मोदी ने शुरू की घर में सफाई, नेताओं से मांगा हिसाब!

Courtesy: Indian Express

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब बीजेपी के अंदर भ्रष्टाचारियों की सफाई का अभियान शुरू कर दिया है। सबसे पहले नंबर लगा है पार्टी के सांसदों और विधायकों का। सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने सभी सांसदों और विधायकों से कहा है कि वो 9 नवंबर से 31 दिसंबर के दौरान अपने लेन-देन और खातों की जानकारी अध्यक्ष अमित शाह के पास जमा कराएं। इसके लिए 1 जनवरी तक आखिरी तारीख भी तय कर दी गई थी। ऐसे संकेत हैं कि अगर किसी सांसद या विधायक के खाते में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो उस पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी और पार्टी भी उसे इसकी ‘सज़ा’ देगी। पीएम मोदी ने पिछले दिनों बीजेपी के सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों की बैठकों में कई बार यह बात दोहराई थी कि सभी अपने खातों को दुरुस्त कर लें, क्योंकि जब कानून का डंडा चलेगा तो अपने पराए में कोई भेद नहीं होने वाला।

परिवारवाले भी जांच के दायरे में!

अक्सर सांसद और विधायक अपनी संपत्ति बेटे-बेटियों या बीवी के नाम पर रखते हैं। सूत्रों के मुताबिक पीएम ने हिसाब-किताब का जो आदेश दिया है उसके तहत ऐसे तमाम करीबी रिश्तेदारों की संपत्ति भी शामिल होंगे। साथ ही सरकार सांसदों और विधायकों की कमाई के बारे में कार्यकर्ताओं से भी फीडबैक मंगा रही है। हालांकि इन सबकी पूरी जांच के बाद ही इन जानकारियों को सार्वजनिक किया जाएगा। पीएम के आदेश से किसी नेता को छूट नहीं दी गई है। मतलब यह कि खुद प्रधानमंत्री भी एक सांसद के तौर पर अपनी संपत्ति और खातों का ब्यौरा 1 जनवरी तक जमा कराएंगे।

बीजेपी नेताओं पर कोई नरमी नहीं

नोटबंदी लागू होने के बाद पीएम मोदी ने यह साफ दौर पर कहा था कि जो कोई भी गलत करता पाया जाएगा उसे सज़ा भुगतनी पड़ेगी। हमारी जानकारी के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग के अधिकारियों को भी यह निर्देश हैं कि अगर उन्हें किसी बीजेपी नेता पर रहम करने की जरूरत नहीं है। इसी का नतीजा था कि महाराष्ट्र सरकार में बीजेपी के एक मंत्री की कंपनी का कैश भी पकड़ा गया। इसके अलावा अलग-अलग शहरों में हो रही छापेमारी में ढेरों राजनीतिक लोग शिकार बने हैं, इनमें बीजेपी से जुड़े लोगों की भी अच्छी खासी संख्या है।

क्या बाकी पार्टियां भी मांगेंगी हिसाब?

मोदी ने अपने सांसदों और विधायकों से हिसाब मांगकर एक मिसाल कायम कर दी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां भी अपने सांसदों और विधायकों से ऐसे ही हिसाब मांगने की हिम्मत कर पाएंगी? क्योंकि यह तय है कि मोदी के कदम से बीजेपी के कई नेता नाराज हो जाएं और यहां तक कि पार्टी के खिलाफ काम करने लगें। लेकिन मोदी ने यह जोखिम ले लिया, क्या बाकी पार्टियां भी यह जोखिम लेंगी?

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