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मोदी की तस्वीर के लिए कब माफी मांगेंगे केजरीवाल?

अपने विज्ञापनों में बिना अनुमति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल करने के लिए रिलायंस और पेटीएम को लिखित माफी मांगनी पड़ी है। पिछले दिनों जब ये विज्ञापन छपे थे तब इस को लेकर भारी हो-हल्ला मचा था। मीडिया से अपनी करीबी के चलते इसमें सबसे मुखर आवाज थी अरविंद केजरीवाल की। हमेशा की तरह इस मामले को भी व्यक्तिगत बनाते हुए उन्होंने इस घटना के प्रधानमंत्री मोदी को ही दोषी ठहराया और प्रधानमंत्री को रिलायंस और पेटीएम का दलाल होने जैसे घटिया शब्दों का प्रयोग गया। लेकिन कम लोगों को याद होगा कि रिलायंस और पेटीएम से भी पहले आम आदमी पार्टी अपने विज्ञापन के लिए मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल कर चुकी है, लेकिन उसके लिए केजरीवाल ने आज तक माफी नहीं मांगी। सवाल ये उठ रहा है कि देश के प्रधानमंत्री की तस्वीर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने पर अगर रिलायंस और पेटीएम जैसी कंपनियों को माफी मांगनी पड़ गई तो आखिर आम आदमी पार्टी ने अब तक माफी क्यों नहीं मांगी? देखा जाए तो ये राजनीतिक तौर पर ठगी का भी मामला है क्योंकि मोदी दूसरी पार्टी के नेता हैं और उनकी तस्वीर के जरिए वोट मांगना एक तरह की धोखाधड़ी है।

आम आदमी पार्टी के विज्ञापन में मोदी!

प्रधानमंत्री की तस्वीर का दुरुपयोग प्राइवेट कंपनियों के दिमाग की उपज नहीं था। सच तो यह है कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता का लाभ उठाने की पहली कोशिश खुद अरविंद केजरीवाल ने की थी। 2014 लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद केजरीवाल जब दिल्ली वापस लौटे तो उन्हें मोदी की लोकप्रियता का एहसास हो चुका था। दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने वाले थे, लिहाजा केजरीवाल ने ये प्रचार शुरू कर दिया कि पीएम मोदी खुद तो दिल्ली के सीएम बनेंगे नहीं, इसलिए मोदी जैसी विश्वसनीयता के लिए लोग केजरीवाल को चुनें। इसके लिए बाकायदा सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया गया जिसमें कहा गया कि- ‘Modi for PM, Arvind for CM’ यानी पीएम पद के लिए मोदी और सीएम पद के लिए अरविंद केजरीवाल।  सिर्फ सोशल मीडिया कैंपेन ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी केजरीवाल के साथ मोदी की तस्वीर डाल दी गई।

वैसे दूसरों की प्रतिष्ठा के सहारे खुद को आगे बढ़ाने में अरविंद केजरीवाल का कोई तोड़ नहीं। चाहे वो अन्ना हज़ारे, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव हों या खुद प्रधानमंत्री मोदी का नाम। आम आदमी पार्टी के इस पैंतरे का असर ये हुआ कि लोगों ने केजरीवाल को नरेंद्र मोदी से जुड़ा हुआ समझा और विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को भारी वोटों से जिता दिया।

केजरीवाल ने कभी माफी नहीं मांगी

अब जब रिलायंस और पेटीएम ने बिना अनुमति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चित्र इस्तेमाल करने के लिए सरकार से माफ़ी मांग ली है, क्या यही सवाल केजरीवाल से नहीं किया जाना चाहिए? यह सवाल केजरीवाल से पूछना और भी जरूरी इसलिए है क्यूंकि जो प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा का दुरुपयोग उन्होंने खुद धड़ल्ले से किया था वही जब दूसरों ने किया तो उन्होंने बेशर्मी से उसका दोष भी प्रधानमंत्री पर ही डाल दिया। केजरीवाल के लाखों रुपये के विज्ञापन के चक्कर में अखबार और चैनल भी ये सवाल कभी नहीं पूछते हैं।

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