मुरथल में जाटों ने नहीं, मीडिया ने ‘गैंगरेप’ किया!

जाट आंदोलन के दौरान हरियाणा के मुरथल में हाइवे पर जा रही महिलाओं से कथित बलात्कार पर मीडिया की रिपोर्ट फर्जी पाई गई है। पुलिस और गांव के लोग ऐसी किसी घटना से इनकार करते रहे हैं। इसके बाद अंग्रेजी न्यूज़ वेबसाइट फर्स्टपोस्ट.कॉम ने एक रिपोर्ट पब्लिश की, जिसमें उन्होंने मुरथल में 22 फरवरी की रात कथित तौर पर बलात्कार की शिकार हुई महिला का बयान छापा। 29 फरवरी को पब्लिश हुई इस खबर में उस रात की ‘घटना’ की पूरी डिटेल दी गई। खबर में ‘पीड़ित महिला’ के पति, मां और यहां तक कि एक पुलिसवाले का बयान भी शामिल था। खबर को देने वाले रिपोर्टर का नाम है तारिक़ अनवर। इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद सबने यह मान ही लिया कि वाकई मुरथल में जाट आंदोलन के दौरान गैंगरेप हुए।

रिपोर्टर ने दोस्त को बनाया बलात्कार पीड़ित!

इस मामले में बनी एसआईटी ने रिपोर्ट को फर्जी पाया है। जांच में पता चला है कि रिपोर्टर तारिक अनवर ने अपनी खबर के लिए फर्जी कहानी और सबूत गढ़े। उसने अपनी एक महिला दोस्त को पीड़ित बनाकर उसकी आवाज में बातचीत रिकॉर्ड कर ली। यह सबकुछ इसलिए किया गया ताकि मुरथल में कथित बलात्कार के दावे सच साबित हो जाएं और इससे हरियाणा में मनोहरलाल खट्टर की बीजेपी सरकार की बदनामी हो। इस मामले में चल रही सुनवाई में एमिकस क्यूरी (कोर्ट मित्र) ने हाई कोर्ट को सलाह दी है कि दिल्ली के पत्रकार तारिक अनवर के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

फर्स्टपोस्ट की जांच में भी पत्रकार ही दोषी

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक न्यूज़ वेबसाइट फर्स्टपोस्ट ने जब मामले की इंटरनल जांच की तो यह पुष्टि हो गई कि तारिक अनवर ने घर बैठे-बैठे ये फर्जी रिपोर्ट तैयार की थी। इसके बाद इसी साल अप्रैल में उसे नौकरी से निकाला भी जा चुका है। तारिक़ ने अपनी रिपोर्ट में वहां के एसपी का बयान छापा था, जबकि एसपी ने कहा कि मेरी तारिक़ अनवर नाम के किसी रिपोर्टर से कभी कोई बात भी नहीं हुई। इस बात की जांच में पाया गया कि वाकई तारिक ने एसपी को न तो कभी फोन किया था और न ही कभी उनके दफ्तर गया था।

न्यूज़ पोर्टल ने फर्जी रिपोर्ट पर माफी मांगी

रिपोर्ट फर्जी पाए जाने के बाद फर्स्टपोस्ट.कॉम ने माफी मांग ली है। पोर्टल की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि “हमने 29 फरवरी 2016 को “Cops told us to be quiet for sake of honour’, Survivors of Murthal violence describe their ordeal” नाम से रिपोर्ट पोस्ट थी। अपनी जांच में हमने पाया है कि इस रिपोर्ट में कही गई बातों और तथ्यों में काफी अंतर है। इसलिए हम अपनी यह रिपोर्ट वापस ले रहे हैं और पाठकों से माफी मांगते हैं।” वेबसाइट ने रिपोर्ट को डिलीट कर दिया है, लेकिन इस खबर का ट्वीट अब भी पड़ा हुआ है।

तारिक़ अनवर को टाइम्स ग्रुप ने नौकरी दी

फर्स्टपोस्ट ने फर्जी पत्रकार तारिक़ अनवर को भले ही नौकरी से बाहर कर दिया, लेकिन उसे टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप में फौरन नौकरी मिल गई। अब वो न्यूज़ पोर्टल इंडियाटाइम्स.कॉम के लिए लिखता है। मतलब यह कि एक दागी पत्रकार जो अपने संस्थान से फर्जी रिपोर्ट लिखने पर निकाला गया, उसे फौरन एक दूसरा ग्रुप सबकुछ जानकर भी नौकरी दे देता है। जाहिर है इसके पीछे किसी न किसी तरह के राजनीतिक दबाव का मामला भी दिख रहा है। क्योंकि बिना राजनीतिक सिफारिश के ऐसा संभव नहीं है। हमारी जानकारी के मुताबिक तारिक़ अनवर को दोबारा नौकरी दिलाने में कांग्रेस के एक बड़े नेता ने मदद की थी। अब अगर सरकार या पुलिस इस फर्जी पत्रकार के खिलाफ केस दर्ज करती है तो दिल्ली में पत्रकारों और संपादकों के ‘गिरोह’ इसे प्रेस की आजादी पर हमला करार कर हंगामा करना शुरू कर देंगे।

मुरथल कांड में मीडिया खुद बना बलात्कारी!

फर्स्टपोस्ट ही नहीं, मुरथल कांड में खुद मीडिया शुरू से ही बलात्कारी की भूमिका में रहा। कई और अखबारों ने इस मामले में फर्जी खबरें प्लांट कीं। सबसे पहले चंडीगढ़ के अखबार द ट्रिब्यून ने एक ढाबा मालिक के हवाले से रिपोर्ट छापी थी कि ‘एक पीड़िता भागते हुए ढाबे पर मदद मांगने आई थी, उसके शरीर पर कोई कपड़े भी नहीं थे।’ बाद में जब एक टीवी चैनल के रिपोर्टर ने उस ढाबे पर जाकर अखबार में छपी खबर के बारे में पूछा तो ढाबे वाले ने बताया कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था और अखबार के किसी रिपोर्टर से उसकी ऐसी कोई बात नहीं हुई थी। इसके बाद कुछ चैनल ने एक ट्रक ड्राइवर को चश्मदीद बनाकर यह कहलवाया कि उसने मुरथल में महिलाओं के साथ जोर-जबर्दस्ती होते देखा था। बाद में उसी ट्रक ड्राइवर ने कहा कि मुझे एक चैनल वाले ने ऐसा कहने को बोला था। इन दोनों खबरों के फर्जी साबित होने के बाद अब तारिक अनवर की वो रिपोर्ट भी फर्जी साबित हो गई, जिसके आधार पर जाट आंदोलनकारियों और हरियाणा ही नहीं पूरे देश को बदनाम करने की कोशिश की गई।

 

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