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नोटबंदी के फायदे दिखने शुरू, उद्योगों का पहिया तेज़

नोटबंदी के पहले महीने में ही अर्थव्यवस्था पर इसके फायदे दिखाई देने लगे हैं। देश की औद्योगिक विकास दर में सबसे जबर्दस्त उछाल आया है और नवंबर महीने में ये साढ़े पांच फीसदी से भी अधिक रही है। जबकि इससे एक महीने पहले अक्टूबर में ये गिरकर 1.9 फीसदी पर थी। नोटबंदी से एक तरफ उद्योगों का पहिया चल पड़ा है दूसरी तरफ महंगाई में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। खुदरा महंगाई दर साढ़े तीन फीसदी से भी नीचे आ गई है। ये बीते दो साल में सबसे कम है। तीसरा फायदा यह कि इससे ब्याज दरों में एक बार फिर से गिरावट के आसार हैं। इसके साथ ही देश में मंदी आने के विपक्ष और मीडिया के अनुमानों की पोल भी खुल गई है। 04.

चल पड़ा उद्योगों का पहिया

  • नोटबंदी के पहले महीने में बिजली सेक्टर ने सबसे तेज तरक्की की।
  • इसके बाद पैसेंजर कारों का उत्पादन रहा।
  • कार ही नहीं, टेलीविजयन, फ्रिज जैसे तमाम रोजमर्रा के सामान बनाने वाले उद्योगों की विकास दर बेहतर रही है।
  • ये वो सेक्टर हैं जो बीते काफी समय से अच्छा नहीं कर रहे थे।
  • इनकी वजह से ही पूरे औद्योगिक विकास की दर में सुधार हुआ।
  • नोटबंदी वाले महीने यानी नवंबर 2016 में औद्योगिक विकास दर 5.7 फीसदी रही।
  • इससे पहले के महीने अक्टूबर में यह दर 1.9 फीसदी से कम थी।
  • पिछले साल नवंबर में तो विकास दर नेगेटिव में यानी माइनस 3.4 फीसदी पर थी।
  • मैनुफैक्चरिंग यानी निर्माण क्षेत्र की विकास दर 5.5 फीसदी रही है।
  • अक्टूबर में ये नेगेटिव में यानी माइनस 2.39 फीसदी थी।
  • पिछले साल नवंबर में यह नेगेटिव में यानी माइनस 4.6 फीसदी पर था।

महंगाई से आम जनता को राहत

इस दौरान सब्जियों की कीमत में तेज गिरावट आई है। इसके अलावा रोजमर्रा के बाकी सामान के दाम भी या तो स्थिर हैं या कुछ कम हुए हैं। इसका नतीजा यह है कि रिटेल महंगाई दर दिसंबर में 3.63 फीसदी से कम होकर 3.41 फीसदी पर आ गई। बीते दो साल में महंगाई दर का ये सबसे निचला लेवल है। खाने पीने की चीजें सबसे सस्ती हुई हैं। इनका खुदरा महंगाई दर 2.03 से गिरकर 1.37 फीसदी पर आ गया है। अरहर की दाल की कीमत में भी गिरावट का रुख लगातार जारी है। G

ब्याज दर में फिर कटौती होगी!

महंगाई दर में जिस तरह से भारी गिरावट देखी जा रही है, उससे एक बार फिर से ब्याज दरों में कटौती की अटकलें शुरू हो गई हैं। खुदरा महंगाई दर में गिरावट ने ब्याज दर में और कमी करने का आधार बना दिया है। वैसे आरबीआई ने पिछले महीने अपनी तिमाही नीति में ब्याज दर यानी रेपो रेट में कई कमी नहीं की थी।

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