जानिए 50 फीसदी पर ब्लैकमनी माफी स्कीम क्यों?

bhuwan-bhaskarअब नया हाहाकार मचा है। इनकम टैक्स के नए नियमों को लेकर। वैसे भी नोटबंदी पर मोदी को गरियाते-गरियाते तीन हफ्ते हो गए थे, तो कुछ नया ज़रूरी भी था। तो ये नया मिला है इनकम टैक्स के नये नियमों से। हंगामा मचा है कि ब्लैकमनी को आधे में सफेद किया जा रहा है। हंगामा करने वाले जो मोदी के अंधविरोधी हैं, उनको तो वैसे ही प्रणाम है। लेकिन भ्रम बाकी कई लोगों को भी हो रहा है। दरअसल यह भ्रम ब्लैक और ग्रे इकनॉमी का अंतर नहीं समझने के कारण पैदा हो रहा है।

ब्लैक और ग्रे इकोनॉमी का फर्क समझिए

50 प्रतिशत पर ब्लैकमनी को सफेद करने का ऑफर दरअसल ब्लैक को नहीं, ग्रे को सफेद करने का मौका है और इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है। इसको इस तरह समझा जाएः

दिल्ली में लाल बत्ती का उल्लंघन करने पर 100 रुपये का ज़ुर्माना है। मैंने लाल बत्ती का उल्लंघन किया और आगे खड़े ट्रैफिक हवलदार को ठेंगा दिखा कर एक्सेलरेटर और दबा दिया। लेकिन हवलदार भी हरियाणे का था और उसके पास एक बुलेट भी थी। सो उसने दौड़ाया और 2 किलोमीटर बाद मुझे दबोच लिया। अब? उसे क्या करना चाहिए?

लेकिन स्टोरी में थोड़ा ट्विस्ट है। हवलदार ने सबसे पहले मुझसे लाइसेंस मांगा। पता चला कि मेरे पास तो लाइसेंस ही नहीं है। फिर गाड़ी के काग़ज़ात मांगे। लो, काग़ज़ात भी गायब। तो अब क्या?

ऊपर का पहला उदाहरण ग्रे इकनॉमी का है और दूसरा ब्लैक इकनॉमी का। पहले में जब मैं पकड़ा गया, तो लाल बत्ती तोड़ने और फिर भागने के आरोप में मुझसे पांच गुना यानी 500 रुपये ज़ुर्माना वसूला जाएगा। लेकिन जब मैं दूसरे में पकड़ा गया, तो मेरी गाड़ी जब्त होगी और ये जांच होगी कि वह कहीं चोरी की तो नहीं है। अगर चोरी की हुई, तो फिर जेल भी होगी।

कितने डॉक्टर, वकील को जेल भेजेंगे?

यह 50% पर सफेद का जो ऑफर है, वह केवल उनके लिए है जिन्होंने कानूनी तरीके कमाई की, लेकिन टैक्स नहीं चुकाया। डॉक्टर, वकील जैसे लोग इसी दायरे में आते हैं। इनका अपराध केवल यही है कि इन्होंने कमाई पर तय टैक्स नहीं दिया। तो अब क्या आप इनकी जान लेना चाहते हैं। इनसे 30 की जगह 50 प्रतिशत टैक्स लिया जा रहा है और 25 प्रतिशत रकम बिना ब्याज के 4 साल के लिए ले ली जा रही है। वैसे भी क्या यह संभव है कि आप देश के कई बड़े डॉक्टरों, वकीलों और ऐसे दूसरे पेशेवरों को जेल में ठूंस दें? हो सकता है इनकी संख्या हजारों में हो।

लेकिन जिसने घूसखोरी, स्मगलिंग और दूसरे अपराध करके पैसे जमा किये हैं, उसके पास अपनी ब्लैकमनी को मिट्टी करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं रहेगा। क्योंकि अगर वह व्यक्ति इसे लेकर बैंक में जाएगा, तो आखिर में वह जेल पहुंच जाएगा। क्योंकि जिसे ‘फिफ्टी-फिफ्टी स्कीम’ कहा जा रहा है उसमें अपराध से जुटाए गए पैसे को सफेद करने की छूट नहीं है।

इसलिए अंधविरोधियों का तो कुछ नहीं, जिनके आंख-कान खुले हैं, उन्हें साफ समझना चाहिए कि सरकार का यह फैसला किसी भी तरह काले को सफेद करने के लिए कोई वीडीएस नहीं है। यह लोगों को अपनी ग़लती सुधारने और सरकारी खजाने में मोटी रकम वापस लाने की शायद आखिरी स्कीम है, जिसे आखिरकार इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने, ग़रीबी मिटाने जैसे कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।

(पत्रकार भुवन भास्कर के फेसबुक पेज से साभार)

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