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26/11 के आतंकी कसाब को फांसी की बात झूठ थी?

मुंबई हमले में पकड़े गए इकलौते आतंकी अजमल कसाब की फांसी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि कसाब को दरअसल कभी फांसी हुई ही नहीं। 21 नवंबर 2012 को सुबह-सुबह खबर आई थी कि कसाब को पुणे की येरवडा जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया है। हालांकि सरकार की तरफ से फांसी की इससे ज्यादा कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। अब जो दावा किया जा रहा है उसके मुताबिक कसाब की मौत फांसी के अलावा किसी दूसरी वजह से हुई थी। ये दावे मुंबई की आर्थर रोड जेल के ही कुछ कर्मचारियों के हवाले से सामने आ रहे हैं। कुछ न्यूज वेबसाइट्स ने इस बारे में रिपोर्ट्स भी पब्लिश की हैं।

फांसी पर शक की क्या है वजह?

यहां एक सवाल उठता है कि कांग्रेस सरकार के वक्त में कसाब के लिए मुंबई की आर्थर रोड जेल में इतने सारे इंतजाम किए गए थे। उसे रखने के लिए एक अलग सेल तक बनाई गई थी। इस सब पर करोड़ों रुपये खर्च भी हुए थे। इसके लिए यूपीए सरकार की काफी आलोचना भी हो रही थी कि वो एक आतंकवादी की सुरक्षा पर जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये फूंक रही है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार ने अचानक उसे सबसे पहले सजा-ए-मौत देने का मन बना लिया? कसाब को बेहद आनन-फानन में मुंबई की आर्थर रोड जेल से पुणे की येरवडा जेल भेजने का फैसला हुआ था। ये सबकुछ बेहद खुफिया तरीके से हुआ। सरकार ने कहा कि मुंबई में जल्लाद न होने के कारण उसे फांसी देने के लिए पुणे की जेल भेजा गया। लेकिन ये तर्क गले नहीं उतरता, क्योंकि अगर ऐसा ही था तो जल्लाद को पुणे से मुंबई भी तो बुलाया जा सकता था। क्योंकि एक आतंकवादी को फांसी के लिए मुंबई से पुणे ले जाना भी कम जोखिम का काम नहीं था।

‘फांसी से नहीं डेंगू से मरा कसाब’

दावा है कि मुंबई की जेल में बंद कसाब को डेंगू हो गया था। उसके इलाज में कुछ लापरवाही हुई और उसकी तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई। तब की कांग्रेस सरकार को लगा कि अगर वो मर जाता है तो इससे लोगों में मैसेज जाएगा कि मुंबई हमले का इकलौता जिंदा आरोपी सजा से बच निकला। लिहाजा उसकी सज़ा-ए-मौत की कहानी रची गई। इससे जनता में ये मैसेज भी चला गया कि कांग्रेस सरकार आतंकियों के खिलाफ सख्ती बरत रही है, जबकि सच्चाई इससे कोसों दूर थी। 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले कसाब की फांसी सरकार की इमेज को सुधारने में मददगार हो सकती थी। एक न्यूज वेबसाइट का दावा है कि दरअसल कसाब की मौत मुंबई में ही हो चुकी थी जेल प्रशासन ने उसे बस पुणे ले जाकर दफना दिया। क्योंकि ये काम मुंबई में करने पर मीडिया को भनक लग सकती थी।

वैसे कसाब को लेकर समय-समय पर कॉन्सपिरेसी थ्योरी जन्म लेती रही हैं। एक बार तो यह भी दावा किया गया था कि भारत में जिसे फांसी दी गई वो कसाब नहीं, बल्कि कोई और ही था।

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