नोटबंदी के बाद खालिस्तानियों के भरोसे केजरीवाल!

नोटबंदी के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने के लायक नहीं रही है। नोटबंदी के बाद बीते एक महीने में खालिस्तानी अलगाववादियों ने एक तरह से आम आदमी पार्टी पर कब्जा कर लिया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इसकी वजह से पंजाब में कई पुराने वॉलेंटियर्स पाला बदलने को मजबूर हो रहे हैं। दरअसल नोटबंदी के बाद चुनाव में खर्च के लिए जुटाई गई बड़ी रकम रद्दी हो गई है। इसके बाद केजरीवाल ने फंडिंग के लिए लगभग पूरी तरह से खालिस्तान समर्थकों के आगे सरेंडर कर दिया है। इसका असर रोजमर्रा के चुनाव प्रचार और टिकटों के बंटवारे पर भी देखने को मिल रहा है। ये खालिस्तान समर्थक एनजीओ जैसी संस्थाओं की आड़ में आज भी पंजाब में सक्रिय है। आरोप लगते हैं कि ये हवाला के जरिए विदेशों में बसे खालिस्तानी संगठनों से फंड भी पाते हैं। पंजाब कांग्रेस के नेता अमरिंदर सिंह तो खुलकर कह चुके हैं कि आम आदमी पार्टी को खालिस्तानियों से पैसे मिल रहे हैं और इसके सबूत वो सही वक्त पर सार्वजनिक करेंगे।

खालिस्तान समर्थक संगठन प्रचार में सक्रिय

बीते 3-4 महीने में पंजाब के दूरदराज के इलाकों में खालिस्तान समर्थक संगठन आम आदमी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं। ज्यादातर इलाकों में पार्टी का संगठन तक नहीं है, इसके बावजूद वहां पर आप की गतिविधियां सभी को हैरान कर रही हैं। हमारे सूत्र के मुताबिक केजरीवाल की रैलियों में भीड़ जुटाने का जिम्मा भी इन्हीं संगठनों को सौंपा गया है। ये संगठन ट्रकों में भर-भरकर दूरदराज के गांवों से रैलियों में लोगों को पहुंचाने का काम करते हैं। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी के कई पोस्टरों में केजरीवाल से भी बड़ी फोटो आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाला की लगी हैं। कई जगह आप की रैलियों में खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगने की खबरें लोकल मीडिया में छपती रही हैं।

आम आदमी पार्टी के ऐसे पोस्टरों पर काफी विवाद रहा है। इनमें आतंकवादी भिंडरावाले की तस्वीर केजरीवाल से भी बड़ी लगाई गई है।

जरनैल सिंह की उम्मीदवारी खतरनाक लक्षण

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के राजौरी गार्डन से विधायक जरनैल सिंह को पंजाब में प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ाने का एलान किया है। जानकार इसे बेहद खतरनाक लक्षण के तौर पर देख रहे हैं। दरअसल इसे अकाली और खालिस्तानी के बीच में वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। जरनैल सिंह पेशे से पत्रकार था और उसने दिल्ली में तब के गृह मंत्री पी चिदंबरम पर जूता फेंका था। जरनैल सिंह को कट्टर खालिस्तानी नेता के तौर पर जाना जाता है। इससे पहले वो यूरोप और कनाडा जाकर अलग खालिस्तान देश के समर्थन में होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेता रहा है।

हमारे सूत्र के मुताबिक आम आदमी पार्टी की पंजाब यूनिट के नेता जरनैल सिंह को भेजे जाने से नाखुश हैं। उन्हें लग रहा है कि हाईकमान ने ऐसा करके उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। क्योंकि जरनैल सिंह का नाम आगे आने के कुछ वक्त पहले से ही प्रचार और रणनीति से जुड़े सारे काम कुछ नए लोगों ने अपने कब्जे में ले लिया है।

फंडिंग के लिए हवाला नेटवर्क का ही आसरा!

दरअसल उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार के लिए अगले कुछ हफ्तों में ज्यादा पैसे की जरूरत है। हमारे सूत्र का दावा है कि केजरीवाल ने इस काम से पूरी तरह से पार्टी को अलग कर लिया है। उन्होंने खालिस्तान समर्थक संगठनों से कहा है कि वो फंड का इंतजाम करें और बाहर रहते हुए पंजाब में पार्टी की मदद करें। ये खालिस्तान समर्थक संगठन हवाला नेटवर्क के जरिए विदेशों से पैसे हासिल करते हैं। हालांकि नोटबंदी के बाद ब्लैकमनी को लेकर हो रही सख्ती के कारण वो भी अब तक बहुत कामयाब नहीं हो सके हैं। फिलहाल केजरीवाल ने पंजाब चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना रखा है ऐसे में वो और उनकी पार्टी पूरी तरह खालिस्तानी संगठनों के भरोसे है।

न्यूजलूज़ पर हमने बताया था कि कैसे डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया दरअसल खालिस्तानी नेताओं से मिलने के लिए पिछले दिनों फिनलैंड गए थे। नीचे लिंक पर क्लिक करके आप ये खबर पढ़ सकते हैं:

रिपोर्ट पढ़ें: फिनलैंड में खालिस्तानियों से मिलने गए हैं सिसोदिया

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