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क्रिकेटर कपिल देव भी ब्लैकमनी के चक्कर में फंसे!

देश के महानतम क्रिकेटरों में से एक कपिल देव भी ब्लैकमनी के चक्कर में फंस गए हैं। खबर है कि कपिल और उनकी पत्नी के खिलाफ इनकम टैक्स की जांच चल रही है। ये खुलासा एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट ने किया है। दस्तावेजों के मुताबिक कपिल और उनकी पत्नी ने एक कंपनी के शेयर कौड़ियों के दाम में खरीदे। ये कंपनी भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार नोएडा अथॉरिटी के बर्खास्त चीफ इंजीनियर यादव सिंह की बताई जा रही है। यादव सिंह इस कंपनी को अपने एक करीबी के नाम पर चलाता है। यादव सिंह अभी जेल में बंद है।

कपिल देव को भेजा गया है नोटिस

रिपोर्ट के मुताबिक कपिल को आयकर का नोटिस भी भेजा जा चुका है। इस केस में कपिल के साथ उनकी पत्नी रोमी देव और कुछ अन्य लोग शामिल हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक बिजनेस बे कॉरपोरेट पार्क्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की इस कंपनी में कपिल देव, उनकी पत्नी रोमी और दो अन्य लोग शेयरहोल्डर थे। इन कपिल ने कंपनी के शेयर सिर्फ 6 करोड़ रुपये खरीदे, जबकि इसकी वास्तविक कीमत 32 करोड़ रुपये थी। कपिल और यादव सिंह के कारोबारी रिश्तों की भी बात सामने आई है। इसके मुताबिक नोएडा अथॉरिटी में भ्रष्टाचार से यादव सिंह जो पैसे कमाता था उसे वो तीन अलग-अलग बिजनेस ग्रुप्स में लगाता था।

  1.  यादव सिंह ग्रुप– इसके मालिक खुद यादव सिंह और उसकी पत्नी कुसुमलता थी।
  2.  मैकॉन्स ग्रुप– इसके मालिक रजिंदर सिंह मनोचा, राजेश मनोचा और नम्रता मनोचा थे। ये तीनों यादव सिंह के बिजनेस एसोसिएट हैं।
  3.  मीनू ग्रुप– इसके मालिक अनिल पेशावरी और मीनाक्षी पेशावरी हैं। ये दोनों भी यादव के बिजनेस एसोसिएट हैं।

2008 में मेकॉन्स ग्रुप के राजेश मनोचा और उसकी पत्नी नम्रता मनोचा ने बिजनेस बे कॉरपोरेट पार्क्स नाम की कंपनी खरीदी। कंपनी ने नोएडा के सेक्टर-65 में 4.50 करोड़ रुपये का प्लॉट खरीदा। 2013 में मनोचा ने कंपनी के 4,14,000 शेयर कपिल देव और उनकी पत्नी और 2 अन्य को बेच दिए। ये डील करीब 5.80 करोड़ रुपये की हुई। कपिल देव के पास 1,55,500 और उनकी पत्नी के पास 51,500 शेयर आए। आयकर विभाग यही जानना चाहता था कि इन शेयरों का भाव मार्केट रेट से इतना कम क्यों था। प्रति शेयर 140 रुपये की कीमत रखी गई, जबकि मार्केट वैल्यू करीब 439 रुपये थी।

कपिल की सफाई, मेरा लेना-देना नहीं

उधर कपिल देव ने वेबसाइट से बातचीत में है कि इनकम टैक्स विभाग ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। कपिल ने धांधली के आरोपों को भी गलत बताया है। कपिल का कहना है कि मेरे पास अब इस कंपनी के शेयर नहीं हैं। कपिल का कहना है कि हो सकता है कि यादव सिंह ने मेरे नाम पर सस्ती दर पर शेयर बेचना दिखाया हो, लेकिन बदले में मैं उसको क्या फायदा पहुंचा सकता हूं?

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