आसाराम अखिलेश यादव की मदद करेंगे, जानें क्यों

यूपी चुनाव को लेकर चल रहे तमाम जोड़तोड़ की खबरें मीडिया में छाई हुई हैं, लेकिन एक खबर पर कम ही लोगों का ध्यान गया। खबर ये है कि बलात्कार के आरोप में जेल में बंद आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं की ओजस्वी पार्टी यूपी में 150 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वैसे तो सबको पता है कि आसाराम या उसकी पार्टी अगर चुनाव लड़ती भी है तो उसका चुनाव पर कोई असर नहीं होगा। लेकिन आसाराम की पार्टी के चुनाव लड़ने की एक वजह है। आसाराम की पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए खुद अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने तैयार किया है। खबरें तो यह भी हैं कि पार्टी को उम्मीदवार उतारने और उनका ‘खर्चा-पानी’ समाजवादी पार्टी की तरफ से ही दिया जाएगा।

बीजेपी के वोट काटने की रणनीति

यूपी के तमाम शहरों में आसाराम के भक्तों की अच्छी-खासी तादाद है। आमतौर पर ये लोग बीजेपी के वोटर रहे हैं। अब अगर आसाराम का ही कैंडिडेट मैदान में होगा तो ये लोग उसी को वोट करेंगे। जिससे नुकसान बीजेपी को होगा। उम्मीदवार उतारने के लिए जो 150 सीटें चुनी गई हैं उन पर गौर करें तो यह बात साफ हो जाएगी कि बीजेपी के वोट काटने की ही कोशिश है। हमारी जानकारी के मुताबिक समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों ने आसाराम के बेटे नारायण साईं से पिछले साल अक्टूबर में संपर्क किया था। नारायण साईं की तरफ से उसकी ओजस्वी पार्टी के एक महासचिव ने सपा नेताओं से बातचीत की। आसाराम और नारायण साईं को लगता है कि केंद्र और राजस्थान में सरकार होने के बावजूद बीजेपी उन्हें छुड़ाने में मदद नहीं कर रही है, इसलिए बीजेपी को ‘सबक’ सिखाने की नीयत से वो मदद को तैयार भी हो गए। दोनों बाप-बेटे बलात्कार के केस में बंद हैं और दोनों को ही कोर्ट से जमानत नहीं मिल रही है।

खुद नारायण साई भी चुनाव लड़ेगा!

आसाराम के बेटे ने एलान कर रखा है कि वो वाराणसी की शिवपुर और गाजियाबाद में साहिबाबाद सीट से चुनाव लड़ेगा। ये दोनों वो इलाके हैं, जहां आसाराम के आश्रम और स्कूल चलते हैं। यहां आसाराम के भक्तों की अच्छी-खासी तादाद बताई जाती है। शिवपुर पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र के अंदर आता है। यहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं और जीत-हार का अंतर काफी कम होगा। अगर ऐसे में बीजेपी के उम्मीदवार के 5000 वोट भी कट गए तो समाजवादी पार्टी की जीत आसान हो जाएगी। कुछ ऐसी ही स्थिति लगभग सभी सीटों की है। ये सीटें ज्यादातर पूर्वांचल के जिलों में हैं, जहां बीजेपी सबसे मजबूत मानी जाती है। नारायण साईं ने चुनाव लड़ने के लिए सूरत कोर्ट में अर्जी भी डाल रखी है। यूपी के अलावा पंजाब में भी ओजस्वी पार्टी के कुछ उम्मीदवार उतारे गए हैं।

पहले भी चुनाव लड़ने की खबरें आईं

आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं ने 2011 में ही ओजस्वी पार्टी नाम से अपने दल का गठन कर लिया था। देश भर में फैले उसके भक्तों के दम पर वो राजनीतिक मोलभाव की स्थिति में आ गया था। लेकिन तब तक रेप के केस में फंसने के कारण उसका सारा खेल खराब हो गया। 2013 के दिल्ली चुनाव में भी उसकी पार्टी ने दिल्ली में बीजेपी के वोट काटने के लिए उम्मीदवार उतारने का एलान किया था, लेकिन जेल जाने के कारण मामला ठप हो गया। इसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव में भी उम्मीदवार उतारने की तैयारी थी। लेकिन तब इसे ये सोचकर टाल दिया गया था कि बीजेपी की सरकार बनेगी तो दोनों बाप-बेटे जेल से छूट जाएंगे। वैसे देखें तो ये मामला कोर्ट में है और इसमें सरकार की कोई खास भूमिका नहीं है। आसाराम और नारायण साईं पर जो धाराएं लगी हैं उनमें जमानत मिलना वैसे भी आसान नहीं होता। बाद में गवाहों की हत्याओं ने दोनों को जमानत मिलना लगभग नामुमकिन बना दिया।

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