Loose Top

दिल्ली- डिप्टी सीएम दफ्तर में पीएम से ज्यादा स्टाफ!

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के पर्सनल स्टाफ की भर्ती में घोटाले का मामला तूल पकड़ रहा है। एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने भर्ती से जुड़े कागजात मंगाकर जांच का काम शुरू कर दिया है। यह खबर आई थी कि डिप्टी सीएम के दफ्तर में पर्सनल स्टाफ की संख्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निजी स्टाफ से भी ज्यादा है। यह खुलासा एक आरटीआई से हुआ है। यह भी पता चला है कि स्टाफ की भर्ती में सिसोदिया ने नियमों का पालन नहीं किया और अपने करीबियों को खैरात में सरकारी पद बांट दिए।

डिप्टी सीएम को इतने लोग क्यों चाहिए?

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक सिसोदिया ने अपने दफ्तर में बीते एक साल के दौरान ओएसडी से लेकर चपरासी तक के पदों पर 63 लोगों की भर्ती की। इस लिस्ट के मुताबिक सिसोदिया के पास 7 ओएसडी यानी आफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी है, तीन निजी सचिव, हेडक्लर्क, एडवाइज़र, मीडिया स्टाफ के अलावा 18 चपरासी हैं। आरोप है कि ये सारे आम आदमी पार्टी से जुड़े लोग हैं, जिन्हें चुनाव में काम करने के इनाम के तौर पर ये पद दिए गए हैं। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्सनल स्टाफ में सिर्फ 39 लोग हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि देश के प्रधानमंत्री जब 39 स्टाफ में काम चला सकते हैं तो ऐसा क्या है कि दिल्ली जैसे आधे-अधूरे राज्य का डिप्टी सीएम 63 लोगों को नौकरी पर रख रहा है। ये हाल तब हैं जब दिल्ली सरकार कहती है कि उसे कोई काम नहीं करने दिया जा रहा।

सरकारी अफसरों से ज्यादा सैलरी

यह आरोप भी लग रहे हैं कि जिन कथित आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं को सरकारी दफ्तरों में नौकरी दी गई है उनकी सैलरी सिविल सेवा से चुनकर आने वाले अफसरों से भी ज्यादा है। जबकि इन पदों के लिए न तो कोई विज्ञापन जारी किया गया और न ही कोई लिखित परीक्षा हुई। फिलहाल एंटी-करप्शन में भर्ती में धांधली के एंगल से जांच शुरू कर दी है। उधर दिल्ली सरकार ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। अभी तक किसी बड़े नेता ने इस मामले पर कोई बयान तक नहीं दिया।

बीजेपी ने केजरीवाल सरकार को घेरा

इस बीच, दिल्ली बीजेपी ने सवाल उठाया है कि क्या निजी स्टाफ में 63 लोगों को रखना फिजूलखर्ची नहीं है? साथ ही पार्टी ने मामले की पूरी जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि अगर भर्ती में नियमों की अनदेखी की गई है तो सीएम और डिप्टी सीएम के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि जिन लोगों की भर्ती हुई है वो सभी उनकी पार्टी के ही लोग हैं। दो दिन पहले ही मनीष सिसोदिया ने कहा था कि नोटबंदी के कारण दिल्ली सरकार का टैक्स कलेक्शन कम हो गया है, जिसके कारण वो कर्मचारियों को सैलरी नहीं दे पाएंगे।

सिसोदिया पर पहले भी लगे हैं आरोप

मनीष सिसोदिया पर भ्रष्टाचार के आरोप कोई नई बात नहीं हैं। इससे पहले भी उन पर अक्सर आरोप लगते रहे हैं। दिल्ली सरकार ने प्रचार के लिए सरकारी विभाग की बजाय एक विज्ञापन एजेंसी को ठेके पर लिया है। इस एजेंसी को सरकारी विज्ञापनों के बदले लाखों रुपये की पेमेंट होती है। सीएजी ने अपनी जांच में इस घोटाले का खुलासा किया था। बताते हैं कि ये एजेंसी किसी और की नहीं, बल्कि खुद सिसोदिया के सगे साले की है। यह आरोप भी जांच के दायरे में है और इस पर आम आदमी पार्टी से लेकर केजरीवाल सरकार तक चुप्पी साधे हुए हैं। इस घोटाले पर इसी साल अगस्त में हमने रिपोर्ट भी पब्लिश की थी।


पढ़ें रिपोर्ट: केजरीवाल सरकार के विज्ञापन घोटाले का पूरा कच्चा चिट्ठा

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:
Donate with

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Popular This Week

Don`t copy text!