देश में हिंदू आबादी 40 साल में 3 फीसदी कम हो गई

सरकार ने लोकसभा में औपचारिक तौर पर माना है कि देश में धार्मिक आधार पर जनसंख्या का अनुपात बिगड़ रहा है। बीते 40 साल में आबादी में हिंदुओं का हिस्सा कम हो रहा है, जबकि बाकी धर्मों का प्रतिशत बढ़ रहा है। गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने लोकसभा में ये जानकारी दी है। इसके मुताबिक 1971 की जनगणना में हिंदुओं की आबादी 45.33 करोड़ थी, जो 2011 में बढ़कर 96.22 करोड़ हो गई। लेकिन देश की कुल आबादी में हिंदुओं का अनुपात लगातार कम होता जा रहा है। ये एक तरह से खतरे की घंटी है, क्योंकि मुसलमान और ईसाई लगातार धर्मांतरण और दूसरे तरीकों से अपनी आबादी भारत में बढ़ाने में जुटे हैं। मुसलमान भारत को इस्लामी मुल्क बनाने का सपना देखते हैं और ईसाइयों की कोशिश है कि एक दिन भारत की पहचान ईसाई देश के दौर पर हो। हिंदुओं के घटने और मुसलमानों के बढ़ने का ये ट्रेंड बीते 10 साल में सबसे तेजी से बढ़ा है और आशंका है कि जब 2021 में अगली जनगणना होगी तो हालात और भी ज्यादा बिगड़ चुके होंगे।

संख्या बढ़ी, लेकिन अनुपात कम

आंकड़ों को देखें तो ऐसा लगता है कि देश में हिंदुओं की आबादी बढ़ रही है, लेकिन हिंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी की ये दर मुसलमानों और ईसाइयों के अनुपात में कुछ भी नहीं है। सीएजी के धार्मिक जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक 1971 में हिंदुओं का अनुपात 82.7 फीसदी था, जो 2011 में कम होकर 79.8 फीसदी रह गया है। ये गिरावट लगातार जारी रही है। 1981 की जनगणना में हिंदुओं की आबादी घटकर 82.6 फीसदी रह गई थी। 1991 में ये अनुपात 82 फीसदी पर आ गया। 2001 में हिंदू 80.5 फीसदी हो गए और 2011 में हुई आखिरी जनगणना में आबादी का ये संतुलन 80 फीसदी से भी कम यानी 79.8 हो गया। जबकि इन्हीं 40 साल में मुसलमानों की आबादी का अनुपात 11.21 फीसदी (1971) से करीब 3 फीसदी बढ़कर 14.2 फीसदी हो चुकी है।

हिंदू कम हुए, मुसलमान बढ़ रहे हैं

2015 में जारी आंकड़ों के मुताबिक भी 2001 से 2011 के बीच 10 साल के दौरान देश में मुसलमानों की आबादी 0.8 फीसदी बढ़ गई। इस दौरान देश में मुसलमान 13.8 करोड़ से बढ़कर 17.22 करोड़ हो गए। जबकि इसी दौरान हिंदुओं का अनुपात 0.7 प्रतिशत कम हुआ और ये 96.63 करोड़ रह गया। फिलहाल देश में हिंदू जनसंख्या 96.63 करोड़ (79.8 फीसदी), मुस्लिम आबादी 17.22 करोड़ (14.2 फीसदी), ईसाई 2.78 करोड़ (2.3 फीसदी), सिख 2.08 करोड़ (1.7 फीसदी), बौद्ध 0.84 करोड़ (0.7 फीसदी), जैन 0.45 करोड़ (0.4 फीसदी) और अन्य धर्म और मत 0.79 करोड़ (0.7 फीसदी) हैं।

पहले भी उठा है आबादी का सवाल

अक्सर यह कहा जाता रहा है कि देश में हिंदुओं की आबादी घट रही है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी 13 फरवरी को कहा था कि भारत में हिंदू आबादी कम हो रही है क्योंकि वे कभी लोगों का धर्म परिवर्तन नहीं कराते। रिजिजू ने यह भी कहा था कि भारत दुनिया के कुछ इकलौते देशों में है जहां बहुसंख्यकों के मुकाबले अल्पसंख्यक आबादी फलफूल रही है। रिजिजू ने ये बयान अरुणाचल कांग्रेस के उस आरोप के जवाब में दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी अरुणाचल प्रदेश को हिंदू राज्य बनाने की कोशिश कर रही है।

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