हमने इंसानियत के नाते शरण दी, वो जिहाद करने लगे!

केंद्र सरकार अब देश के लिए नासूर बनते जा रहे म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों का इलाज करेगी। अब तक अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी समझौतों की आड़ में बचते आए इन लोगों की हरकतों के कारण जगह-जगह समस्याएं पैदा हो रही हैं। यहां तक कि जम्मू और दिल्ली जैसी जगहों पर आतंकवादी और अपराधी गतिविधियों में रोहिंग्या मुसलमानों के नाम सामने आए हैं। म्यांमार में चल रही हिंसा के कारण भागकर आए लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को मानवीय आधार पर भारत ने शरण दे रखी है। इसका एहसानमंद होने के बजाय ये लोग भारत में ही जिहादी गतिविधियों में जुट गए। इस खतरे को भांपते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देशभर में फैल चुके रोहिंग्या मुसलमानों पर सख्ती का फैसला किया है। दिल्ली में हुई एक हाइलेवल मीटिंग में फैसला हुआ है कि रोहिंग्या मुसलमानों की पहचानकर उन्हें भारत से निकाला जाएगा। अभी भारत ने शरणार्थी का दर्जा देकर जितने रोहिंग्या मुसलमानों को जगह दी है, उससे कई गुना ज्यादा अवैध रूप से भारत में घुस चुके हैं। इन अवैध शरणार्थियों को निकाला जाना है। प्लान के मुताबिक अकेले जम्मू से 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान भगाए जाएंगे।

खतरा बने रोहिंग्या मुसलमान!

दरअसल बीते कुछ महीनों से जम्मू में हजारों की तादाद में अवैध रोहिंग्या मुसलमानों के बसने की रिपोर्ट्स आ रही थीं। गृह मंत्रालय के एक अफसर ने हमें बताया कि हालात पर केंद्र की लगातार नजर बनी हुई थी। यह जानकारी भी मिल रही थी कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस जैसी पार्टियों के कुछ नेता रोहिंग्या मुसलमानों को वहां बसाने में मदद कर रहे हैं। कई ने तो जम्मू में बाकायदा पक्के मकान भी बना लिए। एक आतंकी हमले और ढेरों छोटे-बड़े अपराधों में इस समुदाय के लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। कुछ वक्त पहले इस बारे में कोर्ट में भी जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दी अपनी अर्जी में लिखा है कि रोहिंग्या मुसलमानों के कारण जम्मू में अपराध बढ़ रहा है। शहर में आए दिन होने वाली चोरी और सेंधमारी की घटनाओं में इनका हाथ पाया गया है। शरणार्थी होने के बावजूद ये लोग तेजी से आबादी बढ़ाने में जुटे हैं।

बड़ी संख्या में अवैध शरणार्थी

जम्मू कश्मीर में 5700 से कुछ ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी रजिस्टर्ड हैं। लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा है। एक अनुमान के मुताबिक इनकी आबादी कम से कम 13 से 14 हजार के करीब है। देशभर में इनकी संख्या 40 हजार से ज्यादा हो चुकी है। दिल्ली के बदरपुर बॉर्डर के पास इनकी बाकायदा रिफ्यूजी कॉलोनी बसाई गई है। सुरक्षा एजेंसियों को यह बताने को कहा गया है कि सीमाओं के रास्ते ये लोग घुसपैठ करके कैसे पहुंचे। माना जाता है कि ज्यादातर रोहिंग्या म्यांमार से पहले बांग्लादेश में घुसपैठ करते हैं। जब वहां से उन्हें खदेड़ दिया गया तो वो भारत में घुस आए। भारत में आकर वो सीधे जम्मू पहुंचते हैं। ये जगह बांग्लादेश के बॉर्डर से काफी दूर है, लेकिन राजनीतिक शह के कारण वो जम्मू को ज्यादा पसंद करते हैं। रोहिंग्या के भारत आने के तीन ही रास्ते हैं। एक समुद्र के जरिये, दूसरा बांग्लादेश बॉर्डर से और तीसरा म्यांमार के रास्ते। ये तीनो रास्ते जम्मू कश्मीर से काफी दूर हैं। देश भर के शहरों में फैले रोहिंग्या अब राशन कार्ड और आधार कार्ड बनवाने के जुगत में हैं ताकि खुद को भारतीय बना सकें।

इन्हें लेने को कोई तैयार नहीं!

रोहिंग्या मुसलमानों के मानवाधिकारों को लेकर दुनिया भर में इस्लामी देश अभियान तो चला रहे हैं, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि खुद इस्लामी देश इनको अपने यहां जगह देने को तैयार नहीं हैं। बांग्लादेश में तो पुलिस ने बाकायदा इनके खिलाफ अभियान चला रखा है। इनके देश म्यांमार की सरकार ने तो पहले से ही इनके लिए दरवाजे बंद कर रखे हैं। इसका कारण ये है कि रोहिंगिया मुसलमान आदतन अपराधी होते हैं। छोटी-मोटी चोरियों से लेकर लूटमार और हत्या तक इनकी आदत होती है। मुसलमान होने के नाते इनके अंदर स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वो जहां भी होते हैं अपनी आबादी बहुत तेजी से बढ़ाते हैं। म्यांमार में इनकी इसी समस्याओं के कारण खदेड़ा जा रहा है। यह तय है कि मानवीय आधार पर रोहिंग्या को मदद का कोई फायदा नहीं है, आखिरकार इन्हें जिहाद ही करना है।

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