‘दंगल’ में आमिर खान के जिहादी एजेंडे के 5 सबूत

फिल्म पीके में हिंदू देवी-देवताओं के अपमान के बाद आमिर खान ‘दंगल’ में भी जिहादी एजेंडा चलाने से बाज नहीं आए। आमिर खान की प्रोडक्शन यूनिट के एक अहम सदस्य ने अपने कुछ करीबी लोगों से बातचीत में इस बारे में कुछ अहम जानकारियां दी हैं। इसके मुताबिक आमिर ने फिल्म की शूटिंग से लेकर डबिंग तक यह पक्का किया कि इसमें ऐसी कोई निशानी न रहे जिससे हिंदू देवी-देवताओं का सम्मान होता हो। इसके बजाय आमिर ने फिल्म में जबर्दस्ती सेकुलरिज्म का तड़का लगवाया।

1. हनुमान की तस्वीरें गायब कीं

प्रोडक्शन टीम के सदस्य के मुताबिक ‘दंगल’ फिल्म में कहीं भी हनुमान की तस्वीर न रखने का फैसला आमिर खान का था। सिर्फ एक सीन में हनुमान को पीछे दिखाया गया है उसमें भी तस्वीर धुंधली नजर आती है। ऐसा तब हुआ जब पहलवान महावीर फोगट हनुमान के बहुत बड़े भक्त हैं। खुद महावीर फोगट के घर में हनुमान की तस्वीरें जगह-जगह देखी जा सकती हैं। आमिर ने घर से लेकर अखाड़े तक में कहीं भी हनुमान का कोई नामोनिशान नहीं रहने दिया। हरियाणा का शायद ही कोई ऐसा अखाड़ा होगा जहां हनुमान की तस्वीर न हो। यहां तक कि कई मुस्लिम अखाड़ों में भी हनुमान की पूजा होने के किस्से आम हैं।

2. मांसाहार का वाकया नकली

यह बात भी सामने आ चुकी है कि पहलवान महावीर फोगट का परिवार पूरी तरह शाकाहारी है। तो सवाल यह है कि सच्ची घटना पर बन रही फिल्म में आमिर खान ने क्या सोचकर उन्हें मांसाहारी दिखाने का फैसला किया। ‘दंगल’ में दिखाया गया है कि शाकाहार के कारण महावीर फोगट की बेटियां कमजोर थीं और अखाड़े में टिक नहीं पाती थीं, लिहाजा उन्होंने उन्हें चिकेन खिलवाया। जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हुआ था।

3. महावीर को शराब पीते दिखाया

आमिर ने फिल्म में पहलवान महावीर फोगट को शराबी पीते दिखाया है। जबकि हरियाणा में पहलवानी की परंपरा में शराब-सिगरेट और दूसरी बुराइयों को हाथ तक नहीं लगाते। पहलवान पक्के हनुमान भक्त होते हैं और आजीवन वो शराब या नशे की किसी लत को हाथ तक नहीं लगाते। फिल्म में आमिर ने महावीर फोगट को दो-दो मौकों पर शराबी के तौर पर दिखाया है।

4. मुसलमान हमेशा नेक इंसान

हिंदी फिल्मों में हमेशा यह ध्यान रखा जाता है कि टोपी पहनने वाला मुसलमान हमेशा अल्ला का नेक बंदा होगा और पंडित हमेशा ठग और धूर्त होगा। आमिर खान ने इस एजेंडे को चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिल्म में दिखाया गया है कि महावीर फोगट एक कसाई से चिकेन खरीदा करते थे। वो कसाई इतना नेकदिल इंसान था कि फाइनल मुकाबले के दिन वो गीता फोगट के लिए भगवान का प्रसाद लेकर आता है। जबकि असल जिंदगी में ऐसा कोई किरदार नहीं था। आमिर खान ने मुसलमानों को अच्छा दिखाने के लिए जबरन ये किरदार घुसेड़ा था। वैसे भी किसी अंतरराष्ट्रीय मुकाबले से पहले कोई खिलाड़ी या एथलीट बाहर से लाया गया कोई ऐसा खाना नहीं खा सकता। अगर ऐसा सचमुच हुआ होता तो हो सकता है कि गीता फोगट डोपिंग टेस्ट में फेल हो जातीं और उनका मेडल छिन गया होता।

5. गुरु-शिष्य परंपरा का मज़ाक

पहलवानी में गुरु-शिष्य की परंपरा का खास महत्व है। ये परंपरा हिंदू धर्म का अहम हिस्सा रही है। पटियाला स्पोर्ट्स एकेडमी में गीता फोगट के गुरु यानी कोच पीएल सोंधी थे। फिल्म में दिखाया गया है कि वो गीता के खिलाफ साजिशें रच रहे हैं। जबकि ऐसा कभी कुछ नहीं हुआ। महावीर फोगट पर कुछ रोकटोक जरूर लगी थीं, लेकिन वो स्पोर्ट्स फेडरेशन के नियमों के कारण। उन्हें जिस तरह से बाथरूम नुमा स्टोर रूम में बंद करवाया गया, दरअसल वैसा कभी कुछ नहीं हुआ। महावीर फोगट ने गैलरी में खड़े होकर अपनी बेटी का मुकाबला देखा था।

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