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नवरात्र के साथ ही दिल्ली में शुरू हुई बिजली कटौती

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार भी क्या यूपी की अखिलेश यादव सरकार के नक्शेकदम पर है? ये सवाल उठ रहा है नवरात्र की शुरुआत के साथ ही शुरू हुई सुबह-शाम की बिजली कटौती से। दिल्ली के ज्यादातर इलाकों, खास तौर पर मिडिल क्लास के इलाकों में रोज सुबह और शाम को अंधेरा होने के बाद नियम से बिजली गायब रह रही है। बिजली कटौती से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके पूर्वी, बाहरी और मध्य दिल्ली के हैं। कुछ जगहों पर तो रोज 5 से 8 घंटे बिजली गायब रह रही है। जिस तरह से नवरात्र की शुरुआत के साथ ही बिजली कटौती की भी शुरुआत हुई है, उसे देखते हुए लोगों को शक है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि अरविंद केजरीवाल भी खुद को सेकुलर साबित करने के लिए अखिलेश यादव के दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं। सोशल मीडिया पर अचानक शुरू हुई इस कटौती को लेकर खूब चर्चा है। वैसे बीते कुछ वक्त से दिल्ली में रिलायंस और टाटा की बिजली वितरण कंपनियों के लिए केजरीवाल की नरमी सबको चौंका रही है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि दोनों के बीच किसी तरह की साठगांठ हो चुकी है।

रमजान पर खुद निगरानी करते हैं केजरीवाल

यहां जानने वाली बात ये है कि रमजान के मौके पर बिजली सप्लाई की निगरानी खुद अरविंद केजरीवाल देखते हैं। पिछले साल उन्होंने बाकायदा सीएम दफ्तर में एक कंट्रोल रूम बनाया था, जिसके जरिए इस बात पर नजर रखी जाती थी कि रोजा और इफ्तार के टाइम किसी भी मुस्लिम इलाके में एक मिनट के लिए भी बिजली न जाए। यहां तक एक बार वो सीलमपुर इलाके में भी जा पहुंचे थे, जहां पर बिजली कटौती को लेकर उन्होंने बीएसईएस के अफसरों को धमकाया था। आम आदमी पार्टी ने तब केजरीवाल का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल कराया था, जिसमें वो बिजली कंपनी के सीईओ को यह धमकाते हुए देखे जा सकते हैं कि अगर रोजा और इफ्तार पर किसी मुस्लिम इलाके में बिजली कटौती हुई तो ठीक नहीं होगा। लेकिन नवरात्र में हो रही कटौती को लेकर केजरीवाल या उनकी सरकार बेपरवाह दिख रही है। पिछले साल भी नवरात्र पर बिजली सप्लाई की यही स्थिति थी।

बिजली कटौती की खबरें मीडिया में गायब

सबसे खास बात ये है कि दिल्ली में बड़े पैमाने पर बिजली गायब रहने के बावजूद मीडिया में कोई खास चर्चा नहीं है। ज्यादातर बड़े अखबारों और चैनलों पर आपको ये खबर नहीं मिलेगी। इसका बड़ा कारण शायद यह है कि दिल्ली में नगर निगम चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार ने सभी अखबारों में कई-कई पन्ने के विज्ञापन छपवाए थे। सभी मीडिया समूहों को ये इशारा पहले ही किया जा चुका है कि चुनाव के बाद विज्ञापनों की नई खेप उन्हें मिलने वाली है। ऐसे में यह तय है कि मीडिया को अभी दिल्ली में बिजली कटौती से लोगों की परेशानी नहीं दिखाई देगी। एक बड़े मीडिया समूह के एक पत्रकार ने हमें बताया कि फिलहाल दिल्ली में बिजली और पानी संकट की खबरें छापने पर रोक है। इसका सबसे बड़ा कारण दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी का चुनाव है। ऐसे में अप्रैल के बाद ही ये खबरें चैनलों और अखबारों में दिखेंगी। मेनस्ट्रीम मीडिया भले न दिखाए, लेकिन सोशल मीडिया पर दिल्ली की बिजली कटौती की खूब चर्चा है। कई लोग सीधे केजरीवाल को टैग करके शिकायत लिख रहे हैं।

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