यूपी की वो टॉप-5 खबरें जो अब मीडिया दिखाएगा

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अभी ढंग से काम शुरू भी नहीं किया है कि उसे लेकर मीडिया में प्रोपोगेंडा शुरू हो चुका है। अवैध कत्लखाने बंद होने को मुसलमान विरोधी बताया जा रहा है। जबकि दूसरी जगहों पर यही काम पर्यावरण और स्वच्छता का काम माना जाता है। मुख्यमंत्री आवास में गृह प्रवेश की पूजा को चैनलों और अखबारों ने “शुद्धीकरण” करार दिया, जबकि हिंदू धर्म में किसी भी नए घर में जाने पर गृह प्रवेश के लिए जो पूजा होती है वही की गई। उन चैनलों ने भी इसे शुद्धीकरण बताया, जो नोएडा फिल्म सिटी में अपने दफ्तर में भूतों को भगाने के लिए हवन करवा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में बीजेपी को हराने के लिए एकजुट हुए तमाम पत्रकार पहले ही बीजेपी की भारी जीत से तिलमिलाए हुए थे, ऊपर से योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया जाना उन्हें हजम नहीं हो रहा है। इन पत्रकारों के शुरुआती लक्षणों को देखते हुए हमने यूपी के बारे में उन 5 खबरों का अनुमान लगाया है जो आने वाले दिनों में मीडिया में छाई रहने वाली हैं।

1. सरकार के हर कदम में सांप्रदायिकता

आने वाले दिनों में सरकार के हर कदम में मीडिया सांप्रदायिकता सूंघा करेगी। मिसाल के तौर पर कहीं मच्छर मारने के लिए दवा का छिड़काव हुआ तो उसे भी हवन का धुआं बताया जा सकता है। बीजेपी सरकार ने अगर छात्रों को लैपटॉप बांटा और उन लैपटॉप का RAM पिछली सरकार से ज्यादा हुआ तो इसे भी भगवाकरण की कोशिश माना जा सकता है। योगी आदित्यनाथ या उनके किसी मंत्री के मुंह से राम शब्द भी निकल गया तो मीडिया उसे लपक लेगी और साबित कर देगी कि सरकार हिंदुत्व का एजेंडा बढ़ा रही है। सरकार के जिन फैसलों में सांप्रदायिकता का एंगल नहीं निकलेगा उन्हें मीडिया नहीं दिखाएगा। खास तौर पर अगर वो फैसला जनता की भलाई का होगा तो ऐसी खबरें मीडिया में मिलना लगभग नामुमकिन होगा।

2. उत्तर प्रदेश में हर तरफ हाहाकार होगा

जल्द ही मीडिया के जरिए आपको ये खबरें मिलने लगेंगी कि यूपी में चौतरफा हाहाकार मचा हुआ है। हर तरफ अराजकता फैल गई है। अपराध दर जो अब तक बहुत कम थी, अचानक कई गुना बढ़ गई है। यह भी हो सकता है कि कहीं क्रिकेट के दौरान बॉलिंग करने वाले बच्चों को वीएचपी या बजरंग दल का मेंबर बता दिया जाए और कहा जाए कि वो दरअसर गेंद नहीं फेंक रहे, बल्कि पथराव की ट्रेनिंग ले रहे हैं। गली-मोहल्ले की औरतों के झगड़े भी हो सकता है कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे के तौर पर अखबारों में हेडलाइन बनें।

3. दलितों, मुसलमानों पर अत्याचार बढ़ेगा

मीडिया का ये पुराना खेल है कि जहां भी बीजेपी की सरकार हो वहां दलितों और अल्पसंख्यकों को पीड़ित और परेशान दिखाया जाता है। उनके बीच आपस में होने वाले विवाद भी राष्ट्रीय सुर्खियों में आ सकते हैं। मिसाल के तौर पर दो मुसलमानों के बीच पार्किंग को लेकर झगड़ा हो जाए और एक का कत्ल हो जाए तो मीडिया इसे मुसलमान पर अत्याचार का मामला बना देगा। इस खबर में बड़ी सफाई से ‘पार्किंग के झगड़े’ और मारने वाले मुसलमान के नाम को हटा दिया जाएगा। इसी तरह कहीं दलित समुदाय के व्यक्ति के साथ कुछ अनहोनी हो जाए तो खबर होगी कि दलित की हत्या, ताकि ऐसा लगे कि हत्या करने वाले ऊंची जाति के लोग हैं। हो सकता है कि यूपी में ‘असहिष्णुता पार्ट-2’ रिलीज की जाए।

4. यूपी में सांप्रदायिक दंगे अचानक बढ़ेंगे

उत्तर प्रदेश में बीते पांच साल में हजारों दंगे हुए, लेकिन चैनल और अखबार उसे दबा गए। अब से हर दंगे को मीडिया में लाइव दिखाया जाएगा। इस पूरे खेल में यह ध्यान रखा जाएगा कि अगर कहीं मुसलमान दंगा-फसाद करते हैं तो या तो वो खबर दिखाई ही नहीं जाएगी और दिखाई गई तो सिर्फ इतना बताया जाएगा कि ‘दो गुटों के बीच झगड़ा’ हो गया। अगर ज्यादा दंगे नहीं हुए तो भी माहौल ऐसा बनाया जाएगा ताकि लगे कि हर तरफ मारकाट मची हुई है।

5. यूपी में भ्रष्टाचार बढ़ने वाला है

मीडिया अब उत्तर प्रदेश में किसी तरह का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेगा। यहां तक कि किसी समर्थक ने नेता को एक पैकेट मिठाई भी दे दी तो इसे घोटाला माना जा सकता है। हर मंत्री और विधायक के घर की शादियों पर मीडिया की नजर रहेगी और उसे “शाही शादी” बताया जाएगा। इन शादियों में दहेज की लेन-देन के बारे में सूत्रों के हवाले से खबरें भी देखने को मिल सकती हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ये है कि अखिलेश सरकार के दौरान पत्रकारों को मिल रही सुख-सुविधाओं में कटौती होने वाली है। अगर योगी सरकार ने भी मीडिया को खिलाने-पिलाने पर जोर बनाए रखा तो यह मुद्दा ज्यादा तूल नहीं पकड़ेगा।

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