बच्चों के यौन शोषण का अड्डा बन रहे हैं क्रिश्चियन स्कूल

देश भर में ईसाई कॉन्वेंट स्कूलों में बच्चों के यौन शोषण के मामलों में तेज़ी आई है। इससे इन स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों की सुरक्षा पर सवाल गहराते जा रहे हैं। ताजा मामला है केरल का जहां कोच्चि के एक कॉन्वेंट स्कूल के प्रिंसिपल फादर बेसिल कुरियाकोस को 10 साल के लड़के के साथ कुकर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ये बच्चा किंग्स डेविड इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ता है। बच्चे के मां-बाप की शिकायत के बाद 65 साल के इस दरिंदे पादरी को गिरफ्तार कर लिया गया। कॉन्वेंट स्कूलों में बच्चों के यौन शोषण के ज्यादातर मामलों में आरोपियों की उम्र 50 साल से ज्यादा रही है।

बोर्डिंग स्कूलों में हालात सबसे खराब

बीते 3-4 साल के आंकड़ों पर नज़र डालें तो कॉन्वेंट स्कूलों में यौन शोषण का औसत बाकी हर तरह के स्कूलों से ज्यादा रहा है। इनमें भी बोर्डिंग स्कूलों में स्थिति सबसे अधिक खराब पाई गई है। कोच्चि के जिस स्कूल का ताजा मामला सामने आया है वो भी बोर्डिंग स्कूल ही है। पांचवीं क्लास में पढ़ने वाले इस बच्चे का बड़ा भाई उससे मिलने स्कूल में आया था, जहां पर बच्चे ने अपने साथ हुई आपबीती उसे सुनाई। इसके बाद बच्चे के मां-बाप ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पादरी का शिकार बना बच्चा बेहद डरा हुआ है और वापस स्कूल जाने को तैयार नहीं है।

नन ही नहीं, अब बच्चे भी शिकार

2002 में धार्मिक अध्ययन के प्रोफेसर मैथ्यू शेल्म्ज़ (Mathew N. Schmalz) ने एक लेख में माना था कि “भारत भर में फैले कैथोलिक चर्च में नन और बच्चों के साथ यौन शोषण के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि इसके बारे में ज्यादा बात नहीं होती और अधिकतर केस पुलिस और कोर्ट तक कभी नहीं पहुंच पाते।” दूरदराज के इलाकों में चल रही मिशनरी में यौन शोषण के ज्यादातर केस दबे रह जाते हैं, क्योंकि पीड़ित अक्सर गरीब तबके के लोग होते हैं और उन्हें पैसे देकर चुप करा दिया जाता है। आदिवासी इलाकों में तो यही काम भगवान को ‘खुश’ करने के नाम पर हो रहा है। एक अनुमान के मुताबिक यहां होने वाले यौन अपराधों में मुश्किल से एक फीसदी केस पुलिस में रिपोर्ट हो पाते हैं।

  • 2014 में केरल के त्रिचूर में सेंट पॉल चर्च के पादरी राजू कोक्कन को 9 साल की बच्ची से रेप के केस में गिरफ्तार किया गया था। चर्च के अंदर दरिंदगी का ये अब तक का सबसे खौफनाक मामला माना जाता है। इस वहशी पादरी ने चॉकलेट का लालच देकर बच्ची को कई बार अपनी हवस का शिकार बनाया था। कम से कम तीन बार तो उसने ये काम चर्च के अंदर अपने कमरे में किया।
  • 2014 में ही फरवरी से अप्रैल के बीच केरल के अंदर ही तीन कैथोलिक पादरी बच्चों से बलात्कार के केस में गिरफ्तार किए गए। ज्यादातर मामलों में ईसाई संगठनों ने शर्मिंदा होने के बजाय अपने पादरियों का बचाव किया।
  • पिछले ही महीने यानी दिसंबर में केरल के एर्नाकुलम में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के आरोपी 41 साल के पादरी एडविन फिगारेज को एक साथ दो-दो उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है। ये पादरी कलाकार भी था और इसके कई म्यूजिक एलबम बाजार में हैं। बच्ची को म्यूजिक सिखाने के नाम पर उसके साथ कई महीने तक दरिंदगी की गई। गिरफ्तारी से पहले ये पादरी काफी समय तक फरार भी रहा था।

बलात्कारी पादरियों को देते हैं बढ़ावा!

भारत में बलात्कारी पादरियों की संख्या बढ़ने के पीछे एक बड़ी वजह ये है कि यहां पर बिना किसी जांच-पड़ताल के पादरी बनाए जा रहे हैं। यहां तक कि विदेशों में यौन शोषण और दूसरे अपराध में पकड़े जाने वाले कई पादरी भी भागकर भारत आ गए और यहां उन्हें बाइज्जत किसी चर्च में पादरी के तौर पर नियुक्त कर दिया गया। हाल ही में जोसेफ पी जयापॉल नाम का भारतीय मूल का एक पादरी अमेरिका से भागकर आया था। उस पर एक अमेरिकी लड़की ने अपने बचपन में रेप का आरोप लगाया था। अमेरिकी कोर्ट में उसने गुनाह कबूल भी लिया, लेकिन सजा से बचने के लिए भारत भाग आया। यहां पर वेटिकन ने उसे तमिलनाडु की एक चर्च का पादरी भी बना दिया। पिछले साल अप्रैल में जब ये मामला सामने आया था तो न्यूज़लूज़ पर हमने इस बारे में एक रिपोर्ट भी पोस्ट की थी।

रिपोर्ट पढ़ें: अमेरिका का बलात्कारी भारत आकर पादरी बन गया

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