प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर ठग रहे हैं बिल्डर!

प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर देशभर में कई बिल्डर लोगों को ठगने में जुट गए हैं। दिल्ली और आसपास के इलाकों में इन दिनों ऐसे कई होर्डिंग और विज्ञापन देखे जा सकते हैं, जिन पर मोटे-मोटे अक्षरों में प्रधानमंत्री आवास योजना में घर लेने के बारे में बताया गया है। लेकिन ये विज्ञापन दरअसल बिल्डरों के हैं। ये वो बिल्डर हैं, जिन्होंने अब तक हजारों लोगों से पैसे लेकर उनको मकानों का कब्जा नहीं दिया है। इस लिहाज से देखा जाए तो यह प्रधानमंत्री के नाम का गलत इस्तेमाल करके लोगों को धोखा देने का मामला भी बनता है। क्योंकि ये असली प्रधानमंत्री आवास योजना नहीं है। प्रधानमंत्री के नाम पर जो बिल्डर फ्लैट बेच रहे हैं, उनमें से ज्यादातर की रेपुटेशन बहुत खराब है और कोई भरोसा नहीं कि वो बताए समय पर फ्लैट दें या न दें।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा में लगे फर्जी विज्ञापन

कई बिल्डरों ने अपने नाम छिपाकर ऐसे विज्ञापन पूरे दिल्ली-एनसीआर में लगाए हैं। ज्यादातर में कुछ नकली नामों का इस्तेमाल किया गया है ताकि लोगों को पता न चलने पाए कि दरअसल ये उन्हीं पुराने जालसाज बिल्डरों का प्रोजेक्ट है। विज्ञापनों में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता है- ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’, जिसके साथ में छोटा सा लिखा होता ‘to support’। यानी ये बिल्डर प्रधानमंत्री आवास योजना को सहयोग देने की नीयत ये घर बेच रहा है। एनसीआर में बिक रहे ऐसे ज्यादातर फ्लैट्स 9 लाख से 35 लाख रुपये तक में बेचे जा रहे हैं। जबकि असली प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों के दाम इतने ज्यादा नहीं हैं।

कई दूसरे राज्यों में भी चल रहा है यही खेल

दिल्ली और आसपास के शहर ही नहीं, देश भर में पिछले कुछ महीनों से ऐसे विज्ञापन दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर महाराष्ट्र में ठगी की शिकायत पिछले साल अप्रैल में सामने आई थी। वहां भी कई बिल्डर विज्ञापनों में प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाकर फ्लैट बेच रहे थे। बीजेपी सांसद किरीट सोमैया की शिकायत के बाद सीएम देवेंद्र फड़नवीस ने मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं। म्हाडा ने भी साफ किया था कि ऐसी सारी स्कीमें फर्जी हैं और लोग इनके झांसे में न आएं। मध्य प्रदेश, राजस्थान बिहार, यूपी और झारखंड में बाकायदा अखबारों में ऐसे फुलपेज विज्ञापन भी छप रहे हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है?

पीएम नरेंद्र मोदी ने 2022 तक देश में सभी बेघरों को छत मुहैया कराने की नीयत से यह स्कीम शुरू की है। 25 जून 2015 से शुरू इस योजना में खास तौर पर गांवों में रहने वाले बेघर लोगों और शहरों में झुग्गियों में रहने वालों पर फोकस है। इस स्कीम का फायदा उठाने की पहली शर्त यह है कि लाभार्थी या उसके परिवार के सदस्यों के नाम से भारत में कहीं पर भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। इस योजना के कुल तीन चरण है। अप्रैल 2015 में शुरू पहले चरण में देश के कुल 100 शहरों में स्कीम के तहत बुकिंग चल रही है। इसके बाद अप्रैल 2017 से 200 और शहर स्कीम में शामिल हो जाएंगे। तीसरे चरण में अप्रैल 2019 से पूरा देश इस योजना के दायरे में आ जाएगा। स्कीम में कुल 3 करोड़ मकान बनाए जाने हैं। अब तक करीब 7 लाख मकान बनाकर उसके मालिकों को दिए भी जा चुके हैं।

फिलहाल प्रधानमंत्री के नाम पर चल रही इस ठगी को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल भी उठाए हैं।

कुल मिलाकर यह मामला रिलायंस जियो और पेटीएम जैसा होता जा रहा है। इन दोनों कंपनियों ने पिछले दिनों अपने विज्ञापनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का गलत तरीके से इस्तेमाल करके लोगों को बेवकूफ बनाया। बिल्डर प्रधानमंत्री की तस्वीर तो नहीं इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन विज्ञापन का जो तरीका उन्होंने अपनाया है उसके पीछे भी उनकी गलत मंशा ही दिखती है।

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