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लग गई ‘औरंगजेब’ की तख्ती, बेदखल हुआ ‘शाहजहां’

जिस वक्त समाजवादी पार्टी का विवाद चरम पर था, तब अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में एक लेख छपा था, जिसमें अखिलेश यादव की तुलना मुगल बादशाह औरंगजेब से की गई थी। औरंगजेब से इसलिए क्योंकि उसने अपने पिता शाहजहां को कैद करके सत्ता हासिल की थी। इस लेख पर अखिलेश यादव ने कड़ा ऐतराज जताया था और कहा था कि ये लेख अमर सिंह ने छपवाया है। लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया का वो लेख आखिरकार सच ही साबित हो गया। यूपी के यादव खानदान में भी मुगलों की परंपरा के मुताबिक बाप को ‘कैद’ करके ही सत्ता का हस्तांतरण हुआ है। पहले अखिलेश यादव अपने बाप मुलायम को रातोंरात पद से बेदखल करके खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बन बैठे और शनिवार देर शाम वो रस्म भी पूरी कर दी गई, जिससे पार्टी के कार्यकर्ता अब तक हिचकिचा रहे थे। लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ्तर पर शनिवार देर शाम मुलायम सिंह की राष्ट्रीय अध्यक्ष वाली नेमप्लेट हटा दी गई। अब तक यहां मुलायम और अखिलेश दोनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष वाली नेमप्लेट लगी थीं। अब मुलायम की जो नई नेमप्लेट लगी है, उसमें उनके नाम के नीचे संरक्षक लिखा गया है।

शाहजहां लखनऊ के ‘किले’ में कैद

दरअसल राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद अब ‘शाहजहां’ मुलायम सिंह यादव का पार्टी में कोई रोल नहीं बचा है। पार्टी के रोजमर्रा के तमाम छोटे-बड़े फैसले अब ‘औरंगजेब’ अखिलेश और उनके दरबारी देख रहे हैं। अब तक अखिलेश लखनऊ में सीएम पद की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं और मुलायम केंद्रीय राजनीति में थे। लेकिन मुलायम के लिए दिल्ली में भी रहना मुश्किल है, क्योंकि अब उन्हें कोई भी गंभीरता से नहीं लेगा। न तो दूसरी पार्टियों के नेता और न ही खुद उन्हीं की पार्टी के लोग। इसे मुलायम के सियासी करियर की समाप्ती माना जा रहा है क्योंकि मानद तौर पर ही सही जो तख्ती लगी थी वो भी हटा ली गई।

मुलायम से सलाह नहीं लेते अखिलेश!

समाजवादी पार्टी के नाराज खेमे के एक सदस्य ने न्यूज़लूज़ को बताया है कि अखिलेश भले ही मीडिया के आगे मुलायम को इज्जत देने की बात कहते हों, लेकिन अंदरखाने में कुछ और ही चल रहा है। खुद शिवपाल यादव लखनऊ में कुछ करीबियों को बता चुके हैं कि अखिलेश उनसे और अपने पिता से बंद कमरे की बातचीतों में ठीक से बर्ताव नहीं करते। यहां तक कि यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठजोड़ को लेकर कांग्रेस के साथ चल रही बातचीत में भी मुलायम या शिवपाल को लूप में नहीं रखा जा रहा है। जाहिर है इन हालात में मुलायम के लिए राजनीतिक तौर पर सक्रिय रहना नामुमकिन हो चुका है। अब उनके पास एक ही रास्ता है कि लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर अपने आलीशान बंगले में बैठकर चुपचाप टीवी देखें, क्योंकि उन्होंने शाहजहां की तरह यूपी में कोई ताजमहल भी नहीं बनवाया, जिसे आखिरी दिनों में वो निहार सकते।

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