तो इसलिए मोहन भागवत से मिलने गए थे रतन टाटा!

बायीं तस्वीर में रतन टाटा बीजेपी प्रवक्ता शाइना एनसी के साथ हैं। ये तस्वीर संघ मुख्यालय की है। दायीं तस्वीर पुरानी है। इसमें टाटा कॉरपोरेट दलाल नीरा राडिया के साथ हैं।

रतन टाटा की आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात पर कुछ लोग बहुत खुश हो रहे हैं और टाटा को राष्ट्रवादी, संघी बताते हुए उनकी शान में कसीदे पढ़ रहे हैं। लेकिन अंदर की कहानी दरअसल कुछ और ही है। हाई कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल का दावा है कि “ये मुलाकात कंपनी के चेयरमैन पद से हटाए गए साइरस मिस्त्री से विवाद के चलते सरकार को मैनेज करने के सिलसिले में थी। टाटा आरएसएस के जरिए सरकार पर दबाव चाहते हैं। कांग्रेस के समय जो काम पहले नीरा राडिया करती थीं, वही अब बीजेपी की सलमान खान समर्थक प्रवक्ता शाइना एनसी कर रही हैं।” न्यूज़लूज़ के सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार के आने के बाद से रतन टाटा के उतने अच्छे दिन नहीं चल रहे, जितने यूपीए सरकार के दौरान हुआ करते थे। रतन टाटा के पुराने ‘पापों’ की वजह से मोदी सरकार उन्हें लेकर थोड़ी सावधानी बरत रही है। टाटा संस कंपनी में चल रहे मौजूदा विवाद में भी सरकार की तरफ से रतन टाटा को कोई खास सहयोग नहीं मिला है।

रतन टाटा की असलियत कुछ और ही है!

एक फेसबुक पोस्ट में प्रशांत पटेल ने लिखा है कि सुब्रह्मण्यम स्वामी रतन टाटा की सच्चाई को जानने के कारण ही काफी समय से उनके कटु आलोचक रहे हैं। स्वामी ने कई बार टाटा की धांधलियों के खिलाफ खुलकर लिखा भी है। प्रशांत पटेल ने लिखा है कि “टाटा ने देश को अंबानी से भी ज्यादा लूटा है। दिल्ली की सड़कों पर चल रही लो फ्लोर बसें जिनकी कीमत 15 लाख थी, टाटा ने 55 लाख में बेच दीं। राष्ट्रवाद और देशप्रेम के नाम पर रतन टाटा ने देश को चूना ही लगाया है।” पटेल ने लिखा है कि अमेरिका में रहने वाले पारसी समुदाय की मदद से रतन टाटा ने पूरे आईटी उद्योग पर कब्जा कर रखा है और बदले में सरकार से कई तरह की टैक्स छूट भी हासिल कर रखी हैं।

मनमोहन सरकार के घोटालों में शामिल

प्रशांत पटेल ने लिखा है कि रतन टाटा 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सीधे तौर पर शामिल हैं। नीरा राडिया टेप जिसने भी सुना है उसे रतन टाटा का असली चेहरा पता ही होगा। इस टेप में रतन टाटा नीरा राडिया के साथ ‘रसीली बातचीत’ करते हुए भी सुने जा सकते हैं। 2जी घोटाले की जांच करने वाली लोक लेखा समिति (पीएसी) के आगे बयान में रतन टाटा को कबूलना पड़ा था कि टेप में उन्हीं की आवाज है। बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने हाल ही में इस घोटाले में रतन टाटा के खिलाफ केस चलाने की अपील की थी। इस अर्जी पर 11 जनवरी को स्पेशल कोर्ट में सुनवाई होनी है।

रतन टाटा ने नागपुर में संघ मुख्यालय में हुई इस मुलाकात ने मोहन भागवत के साथ चाय भी पी थी।

अन्ना-केजरीवाल को टाटा ने की थी फंडिंग!

पटेल के मुताबिक यूपीए सरकार के घोटालों में खुद को फंसते देख तब रतन टाटा ने सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना ली थी। इसके तहत उन्होंने इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन की पिछले रास्ते से फंडिंग की थी। दरअसल 2010 के बाद से शुरू हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के पीछे पूरा दिमाग रतन टाटा का ही था। उन्होंने अन्ना और केजरीवाल के ड्रामे को मीडिया कवरेज दिलाने के लिए अपनी कंपनियों के करोड़ों रुपये के विज्ञापन अखबारों और न्यूज चैनलों को दिए थे। इसी का नतीजा था कि तब चैनल वाले अन्ना और केजरीवाल के पूरे के पूरे भाषण टीवी पर दिखाते थे और दिन भर रामलीला मैदान और जंतर-मंतर की लाइव तस्वीरें दिखाई जाती थीं।
(प्रशांत पटेल वही हैं जिनकी अदालती लड़ाई के चलते अरविंद केजरीवाल के कई विधायकों पर सदस्यता रद्द होने की तलवार लटक रही है।)

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