क्या टुंडे कबाब खाए बिना मीडिया का पेट नहीं भरेगा?

लखनऊ में टुंडे कबाब की दुकान घंटे भर देरी से क्या खुली पूरी मीडिया के पेट में मरोड़ उठने लगे हैं। कल से ही चैनलों पर स्यापा चल रहा है। कमाल खान से लेकर पुण्य प्रसून वाजपेयी तक टुंडे कबाब के लिए मातम मना रहे हैं। दरअसल यूपी में अवैध बूचड़खानों पर पाबंदी के कारण भैंसे के मांस की सप्लाई में थोड़ी किल्लत आ गई है। इसके कारण बुधवार को टुंडे कबाब की दुकान करीब घंटा भर देरी से खुली, लेकिन कुछ अंग्रेजी वेबसाइटों और अखबारों ने खबर चला दी कि मांस की कमी के कारण टुंडे कबाब की दुकान बंद करनी पड़ी है। जबकि ये खबर सरासर गलत थी। चिकन और मटन के कबाब रोज की तरह मिलते रहे। सच्चाई सामने आने के बावजूद मीडिया ने अपना प्रोपोगेंडा बंद नहीं किया है। ऐसे जताया जा रहा है मानो टुंडे कबाब खाने को न मिलने के कारण उत्तर प्रदेश में कोई आफत आ गई हो। मीडिया के इस रवैये का सोशल मीडिया पर लोग जमकर मजाक भी उड़ा रहे हैं।

क्या है टुंडे कबाब का मामला?

दरअसल लखनऊ समेत यूपी के शहरों में गली-गली खुले अवैध बूचड़खाने बंद कर दिए गए हैं। इन बूचड़खानों में सस्ता असुरक्षित मांस बिका करता था। साथ ही इनके कारण पूरे इलाके में गंदगी और बदबू फैली रहती थी। राज्य सरकार की कार्रवाई के बाद टुंडे कबाब की दुकान में भैंसे के मांस की सप्लाई पर थोड़ा असर पड़ा। लेकिन मीडिया ने इसे देखते ही देखते राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। एनडीटीवी इंडिया और आजतक जैसे चैनलों पर आधे-आधे घंटे के कार्यक्रम इस विषय पर दिखाए गए। ऐसे जताया गया मानो टुंडे कबाब न मिलने के कारण कोई राष्ट्रीय आपदा आ गई है। रात भर चैनलों में खबर चलने के बाद तमाम हिंदी अखबारों ने भी बिना कुछ सोचे-समझे या जांच पड़ताल के खबर को उठा लिया। जबकि सच्चाई यह है कि अब दुकान खुल चुकी है और लोग आम दिनों की तरह ही कबाब खाने जा रहे हैं।

कबाब के मांस की पोल खुली

टुंडे के कबाब पर पहले भी शक जताया जाता रहा है कि उसको नरम बनाने के लिए बीफ का इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि कई लोग टुंडे के कबाब खाना पसंद नहीं करते। लेकिन मीडिया ने पिछले कुछ सालों में इस दुकान को इतनी पब्लिसिटी दिलाई कि लखनऊ जाने वाले सभी लोग बिना कुछ सोचे-समझे वहां कबाब खाने पहुंच जाते हैं। ताजा विवाद से इतना तो साफ हो गया है कि दुकान में अवैध कत्लखानों से घटिया किस्म का गोश्त मंगाया जाता था। हालांकि मीडिया इस सारे पहलू पर चुप्पी साधे हुए है। किसी अखबार या चैनल ने अभी तक ये मसला नहीं उठाया कि आखिर इतनी मशहूर दुकान के मालिक अवैध कत्लखानों से कच्चा माल क्यों खरीद रहे थे? ऐसा करना गैर-कानूनी भी है और इसके लिए दुकान के मालिकों को सजा भी हो सकती है।

मजाक का कारण बने चैनल

न्यूज चैनलों का ये बचकाना रवैया लोगों को पसंद नहीं आ रहा। फेसबुक और ट्विटर के जरिए लोगों ने टुंडे कबाब पर मीडिया कवरेज की जमकर खिल्ली उड़ाई। खास तौर पर बरखा दत्त का जमकर मजाक उड़ा, जिन्होंने बाकायदा ट्वीट करके दुकान बंद होने की बात फैलाई। देखिए सोशल मीडिया पर चल रही कबाब चर्चा की कुछ मिसाल:

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