अगले महीने से शुरू होगा ‘बड़ी मछलियों’ का शिकार!

30 दिसंबर को नोटबंदी की प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब काला धन रखने वाले बड़े लोगों पर हाथ डालने की तैयारी है। सरकारी जानकारी के मुताबिक नोटबंदी के बाद बहुत से काले कुबेरों ने नई करंसी में काला धन जुटा लिया है। इनमें से कई के नाम सरकार के पास पहुंच चुके हैं और कुछ की जांच पड़ताल अभी जारी है। ये काम रेवेन्यू इंटेलीजेंस विभाग और कुछ दूसरी खुफिया एजेंसियों के जरिए कराया जा रहा है। अगले हफ्ते तक इन बड़ी मछलियों की लिस्ट तैयार हो जाएगी और उसके बाद जनवरी महीने में उनके शिकार पर ही फोकस रहेगा। इस लिस्ट में कई बड़े नेता, अफसर और कारोबारियों के नाम हैं। 8 नवंबर के बाद इन सभी ने गैर-कानूनी तरीके से अपनी काली कमाई को सफेद करवाया। इनमें से ज्यादातर की लेनदेन के सबूत एजेंसियों के हाथ लग चुके हैं।

जनता चाहती है बड़े लोगों पर कार्रवाई

पिछले दिनों में जगह-जगह छोटे-छोटे कई छापों में करोड़ों रुपये जब्त हो चुके हैं। लोगों को लग रहा है कि अगर इन छोटे लोगों ने इतने पैसे जुटा लिए तो बड़े लोगों का क्या होगा। सरकार को इस बात का अहसास है कि जब तक बड़े अपराधियों को कानून का मजा न चखाया जाए, तब तक लोगों में नोटबंदी की पूरी प्रक्रिया पर शक बना रहेगा। मोदी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले-पहले लोगों के इस शक को हर हाल में हटाना चाहती है। बड़े लोग आर्थिक अपराध को बेहद सफाई से करते हैं जिसकी वजह से इन्हें कोर्ट की नजर में गुनहगार साबित करना टेढ़ी खीर होता है।

सीधे प्रधानमंत्री रखेंगे कार्रवाई पर नज़र

किसी बड़े नेता, अफसर या कारोबारी के खिलाफ जब कोई कार्रवाई होता है तो वो पुलिस और प्रशासन के दूसरे तबकों पर दबाव बनाकर आसानी से छूटने का रास्ता निकाल लेता है। साथ ही ऐसे लोग मीडिया की मदद से खुद को पीड़ित साबित करने में भी काफी तेज़ होते हैं। ऐसे में बड़ी मछलियों पर हाथ डालना बेहद चुनौती भरा माना जाता है। लिहाजा पीएम मोदी अगले एक महीने तक चलने वाले इस अभियान पर खुद सीधे तौर पर नज़र रखेंगे। जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी, उससे जुड़े कागजात को वो खुद देखेंगे। ताकि चूक और जवाबदेही को लेकर कोई समस्या न आए।

बैंकों की भूमिका से नाराज़ हैं पीएम मोदी

बताया जा रहा है कि नोटबंदी के दौरान बैंकों के अफसरों ने जिस तरह का किरदार निभाया है उससे प्रधानमंत्री मोदी खासे नाराज हैं। उन्होंने बैंकों के सबसे बड़े अफसरों की जवाबदेही तय करने का फैसला किया है। आने वाले दिनों में कई बड़े बैंकों के ऊपरी मैनेजमेंट के लोगों का पत्ता कट सकता है। साथ ही जिन बैंक कर्मचारियों ने किसी भी तरह की घपलेबाजी की है, उसकी पूरी लिस्ट तैयार करने के लिए इनकम टैक्स विभाग से कहा गया है। इस लिस्ट के आते ही बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू होगी। एक सरकारी सूत्र के मुताबिक मार्च-अप्रैल के बाद कई बड़े बैंक अफसर गिरफ्तार हो सकते हैं और कइयों की नौकरी जाएगी। जिन बैंक अफसरों ने रिश्वत लेकर धांधली करवाई है उनसे रकम की रिकवरी भी कराई जाएगी।

सियासी जोखिम लेने को तैयार है सरकार

सूत्रों के मुताबिक मोदी ने नोटबंदी के खलनायकों पर कार्रवाई के लिए जनवरी से अप्रैल का समय रखा है। इसी दौरान राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए ये जोखिम भरा काम भी होगा। लेकिन पीएम मोदी ने साफ कहा है कि चाहे पार्टी को राजनीतिक नुकसान ही क्यों न झेलना पड़े, लेकिन कालेधन के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। सरकार सिर्फ यह कोशिश करेगी कि आम लोगों को विश्वास में लेकर चला जाए, ताकि वो समझ सकें कि कैश की कमी से उनको जो दिक्कतें हुई हैं वो बेकार नहीं जाएंगी।

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