जज कम हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की छुट्टियां बढ़ गईं!

एक तरफ देश में जजों की कमी का रोना रोया जा रहा है, दूसरी तरफ अदालतों की छुट्टियां बढ़ती जा रही हैं। देश की सबसे ऊंची अदालत सुप्रीम कोर्ट में इस साल पिछले साल के मुकाबले ज्यादा छुट्टियां रहेंगी। पूरे साल में कुल 139 दिन न्याय का दरवाजा बंद रहेगा। जजों को मिलने वाले व्यक्तिगत अवकाश इसके अतिरिक्त होंगे। एक तरफ अदालतों में लाखों केस पेंडिंग हैं दूसरी तरफ छुट्टियों की ये संख्या चौंकाने वाली है।
हाल ही में रिटायर हुए चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर जजों की भर्ती के सवाल पर बार-बार केंद्र सरकार पर हमले बोलते रहे। नए चीफ जस्टिस जेएस खेहर भी जजों की भर्ती को लेकर काफी संवेदनशील हैं। इस मामले पर न्यायपालिका और सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा होती रही है। यह सवाल उठता है कि जब जजों की इतनी कमी है तो कोर्ट की छुट्टियां कुछ कम नहीं की जा सकतीं?

छुट्टियों का कैलेंडर देखकर जलन होगी

सुप्रीम कोर्ट में इस साल की छुट्टियों का कैलेंडर देखकर आपको जलन होगी कि काश आप भी यहां पर नौकरी करते। देश में किसी और सेक्टर में शायद इतनी छुट्टियां न मिलती हों।

  • इस साल 139 दिन तो कोर्ट बंद रहेगी
  • पिछले साल ये संख्या 134 थी
  • यानी 5 छुट्टियां ज्यादा
  • कुल 226 दिन कोर्ट खुली रहेगी
  • जजों की अपनी छुट्टियां भी होंगी
  • कुल 51 दिन तक गर्मी की छुट्टी रहेगी
  • मई, जून में लगभग पूरे समय कोर्ट बंद रहेगी
  • सितंबर में 6 दिन की दशहरे की छुट्टी होगी
  • अक्टूबर में फिर 5 दिन दिवाली की छुट्टी है
  • 17 दिसंबर से ही क्रिसमस और नए साल की छुट्टियां शुरू हो जाएंगी

अदालतों में है काम का भारी बोझ

पिछले चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर एक बार अदालतों में काम के बोझ का जिक्र करते हुए रो पड़े थे। तब पहली बार जजों की कमी का मुद्दा फोकस में आया था। लेकिन यह सवाल खड़ा होता है कि 2 दिन काम करने पर 1 दिन की छुट्टी का ये अनुपात कहां तक सही है। स्कूलों के अलावा अदालतें इकलौती संस्था हैं जहां गर्मी और सर्दी की छुट्टियां भी होती हैं।
संबंधित रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट की छुट्टियां देखकर आपको रोना आएगा!

छुट्टियों पर क्या है कोर्ट की दलील

जब भी बात होती है कि न्यायपालिका में छुट्टियां कुछ ज्यादा ही मिलती हैं तो यह दलील दी जाती है कि जज छुट्टियों में कहीं घूमने नहीं जाते। वो इस दौरान फैसले लिखने और अपनी जानकारी बढ़ाने में करते हैं। कई जानकार इस दलील को सही नहीं मानते। उनका कहना है कि अदालतों की छुट्टियों की समीक्षा की जरूरत है क्योंकि जज ही नहीं हर पेशे के लोग अपनी छुट्टियों को कुछ इसी तरह सही ठहराने की कोशिश कर सकते हैं। वैसे अमेरिका और यूरोप के देशों में अदालतों में इतनी छुट्टियां नहीं होतीं। वीकेंड के अलावा साल में एक बार क्रिसमस और नए साल की छुट्टी ही होती है।

जज बनाने में भाई-भतीजावाद के आरोप

सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच जजों की नियुक्ति एक बड़ा मसला बनी हुई है। सरकार चाहती है कि इसके लिए कॉलेजियम सिस्टम हो, जिसके जरिए मेरिट के आधार पर जजों की भर्ती हो। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस बात पर अड़ा है कि जज ही जज की नियुक्ति कर सकता है। नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक लिस्ट केंद्र के पास भेजी हुई है। आरोप है कि इस लिस्ट में ज्यादातर मौजूदा जजों के बेटे-बेटियां या करीबी लोग ही हैं। इस बारे में हमने न्यूजलूज़ पर एक रिपोर्ट भी पोस्ट की थीं।

रिपोर्ट पढ़ें: मी लॉर्ड कब तक जज के बेटे-बेटियां जज बनते रहेंगे?

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