यूपी में कांग्रेस के लिए ‘प्रचार’ करेगी आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी भले ही यूपी में चुनाव नहीं लड़ रही, लेकिन पार्टी ने प्रचार अभियान में उतरने का एलान किया है। आप के प्रवक्ता वैभव माहेश्वरी ने कहा है कि उसके तमाम बड़े नेता और कार्यकर्ता बीजेपी को हरवाने के लिए प्रचार करेंगे। न्यूज़लूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक अरविंद केजरीवाल की पार्टी जगह-जगह रैलियां करके बीजेपी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगी। हालांकि इसमें भी एक पेच यह है कि ज्यादातर रैलियां और सभाएं उन जगहों के लिए प्लान की गई हैं, जहां पर कांग्रेस को फायदा पहुंचने के आसार हैं। ये सारी रणनीति सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल की देखरेख में तय की गई है।

10 जनपथ के इशारे पर यूपी में रैलियां

यूपी में आम आदमी पार्टी की रैलियों का पूरा कार्यक्रम कांग्रेस के एक बड़े नेता से बातचीत के आधार पर तैयार हुआ है। हमें मिली जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों सोनिया गांधी के इस करीबी नेता और अरविंद केजरीवाल के बीच एक बैठक में रणनीति का खाका तैयार हुआ था। इसी के तहत केजरीवाल ने आनन-फानन में वाराणसी, मेरठ और लखनऊ में रैलियां कीं। यूपी में आम आदमी पार्टी का कोई खास संगठन भी नहीं है, इसके बावजूद इन तीनों रैलियों के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई थीं। ये तीनों रैलियां सिर्फ इस मकसद से की गईं ताकि आम आदमी पार्टी राज्य में अपनी मौजूदगी का एहसास करवा सके और चुनाव में वोटों के समीकरण को प्रभावित करा सके।

यूपी में क्या है केजरीवाल की रणनीति?

पंजाब और गोवा में 4 फरवरी को वोटिंग होनी है, इसके बाद आम आदमी पार्टी के तमाम नेता फ्री होंगे। यूपी में मतदान का काम 11 फरवरी से शुरू होना है। इसके बाद केजरीवाल समेत सभी बड़े नेता यूपी के चुनाव में जुट जाएंगे। यहां पर वो कहने को तो बीजेपी विरोधी रैली करेंगे, लेकिन कोशिश कांग्रेस को फायदा पहुंचाने की होगी। इसके लिए खास तौर पर मुद्दों की भी पहचान की गई है। यूपी में कानून-व्यवस्था का मुद्दा सबसे अहम माना जाता है, लेकिन आम आदमी पार्टी का फोकस नोटबंदी पर रहेगा।

वैश्य वोटरों पर केजरीवाल का फोकस

दरअसल यूपी में वैश्य समुदाय बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है। पिछले दिनों नोटबंदी से इस तबके को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। अब आम आदमी पार्टी के वैश्य नेता जैसे कि अरविंद केजरीवाल और आशुतोष जाकर इन वोटरों को समझाएंगे कि वो बीजेपी को वोट न दें। जिन सीटों पर ऐसी रैलियां तय की गई हैं, ये वो सीटें होंगी जहां पर कांग्रेस के उम्मीदवार मुकाबले में होंगे। ऐसे में अगर वैश्य समुदाय बीजेपी के बजाय कांग्रेस पार्टी को वोट दे देता है तो बीजेपी को 10 से 15 सीटों पर हार का सामना करना पड़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी बहुत से पिछड़ सकती है और कांग्रेस के पास मौका होगा कि वो एसपी और बीएसपी पर दबाव बनाकर मिलीजुली सरकार बनवा दे। फिलहाल समीकरण बिगाड़ने के इस खेल में मायावती ने भी केजरीवाल से मदद मांगी है। हालांकि हमारी जानकारी के मुताबिक दोनों में अभी तक इस बारे में सहमति नहीं बन सकी है।

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