारी कार्यक्रमों के लिए होती है, लेकिन केजरीवाल के मंत्री निजी कार्यक्रमों के लिए विदेश घूमते रहे। सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया और आशीष खेतान विदेशों में मस्ती के सबसे ज्यादा शौकीन हैं। ये सारा सपाटा जनता के पैसे पर हो रही है।

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3. रिश्तेदारों को सरकारी मलाई

केजरीवाल कभी भाई-भतीजावाद के खिलाफ बोला करते थे। लेकिन बीते सवा दो साल में उनकी सरकार पर रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के जितने आरोप लगे उतने किसी पर नहीं लगे। केजरीवाल ने अपनी साली के दामाद निकुंज अग्रवाल को स्वास्थ्य मंत्री का ओएसडी बनाया था। इस दामाद ने भी सरकारी पैसे पर विदेशों की सैर की और बिना कोई काम किए सरकार से मोटी तनख्वाह उठाई। इसी तरह सत्येंद्र जैन ने अपनी बेटी सौम्या को मोहल्ला क्लीनिक का एडवाइजर बनाया था। जब बात मीडिया में आई और बवाल हुआ तो उसे हटाना पड़ा। मनीष सिसोदिया पर अपने साले को सरकारी ठेका दिलाने का आरोप है। ये तो बड़े नेताओं की कहानी है। बाकी छोटे मंत्रियों और विधायकों का भी यही हाल है। सबने तमाम सरकारी कमेटियों वगैरह में ज्यादातर अपने रिश्तेदारों को सेट करवा रखा है। ज्यादातर विधायक और मंत्री अपने मां-बाप के ऑपरेशन वगैरह महंगे प्राइवेट अस्पतालों में करवाकर सरकार से बिल चुकता करवाते हैं। बताते हैं कि खुद केजरीवाल ने अपने पिता का ओपन हार्ट सर्जरी अपोलो अस्पताल में कराया, जबकि ये काम एम्स से लेकर दिल्ली के किसी भी सरकारी अस्पताल से काफी कम दाम में कराया जा सकता था।

4. 12 हजार प्रति प्लेट की दावत

सरकार की पहली सालगिरह पर केजरीवाल ने अपने बंगले के लॉन में एक शानदार पार्टी दी। इस पार्टी का मेन्यू ऐसा था कि टाटा, बिरला और अंबानी भी शरमा जाएं। 11 और 12 फरवरी को हुई इस पार्टी में केटरिंग का अरेंजमेंट सरकारी कंपनी दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DTTDC) को सौंपा गया था। DTTDC ने इस पार्टी के लिए दिल्ली के सबसे महंगे ताज पैलेस होटल को ठेका दिया। इस पार्टी में जो खाना परोसा गया वो करीब 12 हजार रुपये प्रति प्लेट पड़ता है। जबकि नियमों के मुताबिक ऐसी पार्टियों में प्रति प्लेट खर्च 2500 रुपये ही हो सकता है। साथ ही पार्टी पर कुल खर्च 4.5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए। DTTDC ने इस पार्टी के लिए दोगुने से भी ज्यादा 11.04 लाख का बिल दिया तो सरकार ने यह कहना शुरू कर दिया कि हमें डिस्काउंट दो। जिसके बाद पहले से ही बदहाल इस सरकारी कंपनी ने डिस्काउंट देते हुए बिल 9.9 लाख कर दिया।

5. फ्लाइट में बिजनेस क्लास

अरविंद केजरीवाल को अक्सर हवाई उड़ानों में बिजनेस क्लास में ही नजर आते हैं। केंद्र सरकार के बड़े-बड़े मंत्री किफायत के लिए जनरल क्लास में बैठना पसंद करते हैं, जबकि केजरीवाल के शौक का जवाब नहीं है। केजरीवाल की ही तरह उनकी पार्टी के कई और नेता भी बिजनेस क्लास में ही चलना पसंद करते हैं।

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