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यूपी के बाद अब इस राज्य पर है आरएसएस की नज़र!

उत्तर प्रदेश में बीजेपी और आरएएस की बड़ी जीत के बाद ये सवाल उठ रहा है कि उसका अगला टारगेट क्या होगा? अगर आप सोचते हैं कि हम लोकसभा चुनाव की बात कर रहे हैं तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। इसलिए क्योंकि लोकसभा चुनाव में तो सिर्फ सत्ता बनाए रखने का संघर्ष होगा, लेकिन असली लड़ाई कहीं और ही है। कोयंबटूर में आरएसएस की बैठक में खुलकर कहा गया है कि बंगाल को बचाना जरूरी है। जिस तरह से बंगाल में हिंदुओं का दमन हो रहा है और मुसलमानों की आबादी बढ़ाकर उसे देश से अलग करने की साजिश पर काम चल रहा है बंगाल पर फौरन ध्यान देने की जरूरत है। इसके तहत आरएसएस आने वाले दिनों में देशभर में एक जनजागरण अभियान शुरू करने जा रही है। पश्चिम बंगाल देश के कुछ उन राज्यों में है जहां मुसलमानों की आबादी असामान्य तरीके से बढ़ रही है। स्थिति यह है कि कई मुस्लिम संगठन अलग इस्लामी देश की मांग भी करने लगे हैं।

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बेहद खतरनाक दौर में है बंगाल!

खुद केंद्र सरकार को मिले इनपुट्स के मुताबिक बंगाल की ममता सरकार कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत राज्य की संस्थाओं से लेकर शिक्षा व्यवस्था तक का इस्लामीकरण जारी है। मालदा के बाद धूलागढ़ और कालीग्राम जैसी जगहों पर हिंदुओं के गांवों पर हुए हमलों की खबरें मीडिया नहीं दिखाता। जिसके कारण लोगों को इनके बारे में ज्यादा कुछ पता भी नहीं है। पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में मुसलमानों की आबादी हिंदुओं से ज्यादा हो चुकी है। इन इलाकों में मुसलमानों को खुश करने के लिए ममता बनर्जी ने दुर्गा पूजा मनाने पर भी पाबंदी लगा रखी है। जाहिर है ये सब लक्षण बहुत बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रहे हैं। ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने के लिए बंगाल में इस्लामीकरण कर रही हैं और अब ये अलगाववाद का रूप लेता जा रहा है। इस्लामीकरण की नीति के ही तहत ममता बनर्जी सरकार ने हाल ही में आरएसएस के 125 स्कूलों को बंद करने का नोटिस दिया है। इसका बंगाल में बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है।

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इतनी आसान नहीं बंगाल की राह

आरएसएस का पूरा जोर बंगाल के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में अपना नेटवर्क बढ़ाने पर है। लेकिन बंगाल में काम करना इतना आसान भी नहीं है। पिछले कुछ वक्त में हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े लोगों पर हमलों और उन्हें फर्जी मामलों में फंसाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इतना सालों के वामपंथी शासन ने लोगों में राष्ट्रवाद की भावना लगभग खत्म कर दी है। यही कारण है कि बंगाल में अब तक बीजेपी को कुछ खास कामयाबी नहीं मिली। लेकिन जिस तरह से अब ममता बनर्जी ने इस्लामीकरण शुरू किया है उससे लोगों के अंदर सेकुलरिज्म का बुखार उतर रहा है। बंगाल में रहने वाली बड़ी हिंदू आबादी को लगने लगा है कि सेकुलरिज्म के नाम पर बंगाल को इस्लामी देश बनाने की तैयारी चल रही है। जिसके बाद लोगों में बीजेपी और आरएसएस के लिए लगाव बढ़ा है।

बंगाल में मजबूत हो रहा है हिंदुत्व

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार बंगाल से कोई सीट जीती। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को अच्छा खासा वोट मिला है। चुनाव से पहले कोलकाता में हुए ओवरब्रिज हादसे में पुलिस से भी पहले आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू कर दिया था। ऐसी तमाम छोटी-बड़ी कोशिशों के कारण लोगों में संघ को लेकर भरा जहर धीरे-धीरे बेअसर हो रहा है। पिछले दिनों कोलकाता में आरएसएस की एक रैली हुई थी, जिसमें खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हिस्सा लिया था। बंगाल सरकार ने रैली की इजाजत नहीं दी थी, लेकिन हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद ये रैली हुई। इस रैली में जिस बड़ी संख्या में लोगों ने शिकरत की उससे बंगाल सरकार के पसीने छूट गए थे। आरएसएस को लगता है कि राज्य में उसकी बुनियाद तैयार है और अब उसे जमीन पर मेहनत करने की जरूरत है। ताकि 2019 के लोकसभा चुनाव तक राज्य में ममता बनर्जी और लेफ्ट दोनों की जड़ें पूरी तरह से हिला दी जाएं। (सिद्धार्थ)

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