दिल्ली का ये शिव मंदिर बिकाऊ है, सेकुलरों खरीदोगे?

पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर इलाके में एक मंदिर बिकाऊ है। यहां घड़ोली एक्सटेंशन इलाके में अब तक दलितों की अच्छी-खासी आबादी रहा करती थी। पूरे इलाके में यही एक मंदिर था, जहां पर लोग पूजा करने के लिए आया करते थे। लेकिन बीते कुछ साल में यहां पर शांतिदूतों की आबादी में भारी बढ़ोतरी हुई है। अब ये स्थिति है कि बस्ती में रहने वाले दलित हिंदुओं को परेशान किया जा रहा है। रोज-रोज होने वाली घटनाओं से परेशान होकर यहां रहने वाले कई लोग दूसरे इलाकों में जा चुके हैं। घनी शांतिदूत आबादी के बीच में ये एक इकलौता ओम शिव मंदिर बचा था। लेकिन बीते कुछ महीने से इलाके के सेकुलर शांतिदूतों ने मंदिर के दरवाजे पर सड़े-गले मांस के टुकड़े फेंकने शुरू कर दिए। यहां तक कि मंदिर की बुजुर्ग साध्वी शकुंतला देवी पर तेजाब से हमले की भी कोशिश हुई। यहां आपको यह भी बता दें कि इस पूरे इलाके में दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी की अच्छी-खासी पैठ है। राजनीतिक शह के कारण भी शांतिदूतों के हौसले बुलंद हैं। उधर पुलिस भी इलाके में इलाके के हिंदुओं की मदद से बचती रही है। परेशान होकर साध्वी शकुंतला ने मंदिर को बेचने का फैसला किया है।

भारत की राजधानी है या बांग्लादेश?

दिल्ली के इस इलाके के हालात बांग्लादेश के जैसे हो चुके हैं। मंदिर की संचालिका साध्वी शकुंतला देवी ने कुछ दिन पहले दान-दक्षिणा से मिले पैसों से यहां पर सीसीटीवी कैमरा लगवा दिया था। लेकिन स्थानीय शांतिदूत समुदाय ने इसे भी पत्थरों से मार-मारकर तोड़ डाला। डरी-सहमी साध्वी शकुंतला कई दिन तक मंदिर से बाहर भी नहीं निकल पाईं। मोबाइल फोन का पैसा खत्म होने के कारण वो बाहर किसी से फोन करके मदद भी नहीं मांग सकीं। करीब तीन दिन तक वो और मंदिर की गाय भूखी-प्यासी बंद रहीं। किसी तरह पुलिस को पता चला तब जाकर उन्हें बाहर निकाला गया। इसी महीने 7 मार्च को जाटव हिंदू समुदाय के लोग मंदिर में पूजा करने पहुंचे तो शांतिदूतों ने उन पर भी पथराव किया था। लेकिन पुलिस ने मामला दबा दिया।

हरिजन बस्ती बन गई मुल्ला कॉलोनी

मीडिया से बातचीत में साध्वी शकुंतला ने बताया कि वो घड़ौली एक्सटेंशन की इस हरिजन बस्ती में करीब 25 साल से अकेले रह रही हैं। शुरू में वो यहां गोशाला भी चलाती थीं। पहले यहां हिंदुओं के लिए कोई मंदिर नहीं था। स्थानीय लोगों के कहने पर उन्होंने अपने मकान के ग्राउंड फ्लोर पर ही सदाशिव मंदिर की स्थापना कर दी। तब से इतने साल तक ये मंदिर पूरे इलाके के लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। लेकिन अब शांतिदूतों के आतंक के चलते उन्हें इसे बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। 80 के दशक में यहां पर दलितों को प्लॉट अलॉट किए गए थे। लेकिन बाद में इस इलाके में शांतिदूतों ने पैठ बढ़ा ली। उन्होंने इस इलाके का नाम बदल कर मुल्ला कॉलोनी कर दिया। हालांकि कागजों में अब भी यह हरिजन बस्ती ही है।

शांतिदूतों से डरती है दिल्ली पुलिस!

इलाके के एक हिंदू परिवार ने हमें बताया कि जब भी शांतिदूतों की गुंडागर्दी की शिकायत करने लोग गाजीपुर थाने में जाते हैं, पुलिस उन्हें डांटकर भगा देती है। साध्वी शकुंतला की शिकायत पुलिस ने ले ली, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं की। यहां तक कि उन्हें सुरक्षा तक मुहैया नहीं कराई गई। लोगों का आरोप है कि यहां शांतिदूतों की आबादी में बड़ी संख्या बांग्लादेशियों की है। इसके अलावा इलाके में तमाम तरह के अवैध धंधे चलते हैं। इन सबसे गाजीपुर पुलिस थाने में मोटी रकम हर महीने पहुंचती है। लिहाजा पुलिस इलाके के हिंदुओं की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करती और मामला दबाने में जुटी रहती है।

एक अपील: देश और हिंदुओं के खिलाफ पत्रकारिता के इस दौर में न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

comments

Tags: , ,