भगोड़े भैयाजी के नाम रवीश कुमार का खुला पत्र

एनडीटीवी के कथित पत्रकार रवीश कुमार के भाई ब्रजेश कुमार पांडेय का बिहार पुलिस अब तक पता नहीं लगा पाई है। बिहार कांग्रेस का उपाध्यक्ष रहा ब्रजेश पांडेय सेक्स रैकेट के मामले में नाम सामने आने के बाद से फरार है। एक नाबालिग दलित लड़की ने रवीश के भाई और उसके साथी निखिल प्रियदर्शी पर हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाया था। निखिल प्रियदर्शी को कुछ दिन पहले उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि रवीश कुमार का भाई ब्रजेश किसी शातिर अपराधी की तरह अब तक पुलिस की पकड़ से दूर है। ये मामला किसी दूसरे अपराधी से जुड़ा होता तो रवीश कुमार अब तक इस पर कई प्रोग्राम बना चुके होते और सोशल मीडिया पर उसके नाम एक खुली चिट्ठी जारी कर चुके होते। शायद यूपी की हार के सदमे के कारण वो ऐसा करने का वक्त न निकाल पाए हों, लिहाजा न्यूज़लूज़ पर हम उनकी तरफ से एक ओपन लेटर जारी कर रहे हैं।

प्रिय बिरजेस भैया,

सादर चरण स्पर्श। उम्मीद है आप जहां भी होंगे प्रसन्न होंगे। आप जहां कहीं भी हो अगर मन करे तो लौट आओ। हम लोग आपको कुछ नहीं कहेंगे। हम नीतीश-लालू से सेटिंग कर लिए हैं। बिहार पुलिस भी आपको कुछ नहीं कहेगी। अब खुद ही देख लीजिए न। फेसबुक और ट्विटर पर बीजेपीवाला सब चिल्लाता रह गया। हम अपने चैनल पर आपका 10 सेकेंड का खबर भी नहीं चलने दिए। जहां तक हो सका दूसरे सब चैनल पर भी खबर दबवा दिए। लेकिन सब पत्रकार लोग हमारे तरह दलितों और कमजोर लोगों के हितैषी नहीं हैं न। कुछ बदमाश सब फिर भी थोड़ा-बहुत खबर चला दिया। खबर तो चलाया ही ये भी बताने लग गए कि लड़की कौन जात है और हम कौन जात। हम ऊ सबको देख लेंगे। आप बिल्कुल भी चिंता मत करना। अब देखिए न… एक ठो चैनल वाला तो ऊ बदमाश लड़की का लाइव भी कर दिया था। बहुत अंट-शंट बोल रही थी। कह रही थी कि हमको डराया-धमाका जा रहा है और जान से मारने की धमकी दी जा रही है। अरे हां… याद आया इस बीच हम अपने चैनल पर प्राइम टाइम किए कि “कौन डरता है लड़कियों के बोलने पर”। बहुत रिस्पॉन्स आया है। आप तो फरारी काट रहे हैं पता नहीं टीवी देख पाते भी होंगे कि नहीं।

प्रिय भैया भगवान की दया से मीडिया में आपके भाई का सम्मान बहुत है। भक्त के मामले में लोग मोदी-मोदी करता है। लेकिन हमारा भक्त लोग भी कम नहीं है। हमारा भक्त सब सोशल मीडिया पर सबका मां-बहिन करता रहता है, फिर भी हमारा हाई मॉरल ग्राउंड हमेशा टॉप फ्लोर पर ही रहता है। अब देखिए न जब आप पर संकट आया तो कई दोस्त-मित्र लोग सोशल मीडिया पर फैला दिया कि हमारा तो कोई भाई ही नहीं है। कुछ बोलने लगा कि बड़े भाई के बिजनेस से छोटा भाई का क्या लेना-देना। अब यही सब सम्मान है न हम जो दिल्ली आके इतने साल में बटोरे हैं। इसलिए भरोसा रखिए जब आप बाहर आएंगे तो हम आपको बिहार एससी-एसटी आयोग या बाल अधिकार आयोग में सेट करा देंगे। वहां पर आपका मन भी लग जाएगा।

मालूम हो कि आपके दोस्त निखिल भैया भी पकड़ा गए हैं। उत्तराखंड में मजा ले रहे थे। उसके पास ऑडी कार भी मिला है। हमको तो देखकर टेंशन आ गया। बिजनेस चलता रहे तो आपका ऑडी भी जल्दी आ जाएगा। इसलिए जल्दी से लौट आइए और फिर से धंधा संभाल लीजिए। अब आपको तो पता ही है कि अपना क्लाइंट कोई छोटा-मोटा लोग है नहीं। जहां पता चलेगा कि बिहार के बड़े-बड़े मंत्री, अफसर और पत्रकार लोग आपका सर्विस ले रहे थे मामला खुदे ठप हो जाएगा। डरने का कौनो जरूरत नहीं है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस मामला को रफा-दफा करना ही पड़ेगा। बाकी आपको तो पता ही है कि एनडीटीवी पर हम सच दिखाते हैं।

इस बीच हम फिर से किसान समस्या पर फोकस बढ़ा दिए हैं। आपको तो पता ही है कि जब-जब संकट होता है हमको किसान लोग ही बचाते हैं। जब सोनिया जी को बीजेपी वाला सब हेलीकॉप्टर घोटाला में फंसा दिया था, तब भी हम किसान समस्या दिखाने बुलंदशहर चले गए थे। अब जब से आपका मामला आया है हम फिर से किसान-किसान करने लगे हैं। लेकिन ई किसान सब भी एक नंबर का मक्कार हो गया है। नोटबंदी के टाइम ई सब हमको देखते ही मोदी-मोदी करने लगता था। यूपी चुनाव में हम अखिलेश सरकार के बजाय मोदी के काम पर सवाल पूछते रहे फिर भी गदहा सब कमल के फूल पर वोट छाप आया।

खैर, बाकी सब बात मिलने पर होता रहेगा। इस ओपन लेटर को तार समझिएगा। अभी जहां हैं वहां से बोर हो गए हों तो लौट आइएगा। बस इतना समझ लीजिए कि बागों में बहार है, बिहार में अपनी सरकार है। अउर हां, कोई पूछे तो ये जरूर बोलिएगा कि हमको कानून पर पूरा भरोसा है और दलितों, महिलाओं और शोषितों के लिए काम करता रहूंगा। बाकी सब हम देख लेंगे।

आपका क्रांतिकारी भाई

रवीश कुमार

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