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गुजरात के अंबाजी मंदिर में कैशलेस दान शुरू

गुजरात का मशहूर अंबाजी मंदिर आज से कैशलेस हो गया है। मंदिर में आने वाले भक्त अब श्रद्धा के हिसाब से कार्ड स्वाइप करके दान कर सकते हैं। इसके लिए मंदिर में स्वाइप मशीनें लगाई गई हैं। अंबाजी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने कार्ड से 31 हजार रुपये दान देकर मंदिर में कैशलेस सुविधा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद वो पहली बार अंबाजी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे, उनके साथ उनकी पत्नी भी थीं। देश के सबसे संपन्न मंदिरों में से एक अंबाजी मंदिर में नोटबंदी के बाद से चढ़ावे में भारी गिरावट आई थी। लेकिन अब यहां आने वाले भक्त 1 रुपये से लेकर कोई भी मनचाही रकम आराम से दान दे सकेंगे।

अनोखा है अंबाजी का मंदिर

हिंदू धर्म में मुख्य रूप से 12 शक्तिपीठ हैं। अंबाजी मंदिर इनमें से एक है। यह गुजरात-राजस्थान की सीमा पर पालनपुर जिले से करीब 65 किलोमीटर दूर अरासुर पर्वत पर बना हुआ है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां देवी की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है। अंबाजी मंदिर में केवल पवित्र श्रीयंत्र की पूजा मुख्य आराध्य रूप में की जाती है। इस यंत्र को कोई भी सीधे आंखों से देख नहीं सकता और इसकी फोटोग्राफी की भी मनाही है। मां अंबाजी के मूल पीठस्थल कस्बे में गब्बर पर्वत के शिखर पर है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां तीर्थयात्रा करने पूरे साल आते रहते हैं। विशेषकर पूर्णिमा के दिन यहां मेले जैसा दृश्य होता है। भदर्वी पूर्णिमा के दिन यहाँ बड़ा मेला भी लगता है। यूं तो देश भर से भक्तगण यहां साल भर मां की पूजा अर्चना के लिए आते हैं, लेकिन पूरा जुलाई माह यहां उत्सव का माहौल होता है। इस समय पूरे अम्बाजी कस्बे को दीपावली की तरह रोशनी से सजाया जाता है। माना जाता है कि ये मंदिर लगभग 1200 साल से अधिक पुराना है। इस मंदिर का शिखर 103 फ़ीट ऊंचा है और इस पर 358 स्वर्ण कलश स्थापित हैं।

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