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चारे के बाद इस बार नौजवानों की नौकरी खा गए लालू?

अब तक जानवरों का चारा खाने के लिए बदनाम रहे लालू यादव ने लगता है इस बार बिहार के नौजवानों की नौकरी चट कर गए। बिहार में भर्ती घोटाले में शक की सुई लगातार लालू यादव की तरफ इशारा कर रही है। मामले की एसआईटी जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, लालू के करीबियों के नाम उजागर हो रहे हैं। यहां तक कि राज्य कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) के चेयरमैन सुधीर कुमार ने खुद माना है कि इस घोटाले में राज्य के कुछ बड़े नेता शामिल हैं। सुधीर कुमार ने बताया है कि मेरे दफ्तर में नेताओं की तरफ से नौकरियों की काफी सिफारिशें आती थीं। इनमें से कुछ मेरे दफ्तर में आकर बैठ जाते थे और अपना काम जबरन करवा लेते थे। मैं इन लोगों को बहुत दिन तक नाराज नहीं रख सकता था।

घोटाले का मास्टरमाइंड लालू का चेला

चारा घोटाले एक मामले में लालू प्रसाद की जमानत लेने वाला रामाशीष राय घोटाले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है। रामाशीष राय कभी बिहार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में टाइपिस्ट की नौकरी करता था, लेकिन अब वो शिक्षा माफिया बन चुका है। वो पटना में स्कूल भी चलाता है। उसके स्कूल पर धांधली के आरोप लंबे वक्त से लगते रहे हैं। इसी के चलते सीबीएसई ने उसका एफिलिएशन रद्द कर दिया था। इसके बावजूद उसके स्कूल में राज्य भर्ती परीक्षाओं का सेंटर बनाया जाता था। रामाशीष राय को गिरफ्तार करने के लिए जब एसआईटी की टीम पहुंची थी तो उसने लालू यादव के नाम की धौंस भी दी थी। बताते हैं कि चारा घोटाले के एक केस में एक दफा रामाशीष ने लालू यादव की जमानत ली थी।

टॉपर कांड के बाद नीतीश की मुसीबत

बिहार में पिछले दिनों टॉपर कांड में भी पूरी तरह से लालू यादव की पार्टी आरजेडी के लोगों का हाथ सामने आया था। अब ये लगातार दूसरा मामला है जब लालू यादव की पार्टी घोटाले में सीधे तौर पर शामिल होती दिख रही है। बीजेपी नेता सुशील मोदी ने भर्ती घोटाले में लालू यादव की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। बीजेपी का आरोप है कि अब तक इस मामले में जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है वो सभी लालू यादव और उनकी पार्टी आरजेडी के करीबी लोग हैं। खुद मामले की जांच कर रहे अधिकारी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में लिखा है कि इस घोटाले के तार बहुत लंबे हैं और इसमें बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

क्या है बिहार कर्मचारी भर्ती घोटाला?

यह पता चला है कि बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं के पेपर लीक करवाकर कई छात्रों को सरकारी नौकरियां दिलवाई गईं। इस मामले में पैसे की लेनदेन की बात सामने आई है। आरोप है कि ऐसे परीक्षार्थियों से 5 से 6 लाख रुपये लेकर उन्हें आने वाले पेपर की कॉपी दे दी जाती थी। अब तक कर्मचारी चयन आयोग के सचिव परमेश्वर राम समेत 24 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। परमेश्वर राम ने भी पूछताछ में कई विधायकों और एक ताकतवर मंत्री का नाम लिया है। यह बात सामने आई है कि बीते 5 साल से जारी इस घोटाले में अब तक करोड़ों रुपये की कमाई हो चुकी है। परीक्षार्थियों से लिया जाने वाला पैसा एक पूरे सिस्टम के तहत नीचे से ऊपर तक पहुंचाया जाता था। शुरुआती जांच में पटना, नवादा, मुजफ्फरपुर, वैशाली और छपरा में पकड़े गए फर्जीवाड़े में अब तक करीब 100 छात्रों को पास कराने का खुलासा हुआ है।

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